• (011) 23274463
  • Help
INR
 
Shopping Cart (0 item)
My Cart

You have no items in your shopping cart.

You're currently on:

Satya ke mere prayog

Satya ke mere prayog

Availability: In stock

-
+

Regular Price: Rs. 495

Special Price Rs. 445

10%

 

  • Pages: 368p
  • Year: 2011
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126720958
  •  
    सत्य के मेरे प्रयोग विश्व के स्वप्नदर्शी और युगान्तरकारी नेताओं में सर्वाधिक चर्चित और देश-काल की सीमाओं को लाँघकर एक प्रतीक बन जानेवाले महात्मा गांधी की यह आत्मकथा न किसी परिचय की मुहताज है और न किसी प्रशंसा की। अनेक भाषाओं और देशों के असंख्य पाठकों के मन में राजनीति, समाज और नैतिकता से जुड़े सवालों को जगाने विचलित करने वाली इस पुस्तक का यह मूल गुजराती से अनूदित प्रामाणिक पाठ है। समाज और राजनीति की धारा में गांधी जी ने असहयोग और अहिंसा जैसे व्यावहारिक औजारों से एक मानवीय हस्तक्षेप किया, वहीं अपने निजी जीवन को उन्होंने सत्य, संयम और आत्मबल की लगभग एक प्रयोगशाला की तरह जिया। नैतिकता उनके लिए सिर्फ समाजोन्मुख, बाहरी मूल्य नहीं था, उनके लिए वह अपने अन्तःकरण के पारदर्शी आइने में खड़ा एक नग्न प्रश्न था, जिसका जवाब व्यक्ति को अपने सामने, अपने को ही देना होता है। अपने स्व की कसौटी ही जिसकी एकमात्र कसौटी होती है। यह पुस्तक गांधी जी के इसी अविराम नैतिक आत्मनिरीक्षण की विवरणिका है। इस चर्चित पुस्तक की यह पुनर्प्रस्तुति यह बात ध्यान में रखते हुए की जा रही है कि महान कृतियों का अनुवाद बार-बार होते रहना चाहिए। गुजराती और अंग्रेजी से कई उल्लेखनीय अनुवाद कर चुके सूरज प्रकाश ने इस अनुवाद में प्रयास किया है कि गांधी जी की इस सर्वाधिक पढ़ी जानेवाली कृति को आज का पाठक उस भाषा-संवेदना रोशनी में पढ़ सके जो आजादी के बाद हमारी चेतना का हिस्सा बनी है।

    Customer Reviews

    There are no customer reviews yet.

    Write Your Own Review

    Mohandas Karamchand Gandhi

    जन्म: 2 अक्टूबर, 1869, पोरबन्दर, काठियावाड़, भारत।

    शिक्षा: यूनिवर्सिटी कॉलेज, लन्दन।

    मोहनदास करमचन्द गांधी भारत एवं भारतीय स्वतंत्रता आन्दोलन के एक प्रमुख राजनैतिक एवं आध्यात्मिक नेता थे। विश्व-भर में लोग उन्हें महात्मा गांधी के नाम से जानते हैं। गांधी जी ने अहिंसक सविनय अवज्ञा का अपना राजनीतिक औजार प्रवासी वकील के रूप में दक्षिण अफ्रीका में भारतीय समुदाय के लोगों के नागरिक अधिकारों के लिए संघर्ष हेतु प्रयुक्त किया। 1915 में भारत वापसी के बाद उन्होंने यहाँ में किसानों, कृषि मजदूरों और शहरी श्रमिकों को अत्यधिक भूमि कर और भेदभाव के विरुद्ध आवाज उठाने के लिए एकजुट किया। 1921 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की बागडोर सँभालने के बाद उन्होंने देशभर में गरीबी से राहत दिलाने, महिलाओं के अधिकारों का विस्तार, धार्मिक एवं जातीय एकता का निर्माण, आत्म- निर्भरता के लिए अस्पृश्यता का अन्त आदि के लिए बहुत से आन्दोलन चलाए। किन्तु इन सबसे अधिक स्वराज की प्राप्ति उनका प्रमुख लक्ष्य था। गांधी जी ने ब्रिटिश सरकार द्वारा भारतीयों पर लगाए गए नमक कर के विरोध में 1930 में दांडी मार्च और इसके बाद 1942 में, ब्रिटिश भारत छोड़ो आन्दोलन से भारतीयों का नेतृत्व कर प्रसिद्धि प्राप्त की। दक्षिण अफ्रीका और भारत में विभिन्न अवसरों पर कई वर्षों तक उन्हें जेल में रहना पड़ा।

    निधन: 30 जनवरी, 1948

    • Sarthak An Imprint of Rajkamal Prakshan
    • Chahak An Imprint of Rajkamal Prakshan
    • Funda An Imprint of Radhakrishna
    • Korak An Imprint of Radhakrishna

    Location

    Address:1-B, Netaji Subhash Marg,
    Daryaganj, New Delhi-02

    Mail to: info@rajkamalprakashan.com

    Phone: +91 11 2327 4463/2328 8769

    Fax: +91 11 2327 8144