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Ret Par Khema

Ret Par Khema

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  • Pages: 167p
  • Year: 2006
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 10: 8126712546
  •  
    एक दिन, तेज बहने वाली इन हवाओं ने, आधी रात, मेरे दरवाजे पर दस्तक दी थी, मुझे नाम से पुकारा था ! मेरे सहज भाव से दरवाजा खोल देने पर, इन हवाओं ने मेरे सीने पर जहर-बुझे खंजरों से हमला कर दिया था ! खून से तर-ब-तर मेरा बदन मेरे कमरे के फर्श पर बरसों-बरस लोटता रहा था ! बरसों-बरस, गर्द-व्-ख़ाक में डूबा रहा था ! आज फिर ये हवाये चक्रवात बनकर उभरी हैं, और मुझे अपने तूफानी बहाव में समेट लेना चाहती हैं ! मेरे दिल में इन हवाओं के लिए कोई शिकायत नहीं हैं ! मुझे इनके प्रति कोई गिला नहीं है ! कभी-कभी मैं सोचता हूँ, ये हवायें ही मेरे वजूद की जड़ों को मजबूती देती हैं, और मेरा इम्तेहान भी लेती रहती हैं ! मुझे हिला-डुला कर, मुझे हिचकोले दे-देकर ये हवाये इत्मीनान कर लेना चाहती हैं कि मैं जिन्दा हूँ ना, हालात की गोद में कभी न टूटने वाली नींद सो तो नहीं गया ! हवाओं, तेज बहो, और तेज बहो ! आँधियों और चक्रवात की मानिंद बहो ! मेरे पहले से ही लहूलुहान सीने पर अपने जहरीले तीरों की बारिश करो ! हवाओं, मुझे लील जाओ, ताकि खुदा की बनाई इस धरती पर कहीं मेरे वजूद का कोई निशान बाकी न रहे ! हवाओं, बहो, तेज बहो ! और तेज बहो ! हमारे और तुम्हारे लिए एक-दूसरे को आजमाने का इससे बेहतर मौसम और कब आयेगा !

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    Zabir Hussain

    जाबिर हुसेन
    अंग्रेज़ी भाषा एवं साहित्य के प्राध्यापक रहे। जेपी तहरीक में बेहद सक्रिय भूमिका निभाई। आपातकाल के दौरान, भूमिगत साहित्य का सम्पादन-प्रकाशन। 1977 में मुंगेर से बिहार विधान सभा के लिए चुने गए। काबीना मंत्री बने। 1990-95 में बिहार अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष रहे।
    1995-2006 तक बिहार विधान परिषद् के सभापति। 2006-2012 संसद (राज्यसभा) के सदस्य।
    हिन्दी-उर्दू में दो दर्जन से ज़्यादा किताबें प्रकाशित। उर्दू-फारसी की लगभग 50 पांडुलिपियों का सम्पादन। विधान परिषद् की पत्रिका साक्ष्य, दस्तावेज़, उर्दू मरकज़ अज़ीमाबाद के मुख-पत्र तर्जुमान और उर्दूनामा का सम्पादन। सात वर्षों से हिन्दी पत्रिका दोआबा का सम्पादन।
    सम्मान : 2005 में उर्दू कथा-डायरी रेत पर $खेमा के लिए साहित्य अकादेमी सम्मान। 2012 में नवें विश्व हिन्दी सम्मेलन (जोहान्सबर्ग, दक्षिण अ$फ्रीका) में विश्व हिन्दी सम्मान।
    रचनाएँ : डोला बीबी का मज़ार, रेत पर खेमा, जि़न्दा होने का सबूत, लोगां, जो आगे हैं, अतीत का चेहरा, एक नदी रेत भरी, रेत-रेत लहू, आलोम लाजावा, ध्वनिमत काफी नहीं, दो चेहरों वाली एक नदी, सुन ऐ कातिब, बे-अमां, बिहार की पसमांदा मुस्लिम आबादियाँ।
    सम्पादन : छह जिल्दों में बहार हुसेनाबादी का सम्पूर्ण साहित्य। दीवारे शब, दयारे शब, हिसारे शब, निगारे शब (उर्दूनामा के अंक)।
    सम्पर्क : 247 एमआईजी, लोहियानगर, पटना- 800020

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