• (011) 23274463
  • Help
INR
 
Shopping Cart (0 item)
My Cart

You have no items in your shopping cart.

You're currently on:

Natkhat Bandar

Natkhat Bandar

Availability: In stock

-
+

Regular Price: Rs. 225

Special Price Rs. 202

10%

  • Pages: 223p
  • Year: 2004
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 8126709979
  •  
    नटखट बंदर रामेश बेदी के अनुसार इंसान के सम्पर्क में सबसे अधिक मदारी बंदर आता है। मदारी की डुगडुगी पर नटखट बंदर को तमाशबीनों का मनोरंजन करते देखा जाता है। उधर आज़ाद विचरने वाले बंदर धरों, स्कूलों, दफ्श्तरों में ऊधम मचाने के लिए मशहूर हैं। बंदर की विभिन्न प्रजातियों को दिलचस्प और गहन जानकारी देने वाली इस पुस्तक में श्री बेदी ने प्रतिपादित किया है कि लंगूर का मुँह काला होता है और इसकी गाल में ताज़ा आहार जमा करने की थैली नहीं होती जैसी कि बंदर की गाल में होती है। श्रीराम का अनन्य भक्त होने से हनुमान के प्रति लोकमानस में अगाध श्रद्धा है। छोटे गाँव से लेकर महानगर तक सभी जगह स्थापित इसकी लाखों प्रतिमाओं को करोड़ों श्रद्धालु पूजते हैं। हनुमान चालीसा के पाठ से स्तवन करते हैं। यह भी कहा जाता है कि प्राणिमात्र के दुख-दर्दों को दूर कर उन्हें सुख की राह बताने के लिए भगवान बुद्ध अपने तीस पूर्वजन्मों में बंदर के रूप में पैदा हुए थे। पूँछ वाले और बिना पूँछ वाले बंदरों की जातियों का इस पुस्तक में सचित्र परिचय दिया है। 130 सादे चित्रों के अलावा और 15 रंगीन फोटो भी इसमें शामिल गए हैं। बिना पूँछ वाले बंदर - हुल्लक, ओरङ्-उतान, चिम्पांजी, गोरिल्ला - का दिलचस्प जीवन परिचय पुस्तक में दिया है।

    Customer Reviews

    There are no customer reviews yet.

    Write Your Own Review

    Ramesh Bedi

    बहुमुखी प्रतिभासम्पन्न लेखक और प्रकृति के कुशल फ़ोटोग्राफ़र।

    जन्म: 20 जून, 1915, कालाबाग़, उत्तर-पश्चिमी सीमा-प्रान्त (अब पाकिस्तान)।

    शिक्षा: गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय, हरिद्वार में अन्तेवासी के रूप में। जंगल के जीव-जन्तुओं का अध्ययन, उनकी फ़ोटोग्राफ़ी तथा फि़ल्मिंग के दौरान श्री रामेश बेदी ने महीनों नेशनल पार्कों और अभयवनों में गुज़ारे। निरन्तर सान्निध्य से वन्य जीवों के स्वभाव और उनकी संवेदनशील जीवन-शैली की बारीकियों को समझा। फलस्वरूप, खूँखार समझे जानेवाले जानवरों और श्री बेदी के बीच की खाई कमोबेश पट गई थी।

    कृतियाँ: जीव-जन्तु विषयक: आदमख़ोरों के बीच, गेंडा, सिंह, सिंहों के जंगल में, तेंदुआ और चीता, कबूतर, गजराल, चरकसंहिता के जीव-जन्तु, जंगल की बातें आदि। वनस्पतियों सम्बन्धी: गुणकारी फल, मानव उपयोगी पेड़, जंगल की जड़ी-बूटियाँ, जंगल के उपयोगी वृक्ष आदि। यात्रा-वृत्तान्त। अंग्रेज़ी पुस्तकें भी; कुछ पुस्तकें रूसी, पंजाबी, कन्नड़, उड़िया, बंगाली, गुजराती, मराठी में अनूदित-प्रकाशित। सैकड़ों लेख। अनेक लेख अंग्रेज़ी, रूसी, जर्मन, जापानी, इतालवी, नेपाली, मराठी, मलयालम आदि में अनूदित-प्रकाशित।

    यात्रा: अनुसन्धान कार्यों के सिलसिले में लन्दन, ब्राज़ील, कनाडा, भूटान और श्रीलंका की यात्रा।

    सम्मान: अनेक विशिष्ट पुरस्कार।

    निधन: 9 अप्रैल, 2003

    • Sarthak An Imprint of Rajkamal Prakshan
    • Chahak An Imprint of Rajkamal Prakshan
    • Funda An Imprint of Radhakrishna
    • Korak An Imprint of Radhakrishna

    Location

    Address:1-B, Netaji Subhash Marg,
    Daryaganj, New Delhi-02

    Mail to: info@rajkamalprakashan.com

    Phone: +91 11 2327 4463/2328 8769

    Fax: +91 11 2327 8144