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Lakshagrih Evam Anya Natak

Lakshagrih Evam Anya Natak

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  • Pages: 160
  • Year: 2016, 1st Ed.
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126729463
  •  
    बांग्ला के प्रख्यात नाटककार और रंगकर्मी व्रात्य वसु से हिंदी के पाठक अपरिचित नहीं है ! लगभग चार वर्ष पहले 'चतुष्कोण' शीर्षक से उनके चार नाटकों का संग्रह हिंदी में अनूदित होकर आ चुका है, जिसे नाटक-प्रेमी पाठकों के साथ-साथ रंगकर्मियों ने भी बहुत उत्साह के साथ स्वीकार किया ! इस नए संग्रह में उनके तीन नाटक संकलित हैं-- 'लाक्षागृह', 'संध्या कि आरजू में भोर का सरसों फूल' और 'बम' (बोमा) ! व्रात्य वसु का नाटककार अपने समय को लक्षित होता है लेकिन जहाँ से वे अपने वर्तमान को देखते हैं, वह एक वृहत दृष्टि-बिंदु है ! इस संग्रह में शामिल नाटक भी इसके अपवाद नहीं हैं ! 'लाक्षागृह' में यदि वे महाभारत कि एक घटना को आधार बनाकर मनुष्य कि चिरंतन प्रवृत्तियों कि पड़ताल करते हैं तो, 'संध्या कि आरजू...' के अपने पात्रों को आज के कॉरपोरेट तंत्र में स्थित करते हैं और इधर उभरी नई विडम्बनाओं पर प्रकाश डालते हैं ! समय के इस बड़े अंतराल के बीच 'बम' कि पृष्ठभूमि आजादी के पहले का अविभाजित बंगाल है जिसमें हमें अरविन्द घोष मिलेंगे-ऋषि के रूप में नहीं, क्रन्तिकारी के रूप में....! इसके अलावा इन नाटकों का सबसे बड़ा आकर्षण इनका भाषा-सौष्ठव और मंचीयता है जो इन्हें एक तरफ अभिनेय बनाती है तो दूसरी तरफ पठनीय भी ! कथ्य स्वयं एक तत्त्व है जिसके लिए इन्हें पढ़ा ही जाना चाहिए !

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    Vratya Basu

    जन्म : 25 सितम्बर, 1969, कोलकाता में।

    शिक्षा : बांगुर स्कूल, प्रेसीडेंसी कॉलेज और कलकत्ता विश्वविद्यालय में। बांग्ला भाषा और साहित्य में एम.ए.।

    कोलकाता के सीटी कॉलेज में प्राध्यापक। पहले 'गणकृष्टि’ के और इस समय के सबसे सफल ग्रुप थियेटर 'व्रात्यजन’ के नाटककार, निर्देशक और अभिनेता। सम्मानित नाट्य व्यक्तित्व विष्णु बसु के पुत्र व्रात्य बसु ने बांग्ला रंगमंच में अपनी प्रतिभा और तारुण्य का गम्भीर परिचय दिया है। अभी तक इन्हें श्यामल सेन स्मृति सम्मान (1998), दिशारी पुरस्कार (2000) एवं सत्येन मित्र पुरस्कार (2001, 2003 और 2004) मिल चुके हैं। इनके निर्देशन में बनी उल्लेखनीय फिल्म 'रास्ता’ एवं 'तिस्ता’ हैं।

    प्रकाशन : अब तक तीन नाट्य-संग्रह एवं पत्र-पत्रिकाओं में अनेक लेख प्रकाशित।

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