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Alama Kabutari

Alama Kabutari

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  • Pages: 389p
  • Year: 2016, 7th Ed.
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126701957
  •  
    अल्मा कबूतरी/मैत्रेयी पुष्पा कभी-कभी सड़कों, गलियों मंे घूमते या अखबारों की अपराध-सुर्खियों में दिखाई देनेवाले कंजर, साँझी, नट, मदारी, सँपेरे, पारदी, हाबूड़े, बनजारे, बावरिया, कबूतरे- न जाने कितनी जन-जातियाँ हैं जो सभ्य समाज के हाशियों पर डेरा लगाए सदियाँ गुज़ार देती हैं- हमारा उनसे चौकन्ना सम्बन्ध सिर्फ कामचलाऊ ही बना रहता है। उनके लिए हम हैं कज्जा और ‘दिकू’- यानी सभ्य-सम्भ्रान्त, ‘परदेसी’, उनका इस्तेमाल करने वाले शोषक- उनके अपराधों से डरते हुए, मगर उन्हें अपराधी बनाए रखने के आग्रही। हमारे लिए वे ऐसे छापामार गुरिल्ले हैं जो हमारी असावधानियों की दरारों से झपट्टा मारकर वापस अपनी दुनिया में जा छिपते हैं। कबूतरा पुरुष या तो जंगल में रहता है या जेल में...स्त्रियाँ शराब की भट्टियों पर या हमारे बिस्तरों पर... इन्हीं ‘अपरिचित’ लोगों की कहानी उठाई है कथाकार मैत्रेयी पुष्पा ने ‘अल्मा कबूतरी’ में। यह ‘बुन्देलखंड की विलुप्त होती जनजाति का समाज-वैज्ञानिक अध्ययन’ बिल्कुल नहीं है, हालाँकि कबूतरा समाज का लगभग सम्पूर्ण ताना-बाना यहाँ मौजूद है- यहाँ के लोग-लुगाइयाँ, उनके प्रेम-प्यार, झगड़े, शौर्य इस क्षेत्र को गुंजान किए हुए हैं।

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    Maitriye Pushpa

    जन्म : 30 नवम्बर, 1944, अलीगढ़ जि़ले के  सिकुर्रा गाँव में।

    आरम्भिक जीवन : जि़ला झाँसी के खिल्ली गाँव में।

    शिक्षा : एम.ए. (हिन्दी साहित्य), बुंदेलखंड कॉलेज, झाँसी।

    कृतियाँ : चिन्हार, गोमा हँसती है, ललमनियाँ तथा अन्य कहानियाँ, पियरी का सपना, प्रतिनिधि कहानियाँ, समग्र कहानियाँ (कहानी-संग्रह); बेतवा बहती रही, इदन्नमम, चाक, झूला नट, अल्मा कबूतरी, अगनपाखी, विजन, कही ईसुरी फाग, त्रिया हठ, गुनाह-बेगुनाह, फ़रिश्ते निकले (उपन्यास); कस्तूरी कुंडल बसै, गुड़िया भीतर गुड़िया (आत्मकथा); खुली खिड़कियाँ, सुनो मालिक सुनो, चर्चा हमारा, आवाज़, तब्दील निगाहें (स्त्री विमर्श); फाइटर की डायरी (रिपोर्ताज)।

    फैसला कहानी पर टेलीफिल्म वसुमती की चिट्ठी।

    प्रमुख सम्मान : सार्क लिट्रेरी अवार्ड, 'द हंगर प्रोजेक्ट’ (पंचायती राज) का सरोजिनी नायडू पुरस्कार, मंगला प्रसाद पारितोषिक, प्रेमचन्द सम्मान, हिन्दी अकादमी का साहित्यकार सम्मान, मध्यप्रदेश साहित्य परिषद का वीरसिंह जूदेव पुरस्कार, कथाक्रम सम्मान, शाश्वती सम्मान एवं उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान का महात्मा गांधी सम्मान।

    सम्प्रति : स्वतंत्र लेखन और सामाजिक मुद्दों पर सक्रिय हस्तक्षेप।

    सम्पर्क : 104, महागुन मार्फियस, प्लाट नं. ई-4, सेक्टर 50, नोएडा-201303 (उ.प्र.)।

    मोबाइल : 09910412680

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