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Charaksamhita Ke Jiva-Jantu

Charaksamhita Ke Jiva-Jantu

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Special Price Rs. 855

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  • Pages: 533p
  • Year: 2002
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 8126704543
  •  
    चरकसंहिता के जीव-जन्तु चरकसंहिता व्यापक रूप से पढ़ा-पढ़ाया जाने वाला आयुर्वेद का प्रतिष्ठित ग्रन्थ है। महर्षि चरक ने इसमें अनेक प्रकार के मानव उपयोगी जीव-जन्तुओं का उल्लेख किया है। वनों, वनस्पतियों और जीव-जन्तुओं के अन्वेषक, प्राणि-विशेषज्ञ रामेश बेदी ने अपनी दीर्घकालीन अनुभव के आधार पर उनकी प्रकृति और जातियों को ध्यान में रखते हुए उन्हें निम्नलिखित वर्गों में श्रेणीबद्ध किया है: स्तनपायी की 44 जातियाँ पक्षियों की 42 जातियाँ सरीसृपों की 12 जातियाँ क्षुद्र जीवों की 12 जातियाँ कुल 110 जातियाँ इन जीव-जन्तुओं के सम्बन्ध में दिए गए 46 रंगीन फ़ोटो तथा 128 सादे चित्र इनके स्वरूप को भली भाँति समझने में सहायक होंगे। चरकसंहिता के जीव-जन्तुओं के स्वरूप, रहन-सहन, आहार-विहार, पारिवारिक जीवन, प्रजनन, सन्तान का पालन-पोषण, इन्सान के साथ उनका स्नेहल व्यवहार, इन्सान के लिए उनकी उपादेयता का लेखक ने विस्तार से परिचय दिया है। लेखक के अनुभव रोचक हैं। भाषा सरल, प्रवाहमयी और आकर्षक है। हिन्दी अकादमी, दिल्ली द्वारा प्रशस्ति पत्र एवं साहित्यिक कृति सम्मान (2000-2001) प्राप्त।

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    Ramesh Bedi

    बहुमुखी प्रतिभासम्पन्न लेखक और प्रकृति के कुशल फ़ोटोग्राफ़र।

    जन्म: 20 जून, 1915, कालाबाग़, उत्तर-पश्चिमी सीमा-प्रान्त (अब पाकिस्तान)।

    शिक्षा: गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय, हरिद्वार में अन्तेवासी के रूप में। जंगल के जीव-जन्तुओं का अध्ययन, उनकी फ़ोटोग्राफ़ी तथा फि़ल्मिंग के दौरान श्री रामेश बेदी ने महीनों नेशनल पार्कों और अभयवनों में गुज़ारे। निरन्तर सान्निध्य से वन्य जीवों के स्वभाव और उनकी संवेदनशील जीवन-शैली की बारीकियों को समझा। फलस्वरूप, खूँखार समझे जानेवाले जानवरों और श्री बेदी के बीच की खाई कमोबेश पट गई थी।

    कृतियाँ: जीव-जन्तु विषयक: आदमख़ोरों के बीच, गेंडा, सिंह, सिंहों के जंगल में, तेंदुआ और चीता, कबूतर, गजराल, चरकसंहिता के जीव-जन्तु, जंगल की बातें आदि। वनस्पतियों सम्बन्धी: गुणकारी फल, मानव उपयोगी पेड़, जंगल की जड़ी-बूटियाँ, जंगल के उपयोगी वृक्ष आदि। यात्रा-वृत्तान्त। अंग्रेज़ी पुस्तकें भी; कुछ पुस्तकें रूसी, पंजाबी, कन्नड़, उड़िया, बंगाली, गुजराती, मराठी में अनूदित-प्रकाशित। सैकड़ों लेख। अनेक लेख अंग्रेज़ी, रूसी, जर्मन, जापानी, इतालवी, नेपाली, मराठी, मलयालम आदि में अनूदित-प्रकाशित।

    यात्रा: अनुसन्धान कार्यों के सिलसिले में लन्दन, ब्राज़ील, कनाडा, भूटान और श्रीलंका की यात्रा।

    सम्मान: अनेक विशिष्ट पुरस्कार।

    निधन: 9 अप्रैल, 2003

    • Sarthak An Imprint of Rajkamal Prakshan
    • Chahak An Imprint of Rajkamal Prakshan
    • Funda An Imprint of Radhakrishna
    • Korak An Imprint of Radhakrishna
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