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Gunkari Phal

Gunkari Phal

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  • Pages: 541p
  • Year: 2002
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126705986
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    गुणकारी फल फल प्रकृति द्वारा इन्सान को दिए गए अनुपम वरदान हैं। ये कभी ताज़े, कभी पकाकर और कभी सुखाकर खाए जाते हैं। ये क्षुधा शान्त करते हैं, तृप्ति प्रदान करते हैं। मीठी सुगन्ध और उन्नत स्वाद वाले फल चित्त को आध्ादित करते हैं। स्वस्थ शरीर के संचालन के लिए जिन प्राकृतिक तत्त्वों की ज़रूरत है वे हमें फलों से मिलते रहते हैं। इनके द्वारा कैल्शियम, लोहा, ताम्र, फॉस्फ़ोरस आदि खनिज लवण, चिकनाई और विटामिनों की शरीर में आपूर्ति होती रहती है। फलों को रुग्णावस्था में पथ्य रूप में खिलाया जाता है। कुछ रोगों के निवारण के लिए फल- चिकित्सक मुख्य रूप से फलों का सेवन कराते हैं। पैंसठ फलों का 39 रंगीन तथा 103 सादे चित्रों के साथ इस पुस्तक में परिचय दिया गया है। उनका स्वरूप, प्राप्ति-स्थान, विविध भाषाओं में उनके नाम, उनकी खेती, उनका रासायनिक संघटन, उनके गुण और उनकी पौष्टिक उपादेयता का प्रतिपादन किया गया है। ताज़ा खाए जाने वाले लोकप्रिय फल इसमें सम्मिलित किए गए हैं। जैसे - आम, अमरूद, अंगूर, चीकू, नासपाती, केला, पपीता, लीची, सन्तरा, ख़रबूजा, तरबूज़ आदि; पहाड़ी इलाक़ों में पैदा होने वाले फल खुमानी, सेब, आड़ई, आलूबुखारा, बगूगोशा, चेरी, स्ट्रौबेरी, आदि; बाहर के देशों से भारत में संप्रविष्ट किए गए फल; जैसे - कीवी, एवाकाडो, दुरियन, राम्बुतान; सूखे मेवे (ड्राई फ्रूट्स), जैसे - काजू, बादाम, अख़रोट, पिस्ता, चिलगोज़ा, किशमिश।

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    Ramesh Bedi

    बहुमुखी प्रतिभासम्पन्न लेखक और प्रकृति के कुशल फ़ोटोग्राफ़र।

    जन्म: 20 जून, 1915, कालाबाग़, उत्तर-पश्चिमी सीमा-प्रान्त (अब पाकिस्तान)।

    शिक्षा: गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय, हरिद्वार में अन्तेवासी के रूप में। जंगल के जीव-जन्तुओं का अध्ययन, उनकी फ़ोटोग्राफ़ी तथा फि़ल्मिंग के दौरान श्री रामेश बेदी ने महीनों नेशनल पार्कों और अभयवनों में गुज़ारे। निरन्तर सान्निध्य से वन्य जीवों के स्वभाव और उनकी संवेदनशील जीवन-शैली की बारीकियों को समझा। फलस्वरूप, खूँखार समझे जानेवाले जानवरों और श्री बेदी के बीच की खाई कमोबेश पट गई थी।

    कृतियाँ: जीव-जन्तु विषयक: आदमख़ोरों के बीच, गेंडा, सिंह, सिंहों के जंगल में, तेंदुआ और चीता, कबूतर, गजराल, चरकसंहिता के जीव-जन्तु, जंगल की बातें आदि। वनस्पतियों सम्बन्धी: गुणकारी फल, मानव उपयोगी पेड़, जंगल की जड़ी-बूटियाँ, जंगल के उपयोगी वृक्ष आदि। यात्रा-वृत्तान्त। अंग्रेज़ी पुस्तकें भी; कुछ पुस्तकें रूसी, पंजाबी, कन्नड़, उड़िया, बंगाली, गुजराती, मराठी में अनूदित-प्रकाशित। सैकड़ों लेख। अनेक लेख अंग्रेज़ी, रूसी, जर्मन, जापानी, इतालवी, नेपाली, मराठी, मलयालम आदि में अनूदित-प्रकाशित।

    यात्रा: अनुसन्धान कार्यों के सिलसिले में लन्दन, ब्राज़ील, कनाडा, भूटान और श्रीलंका की यात्रा।

    सम्मान: अनेक विशिष्ट पुरस्कार।

    निधन: 9 अप्रैल, 2003

    • Sarthak An Imprint of Rajkamal Prakshan
    • Chahak An Imprint of Rajkamal Prakshan
    • Funda An Imprint of Radhakrishna
    • Korak An Imprint of Radhakrishna

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