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Jaishankar Prasad: Rangshrishti-2

Jaishankar Prasad: Rangshrishti-2

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  • Pages: 306p
  • Year: 1998
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 10: JPR137
  •  
    जयशंकर प्रसाद के नाटक जिस कलात्मक तलाश की ओर संकेत करते हैं, उसमें व्यंजित होनेवाले वादी–विवादी दृश्यात्मक स्वर हमेशा से रंगकर्मियों और नाट्य–अध्येताओं के लिए चुनौती का विषय रहे हैं । अनेक रंगकर्मियों ने इस चुनौती को स्वीकार करते हुए, प्रसाद के समय से आज तक, अपने–अपने तरीके से, प्रायोगिक मंचन द्वारा उनके नाटकों के साथ रचनात्मक रिश्ता बनाने का प्रयास किया है । इन विभिन्न प्रयोगों द्वारा प्रसाद के रंगमंच की एक ऐसी रूपरेखा उभर रही है, जिसको प्रस्थान–बिंदु मानकर आगे का रास्ता तय किया जा सकता है । इसी उद्देश्य से रंग–अध्येता महेश आनंद ने इस पुस्तक में, प्रसाद के नाटकों से संबं/िात अहम सवालों को कुरेदते हुए, उनकी प्रस्तुतियों की प्रामाणिक सूचनाओं एवं महत्त्वपूर्ण प्रस्तुतियों के विस्तृत विवेचन के मा/यम से रंगकर्मियों के प्रयासों के अनेक पड़ावों को रेखांकित किया है । विभिन्न प्रस्तुतियों से जुड़े निर्देशकों के वक्तव्यों, साक्षात्कारों, पत्रों और दुर्लभ समीक्षाओं के मा/यम से प्रसाद की नाट्यकला तथा रंगकर्मियों की अंतर्दृष्टि का एक नया रूप उभरता है । वर्षों के अथक परिश्रम से एकत्रित महत्त्वपूर्ण दस्तावेज़ोंµदृश्य–रचना, वेशभूषा, रंगोपकरणों के रेखांकनों, स्मारिकाओं, प्रस्तुतियों के छायाचित्रों, पोस्टरोंµके द्वारा प्रसाद के नाटकों की रंगयात्रा की पहचान कराई गई है । एक तरह से यह सामग्री प्रसाद के मंचित नाटकों के रंग–इतिहास के साथ–साथ शौकिया मंडलियों की एक अंतरंग झलक भी प्रस्तुत करती है । हिंदी में प्रकाशित यह पहली पुस्तक है, जिसमें किसी नाटककार की रंगसृष्टि के विविध रूपों से साक्षात्कार करने की प्रक्रिया में प्रलेखन (डॉक्यूमेंटेशन) का महत्त्व दिखाया गया है । पुस्तक के पहले भाग जयशंकर प्रसाद % रंगदृष्टि में प्रसाद के रंग–परिवेश तथा रंग–चिंतन का विश्लेषण करते हुए उनके नाटकों के शिल्प और रंग–संभावनाओं को रेखांकित किया गया है ।

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    Mahesh Anand

    नाट्य-समीक्षक तथा रंग-अध्येता.

    समकालीन भारतीय रंगमंच से गहरा और सक्रिय जुड़ाव.

    रंगमंच की शीर्ष पत्रिका नटरंग में संपादन-सहयोग.

    रचनाएं

    कहानी का रंगमंच (1997)

    जयशंकर प्रसाद: रंगसृष्टि/रंगमंच के लिए नाटक (1998)

    विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में समीक्षाएं तथा लेख.

    संप्रति दिल्ली कॉलेज ऑफ़ आटर्स ऐंड कॉमर्स (दिल्ली विश्वविद्यालय) में अध्यापन

    • Sarthak An Imprint of Rajkamal Prakshan
    • Chahak An Imprint of Rajkamal Prakshan
    • Funda An Imprint of Radhakrishna
    • Korak An Imprint of Radhakrishna

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    Address:1-B, Netaji Subhash Marg,
    Daryaganj, New Delhi-02

    Mail to: info@rajkamalprakashan.com

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    Fax: +91 11 2327 8144