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Patthar Gali

Patthar Gali

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  • Pages: 172p
  • Year: 2006
  • Binding:  Paperback
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126702930
  •  
    ‘‘मुस्लिम समाज सिर्फ ‘गश्जश्ल’ नहीं है, बल्कि एक ऐसा ‘मर्सिया’ है जो वह अपनी रूढ़िवादिता की कब्र के सिरहाने पढ़ता है। पर उसके साजश् और आवाजश् को कितने लोग सुन पाते हैं, और उसका सही दर्द समझते हैं ?’’ लेखिका द्वारा की गई यह टिप्पणी इन कहानियों की पृष्ठभूमि और लेखकीय सरोकार को जिस संजीदगी से संकेतित करती है, कहानियों से गुजश्रने पर हम उसे और अधिक सघन होता हुआ पाते हैं। नासिरा शर्मा नयी पीढ़ी की कथाकार हैं लेकिन जिस अनुभव जगत को उन्होंने अपनी रचनात्मकता के केन्द्र में रखा है, वह उन्हें और उनकी संवेदना को पीढ़ियों और देश-काल के ओर-छोर तक फैला देता है। एक रूढ़िग्रस्त समाज में उसके बुनियादी अर्धांश - नारी जाति की घुटन, बेबसी और मुक्तिकामी छटपटाहट का जैसा चित्रण इन कहानियों में हुआ है, अन्यत्र दुर्लभ है। बल्कि ईमानदारी से स्वीकार किया जाय तो ये कहानियाँ नारी की जातीय त्रासदी का मर्मान्तक दस्तावेजश् हैं, फिर चाहे वह किसी भी सामन्ती समाज में क्यों न हो। दिन-रात टुकड़े-टुकड़े होकर बँटते रहना और दम तोड़ जाना ही जैसे उसकी नियति है। रचना-शिल्प की दृष्टि से भी ये कहानियाँ बेहद सधी हुई हैं। इनसे उद्घाटित होता हुआ यथार्थ अपने आनुभूतिक आवेग के कारण काव्यात्मकता से सराबोर है, यही कारण है कि लेखिका अपनी बात कहने के लिए न तो भाषायी आडम्बर का सहारा लेती है, न किसी अमूर्तन का और न किसी आरोपित प्रयोग और विचार का। उसमें अगर विस्तार भी है तो वह एक त्रासद स्थिति के काल-विस्तार को ही प्रतीकित करता है। कहना न होगा कि नासिरा शर्मा की ये कहानियाँ हमें अपने चरित्रों की तरह गहन अवसाद, छटपटाहट और बदलाव की चेतना से भर जाती हैं।

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    Nasira Sharma

    जन्म: सन् 1948, इलाहाबाद (उ.प्र.)।

    शिक्षा: पर्शियन में, आधुनिक भाषा और साहित्य विषय लेकर जे.एन.यू., नई दिल्ली से एम.ए.।

    गतिविधियाँ: वर्षों से रचनात्मक लेखन और स्वतंत्र पत्रकारिता। राष्ट्रीय-अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर धार्मिक और सामाजिक जड़वाद, खासकर मुस्लिम समाज के यथास्थितिवादी रुझान के विरुद्ध रचनात्मक संघर्ष के लिए सुपरिचित। आधुनिक पर्शियन साहित्य तथा समकालीन ईरानी समाज, संस्कृति और राजनीति विषयक मामलों पर विशेष कार्य। हिन्दी, उर्दू, अंग्रेजी, पर्शियन, पश्तो आदि विभिन्न भाषाओं के साहित्य का गहरा अध्ययन।

    प्रकाशित कृतियाँ: कहानी संग्रह: गूँगा आसमान, इंसानी नस्ल, संगसार, सबीना के चालीस चोर, इब्ने-मरियम, बुतख़ाना और दूसरा ताजमहल। शमी काग़ज़ (वर्तमान ईरानी जन-जीवन पर आधारित कहानी-संग्रह), सात नदियाँ एक समन्दर (क्रांतिकालीन ईरानी समाज और राजनीति पर आधृत उपन्यास), क़्ि$स्सा जाम का (खुरासानी लोककथाओं पर आधारित कहानियाँ), संसार अपने-अपने, पर्शियन ईरानियन रेवोल्यूशन (पर्शियन से अनूदित कहानियाँ), इकोज़ ऑफ ईरानियन रेवोल्यूशन (पर्शियन से अनूदित कविताएँ), काली छोटी मछली, बर्निंग पायर (अनुवाद)। उपन्यास ठीकरे की मँगनी और ज़िन्दा-मुहावरे। अफ़गानिस्तान: बुज़कशी का मैदान (अफगानी समाज पर सम्पूर्ण अध्ययन)।

    इनके अतिरिक्त ईरानी समाज और राजनीति से सम्बद्ध अनेक महत्त्वपूर्ण लेख और साक्षात्कार। ईरान-इराक के युद्धबन्दियों से लिए गए साक्षात्कारों के माध्यम से फ्रेंच और जर्मन भाषाओं में बनी टी.वी. फिल्मों में हिस्सेदारी। भारतीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा ग्रामीण और कस्बाई कामकाजी महिलाओं से सम्बद्ध एक टी.वी. सीरीज़ में तीन फिल्मों: आया बसन्त सखी, काली मोहनी तथा सेमल का दरख़्त: का आलेखन। जर्मनी, ब्रिटेन, ईरान, इराक और फ्रांस की यात्राएँ।

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