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Hindi Natak Ke Paanch Dashak

Hindi Natak Ke Paanch Dashak

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  • Pages: 272
  • Year: 2015, 2nd Ed.
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Radhakrishna Prakashan
  • ISBN 13: 9788183614375
  •  
    हिंदी रंगमंच की परंपरा सन 1880 में पसरी थिएटर के माध्यम से आरम्भ होकर 1930 में समाप्त मानी जाती है, लेकिन स्वातंत्रयोत्तर हिंदी नाटकों के इतिहास में रंगमंचीय नाटकों की महत्त्वपूर्ण भूमिका है ! स्वातंत्रयोत्तर हिंदी नाटकों का आधुनिक दृष्टि से मूल्यांकन करने के लिए भाव-बोध और शिल्प्बोध, इन दोनों ही पहलुओं का अध्ययन आवश्यक है ! इस पुस्तक में समकालीन रंग-परिदृश्य के सन्दर्भ में स्वातंत्रयोत्तर हिंदी नाटकों में निहित आधुनिकता-बोध का अध्ययन, विवेचन और विश्लेषण किया गया है, और हिंदी रंग-नाटक की विशिष्ट उपलब्धियों एवं संभावनाओं को भारतीय और पाश्चात्य रंगमंचीय संदर्भो में जांचने-परखने की कोशिश भी हा ! आधुनिक हिंदी नाटक की प्रमुख विशेषताओं और प्रवृत्तियों के रेखांकन के साथ अंतिम डॉ अध्यायों में प्रस्तुत 'रंगानुभूति और रंगमंचीय परिवेश ' तथा 'रंग-भाषा की तलाश : उपलब्धि और सम्भावना' जैसे अत्यंत महत्तपूर्ण, प्रासंगिक और जटिल विषयों के विवेचन नाटक के गंभीर अध्येताओं के साथ-साथ शायद रंगकर्मियों के लिए भी उपयोगी सिद्ध होंगे !

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    Kusum Khemani

    डॉ. कुसुम खेमानी
    जन्म : 19 सितम्बर, 1944
    शिक्षा : एम.ए. (प्रथम श्रेणी), पी-एच.डी. कलकत्ता विश्वविद्यालय।
    सृजन : सचित्र हिन्दी बालकोश, हिन्दी-अंग्रेजी बालकोश (कोश); हिन्दी नाटक के पाँच दशक (आलोचना); सच कहती कहानियाँ, एक अचम्भा प्रेम, अनुगूँज जिन्दगी की (कहानी-संग्रह); एक श$ख्स कहानी सा (जीवनी); कहानियाँ सुनाती यात्राएँ (यात्रा-वृत्तान्त); कुछ रेत... कुछ सीपियाँ... विचारों की (ललित निबन्ध); लावण्यदेवी, ; जडिय़ा बाई (उपन्यास)।
    अनुवाद एवं सम्पादन : जन-अरण्य (उपन्यास, शंकर), चश्मा बदल जाता है (उपन्यास, आशापूर्णा देवी), ज्योतिर्मयी देवी के कहानी-संग्रह का अनुवाद एवं सम्पादन, 'वागर्थ' का सम्पादन।
    विशेष : 'लावण्यदेवी' उपन्यास का अंग्रेजी, बांग्ला, नेपाली एवं मलयालम में अनुवाद। 'कहानियाँ सुनाती यात्राएँ' बांग्ला, राजस्थानी एवं मलयालम में प्रकाशित। 'लावण्यदेवी' उपन्यास का तमिल में डॉ. एन. जयश्री द्वारा एवं तेलगू में लावण्य नारला द्वारा शोध एवं अनुवाद। 'सच कहती कहानियाँ' की कथाभाषा पर डॉ. सुहासिनी (तमिल), करमजीत कौर (पंजाबी), विनीता सिंह (हिन्दी) एवं अंजना कुकरैती (कन्नड़) द्वारा शोध 'रश्मिरथी माँ' कहानी पर बांग्ला में टेलीफिल्म का निर्माण। 'साहित्य में उच्च मूल्यों की स्थापना' (सन्दर्भ : 'लावण्यदेवी' उपन्यास) विषय पर औरंगाबाद यूनिवर्सिटी द्वारा सेमिनार आयोजित।
    सम्मान : कुसुमांजलि साहित्य सम्मान (दिल्ली), साहित्य भूषण सम्मान (उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान), हरियाणा गौरव सम्मान (हरियाणा साहित्य अकादमी), भारत निर्माण सम्मान, रत्नादेवी गोयनका वाग्देवी पुरस्कार (मुम्बई), पश्चिम बंग प्रान्तीय मारवाड़ी सम्मेलन पुरस्कार, कौमी एकता पुरस्कार, भारत गौरव सम्मान (भारतीय वाङ्मयपीठ), समाज बन्धु पुरस्कार (मारवाड़ी युवा मंच)।
    सम्पर्क : 3बी, अस्टर कोर्ट, 3 लाउडन स्ट्रीट, कोलकाता-700017
    फोन : 033-3295 4490
    ई-मेल : kusumkhemani1@gmail.com

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