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  • Pages: 147p
  • Year: 2006
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 10: 812671235x
  •  
    जब कोई व्यक्ति टेलीविजन के परदे पर समाचार देख रहा होता है तो उसके जेश्हन में दो व्यक्ति अहम हो जाते हैं - एंकर और रिपोर्टर। एंकर जो टेलीविजन के परदे पर पहले-पहल किसी खबर की सूचना देता है, उसके बारे में बताता है, तो रिपोर्टर वह होता है जो घटनास्थल से यह बता रहा होता है कि घटनाक्रम किस प्रकार घटित हुआ। वास्तव मंा किसी महत्त्वपूर्ण खबर के दौरान दर्शकों के लिए यह भी महत्त्वपूर्ण नहीं होता है कि वे चैनल कौन-सा देख रहे हैं, वह महत्त्वपूर्ण खबर जिस भी चैनल पर आ रही होती है दर्शकों का रिमोट उसी चैनल पर ठहर जाता है। ऐसे में किसी समाचार चैनल के लिए एंकर और रिपोर्टर बहुत महत्त्वपूर्ण होते हैं। क्योंकि दर्शकों को चैनल से जोड़ने का काम वही करते हैं। इसलिए यह आवश्यक हो जाता है कि एंकर और रिपोर्टर को हर परिस्थिति को सँभालने में माहिर होना चाहिए। पुण्य प्रसून वाजपेयी ‘आजतक’ के प्रमुख एंकर हैं। पेशे के रूप में एंकर-रिपोर्टर का काम क्या होता है, उसकी भूमिका क्या होती है, उसका काम कितना चुनौतीपूर्ण होता है - पुण्य प्रसूनजी ने इन्हीं पहलुओं को विभिन्न पहलुओं से इस पुस्तक में रखा है। यह पुस्तक टी.वी. पत्रकारिता सीखनेवालों के लिए तो उपयोगी है ही, उनके लिए भी बड़े काम की साबित हो सकती है जो इन पेशों की चुनौतियों को जानना-समझना चाहते हैं। यह एक ‘इनसाउडर’ की ‘इनसाइड स्टोरी’ की तरह है।

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    Punya Prasoon Vajpayee

    समाज के अंतर्विरोध को बतौर पत्रकार टटोलना फितरत है। एक ओर सत्ता का गुदगुदापन तो दूसरी ओर आम आदमी की खुरदुरी ज़मीन के सच को मुद्दों के जरिये लाने का प्रयास। गत 18 साल में देश के हर उस क्षेत्र और लोगों के बीच जाकर उस आक्रोश को समझने का प्रयास जिसके बूते सत्ता या सरकार की नीतियों को खारिज कर आन्दोलन खड़ा करने की कवायद हो रही है? प्रिंट से विजश्ुअल मीडियम तक में नक्सली ज़मीन से लेकर कश्मीर की वादियों में लगनेवाले आज़ादी के नारों का सच कई तरह से कई बार रिपोर्टों में उभारा। इसी दौर में लोकमत समाचार, चाणक्य, संडे ऑब्ज़र्वर, संडे मेल, दिनमान टाइम्स, जनसत्ता सरीखे समाचार पत्रों में काम करना। 1996 में टी.वी. समाचार चैनल ‘आजतक’ से जुड़ना। दिसम्बर 2000 में ‘आजतक’ के 24 घंटे न्यूज़ चैनल लांच होने के बाद पहली बार पाकिस्तान के कब्जेश् वाले कश्मीर ‘पीओके’ से रिपोर्ट। एल.ओ.सी. पार आतंकवादी कैम्पों की हकीकत और लश्कर-ए-तोएबा के मुखिया मो. हाकिज़ सईद का इंटरव्यू लिया। जनवरी 2003 से अप्रैल 2004 तक ‘एनडीटीवी इंडिया’ न्यूज़ चैनल की शुरुआत से जुड़ना। एंकरिंग और इंटरव्यू प्रोग्राम ‘कशमकश’ के जरिये टी.वी. पत्रकारिता में नायाब प्रोग्राम की शुरुआत। दोबारा ‘आजतक’ में लौटना। इस पूरे दौर में संसद पर आतंकवादी हमला, फूलन की हत्या, मुशर्रफ की कश्मीर यात्रा, एन.डी.ए. सरकार के ‘शाइनिंग इंडिया’ कैम्पेन के फेल होने से लेकर अमेरिका के साथ परमाणु समझौते जैसे संवेदनशील मुद्दों से राष्ट्रीय- अन्तर्राष्ट्रीय मसलों पर एंकरिंग रिपोर्टिंग। हिन्दी न्यूज़ चैनलों के एकमात्र पत्रकार के तौर पर 2005 के लिए रामनाथ गोयनका ‘एक्सीलेंस इन जर्नलिज्म एवार्ड’ पुरस्कार से प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह द्वारा सम्मानित।

    संप्रति: ‘आजतक’ में एंकर/संपादक।

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