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Aazadi Mera Brand

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  • Pages: 188
  • Year: 2016, 1st Ed.
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126729562
  •  
    जितनी बड़ी दुनिया बाहर है, उतनी ही बड़ी एक दुनिया हमारे अन्दर भी है, अपने ऋषियों मुनियों की कहानियां सुनकर लगता है कि वे सिर्फ भीतर ही चले होंगे ! यह किताब इन दोनों दुनियाओं को जोड़ती हुई चलती है ! यह महसूस कराते हुए कि भीतर की मंजिलों को हम बाहर चलते हुए भी छू सकते हैं, बशतें अपने आप को लादकर न चले हों ! उतना ही एकांत साथ लेकर निकले हों जितना एकांत ऋषि अपने भीतर की यात्रा पर लेकर निकला होगा ! अनुराधा बेनीवाल की इस एकाकी यात्रा में आप ज्ञान से भारी नहीं होते, सफ़र से हलके होते हैं ! न उसने कहीं ज्ञान जुटाने की ज्यादा कोशिश की, और न पाठक को वह थाती साँपकर अमर होने की ! इसीलिए शायद यह पुस्तक यात्रा-वृतांत नहीं, खुद एक यात्रा हो गई है ! एक सामाजिक, संस्कृतिक यात्रा, और एक प्रश्न-यात्रा जो शुरू हो इस सवाल से होती है कि आखिर कोई भारतीय लड़की ‘अच्छी भारतीय लड़की’ के खांचों-सांचों की पवित्र कुंठाओं के जाल को क्यों नहीं तोड़ सकती ? सुदूर बाहर की इस यात्रा में वह भीतर के कई दुर्लभ पड़ावों से गुजरती है, और अपनी संस्कृति, समाज और आध्यात्मिकता को लेकर कुछ इस अंदाज में प्रश्नवाचक होती है कि अपनी हिप्पोक्रेसियों को देखना हमारे लिए यकायक आसान हो जाता है ! जिंदगी के अनेक खुशनुमा चेहरे इस सफ़र में अनुराधा ने पकडे हैं ! और उत्सव की तरह जिया है ! इनमे सबसे बड़ा उत्सव है निजता का ! निजी स्पेस के सम्मान का जो उसे भारत में नहीं दिखा ! अपने मन का कुछ कर सकने लायक थोड़ी-सी खुली जगह, जो इतने बड़े इस देश में कहीं उपलब्ध नहीं है ! औरतों के लिए तो बिलकुल नहीं !

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    Anuradha Beniwal

    अनुराधा बेनीवाल

    अनुराधा बेनीवाल का जन्म हरियाणा के रोहतक जिले के खेड़ी महम गाँव में 1986 ई. में हुआ. इनकी 12वीं तक की अनौपचारिक पढ़ाई पिता श्री कृष्ण सिंह बेनीवाल की देखरेख में घर में हुई. 15 वर्ष की आयु में ये राष्ट्रीय शतरंज प्रतियोगिता की विजेता रहीं. 16 वर्ष की आयु में विश्व शतरंज प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व किया. उसके बाद इन्होंने प्रतिस्पर्धी शतरंज खेल की दुनिया से खुद को अलग कर लिया. तब इनकी वर्ल्ड रैंकिंग केवल 38 थी.

    दिल्ली विश्वविद्यालय के मिरांडा हाउस कॉलेज से अंग्रेजी विषय में बी. ए. (ऑनर्स) करने के बाद अनुराधा ने भारती विद्यापीठ लॉ कॉलेज, पुणे से एलएलबी की पढ़ाई की. बाद में महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक से अंग्रेजी विषय में एम.ए. भी किया. इस दौरान ये तमाम खेल गतिविधियों से कई भूमिकाओं में जुडी रहीं.

    2013 में लन्दन जाने से पहले स्वावलंबी अनुराधा ने अपनी बचत के पैसों से भारत के अलग-अलग हिस्सों में अकेले भ्रमण किया. लंदन जाने के बाद इन्होंने वहां के प्रतिष्ठित स्कूलों में शतरंज सिखाना शुरू किया. अभी वहां ये कई बड़े स्कूलों और रॉयल ऑटोमोबिल क्लब समेत कई और क्लबों में भी शतरंज सिखाती हैं. साथ ही, वहां कैम्ब्रिज के लिए खुद भी शतरंज खेलती हैं.

    अंग्रेजी अख़बार ‘इंडियन एक्सप्रेस’ के लिए एक समय ब्लॉग लिखती रहीं अनुराधा अंग्रेजी के कई ट्रेवल वेबसाइट्स के लिए भी अपने यात्रा-संस्मरण लिख चुकी हैं. इनके कुछ ब्लॉग पोस्ट्स कई बड़े समाचार पोर्टल्स की भी सुर्खी बन चुके हैं. बावजूद इसके कि हिंदी भाषा इनके अध्ययन का विषय नहीं रही, लेकिन इनकी पहली किताब हिंदी में ‘आज़ादी मेरा ब्रांड’ नाम से आ रही है. यह उनकी घुमक्कड़ी के संस्मरणों की श्रृंखला ‘यायावरी आवारगी’ की भी पहली किताब है. इसमें वर्ष 2014 में इनके घूमे यूरोप के जिन 10 देशों का वर्णन है, वे हैं- फ़्रांस, बेल्जियम, हालैंड, जर्मनी, चेक रिपल्बिक, ब्रातिस्लावा, हंगरी, आस्ट्रिया और स्विट्जरलैंड. इनकी पसंद के लेखक प्रेमचन्द, टॉलस्टॉय, दास्तोवस्की, एलिस वॉकर, टोनी मॉरिसन, कृष्णा सोबती, निर्मल वर्मा और झुम्पा लाहिरी आदि हैं.

    • Sarthak An Imprint of Rajkamal Prakshan
    • Chahak An Imprint of Rajkamal Prakshan
    • Funda An Imprint of Radhakrishna
    • Korak An Imprint of Radhakrishna

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