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Janane Ki Baatein (Vol. 1-11)

Janane Ki Baatein (Vol. 1-11)

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Regular Price: Rs. 1,650

Special Price Rs. 1,485

10%

  • Year: 2010
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126711499
  •  
    राजा राममोहन राय से लेकर उत्पलेन्दु चक्रवर्ती तक बंगाल में निरन्तर नये विचारों के प्रसार के मा/यम से जिन महापुरुषों ने नवजागरण की धारा को मजबूत किया है, उनमें एक देवीप्रसाद चट्टोपा/याय भी हैं । भारतीय दर्शन की भौतिकवादी धारा को रेखांकित करने के लिए इन्हें पूरी दुनिया में आदर के साथ याद किया जाता है । देवीप्रसाद चट्टोपाध्याय ने एक तरफ भौतिकवाद को मज़बूत करने के लिए लोकायत जैसी पुस्तक लिखी तो दूसरी तरफ अन्धविश्वासों और रूढ़ियों में फँसे भारतीय समाज के बच्चों में समय, समाज और प्रकृति को देखने–परखने की वैज्ञानिकी समझ तथा ज्ञान के विकास के लिए ग्यारह खंडों में इस महत्त्वपूर्ण पुस्तकमाला का सम्पादन किया, जो किसी बाल विश्वकोश से कम नहीं है । इस श्रृंखला की पुस्तकें केवल बच्चों के ज्ञान का ही विस्तार नहीं करती हैं, बल्कि उन्हें बिल्कुल नई समझ और संसार को देखने की वैज्ञानिक दृष्टि प्रदान करती हैं । पुस्तकमाला के पहले भाग में लेखक ने प्रकृति से सम्बन्धित महत्त्वपूर्ण जानकारियाँ संकलित की हैं । इसमें आसमान, सौरमंडल और पृथ्वी के बनने तथा वनस्पतियों और जीवों की उत्पत्ति के वैज्ञानिक कारणों को बहुत ही रोचक शैली तथा सहज भाषा में समझाया गया है ।

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    Devi Prasad Chattopadhyay

    देवीप्रसाद चट्टोपाध्याय

    देवीप्रसाद चट्टोपाध्याय (जन्म: 1918) ने कलकत्ता विश्वविद्यालय से एम.ए., डी.लिट्. किया तथा मॉस्को एकेडेमी ऑफ साइंसेज से मानद डी.एससी. की उपाधि से सम्मानित हुए। वे जर्मन एकेडेमी ऑफ साइंसेज के अकादमीशियन तथा भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद के राष्ट्रीय फैलो भी रहे। काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च की शोध परियोजना ‘प्राचीन भारत में विज्ञान एवं टैक्नोलॉजी का इतिहास’ में अतिथि वैज्ञानिक के रूप में कार्य किया।

    उनके द्वारा लिखित और संपादित ग्रंथों की संख्या 40 से अधिक है, जिनमें से अनेक ग्रंथों का अनुवाद चीनी, रूसी, जर्मन, जापानी और अन्य विदेशी भाषाओं में हो चुका है। उनके कुछ महत्त्वपूर्ण प्रकाशन हैं: लोकायत, ह्वाट इज लिविंग एंड ह्वाट इज डेड इन इंडियन फिलॉसफी, इंडियन एथीज्श्म, साइंस एंड सोसायटी इन एनशिएंट इंडिया, इंडियन फिलॉसफी, हिस्ट्री ऑफ साइंस एंड टैक्नोलॉजी इन एनशिएंट इंडिया, द बिगिनिंग्स इत्यादि।

    निधन: 8 मई, 1993

    • Sarthak An Imprint of Rajkamal Prakshan
    • Chahak An Imprint of Rajkamal Prakshan
    • Funda An Imprint of Radhakrishna
    • Korak An Imprint of Radhakrishna

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