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Bhartipur

Bhartipur

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  • Pages: 227p
  • Year: 2000
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Radhakrishna Prakashan
  • ISBN 10: 817119575x
  • ISBN 13: 9788171195756
  •  
    भारतीपुर साहसिक और कलात्मक रचनाशीलता से औपन्यासिकता को नया संस्कार और आयाम देनेवाले विवादास्पद कन्नड़ लेखक यू–आर– अनन्तमूर्ति का बहुचर्चित उपन्यास है ‘भारतीपुर’ । यों ‘भारतीपुर’ एक दक्षिण भारतीय बस्ती की कहानी है, लेकिन बस्ती तो एक बहाना है । दरअसल यह समसामयिक भारतीय जीवन के दहशत पैदा करनेवाले अनुभवों और तिलमिला देनेवाले यथार्थ का बहुत तीखा और एक हद तक अविश्वसनीय लगनेवाला दस्तावेज़ है । भारतीपुर नामक बस्ती में मंजुनाथ का एक मन्दिर है । वह मन्दिर केवल देवालय नहीं, उस बस्ती की सारी व्यवस्था का केन्द्र हैµएक ऐसा केन्द्र और नियामक स्थल, जहाँ से ढोंग, पाखंड, स्खलन और दुराचार के अजस्र स्रोत फूटते हैंµसारी बस्ती के जीवन को समेटने, जकड़ने और यथास्थितिवाद को सुरक्षित बनाए रखने के लिए । ऐसे में सामाजिक परिवर्तन लाने की कोई भी भूमिका या उसका कोई प्रयत्न न केवल निष्फल होकर रह जाता है बल्कि अपने पीछे श्रीपतिराय और अडिगजी जैसे लोगों की कुंठित और हताश पीढ़ी छोड़ जाता है । ईश्वर, पूँजी और पाखंड की मिली–भगत और उसकी कुत्सित सत्ता के असली चेहरे को उजागर करनेवाले इस उपन्यास की सबसे बड़ी शक्ति हैµइसका सामाजिक सन्दर्भ, जो रचना को तो अतिरिक्त ऊर्जा देता ही है, उपन्यास को बेहद प्रासंगिक भी बनाता है । गहरी संवेदना, मार्मिक भाषा, भेदक सामाजिक दृष्टि और साहसिक रचनाशीलता के लिए विख्यात अनन्तमूर्ति का यह उपन्यास भी हिन्दी पाठकों के लिए एक नया अनुभव देता हैµ‘संस्कार’ की ही तरह ।

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    U. R. Ananthamurthy

    यू–आर– अनन्तमूर्ति
    जन्म : 21 दिसम्बर, 1932 ई– में मिलिगे नामक गाँव, जिला शिमोगा (कर्नाटक) ।
    शिक्षा : मैसूर विश्वविद्यालय से अंगे्रजी साहित्य में एम–ए– और बर्मिंघम विश्वविद्यालय (इंग्लैंड) से पी–एच–डी– ।
    कन्नड़ के प्रख्यात उपन्यासकार और कथा–लेखक । यदा–कदा कविताओं की भी रचना ।
    सन् 1975 में आयोवा विश्वविद्यालय, 1978 में तुफ्त्स विश्वविद्यालय (अमेरिका) में विज़िटिंग प्रोफेसर और 1985 में आयोवा विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित अन्तर्राष्ट्रीय लेखक सम्मेलन में हिस्सेदारी । सन् 1987 से 1991 तक महात्मा गां/ाी विश्वविद्यालय, कोट्टायम के उप–कुलपति और सन् 1980–1992 के बीच मैसूर विश्वविद्यालय में अंग्रेजी के प्रोफेसर–पद पर कार्य । नेशनल बुक ट्रस्ट, नई दिल्ली के चेयरमैन और साहित्य अकादेमी के अध्यक्ष–पद पर भी कार्यरत रहे ।
    भारतीय ज्ञानपीठ सहित साहित्य, संस्कृति और फिल्म क्षेत्र के अनेक प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित । देश–विदेश में आयोजित अनेक साहित्य–सम्मेलनों में व्याख्यान और अनेक संस्थाओं की मानद सदस्यता । अवस्था, संस्कार आदि उपन्यासों पर फिल्मों का निर्माण । अंग्रेजी, रूसी, फ्रेंच, हंगेरियन, हिन्दी, बांग्ला, मलयालम, मराठी, गुजराती आदि भाषाओं में रचनाओं का अनुवाद ।
    हिन्दी में अनूदित कृतियाँ : संस्कार, अवस्था, भारतीपुर (उपन्यास)य घटश्राद्ध, आकाश और बिल्ली (कहानी संग्रह) ।
    सम्प्रति : चेयरमैन, फिल्म एंड टेलिविज़न इंस्टीट्यूट ।

    • Sarthak An Imprint of Rajkamal Prakshan
    • Chahak An Imprint of Rajkamal Prakshan
    • Funda An Imprint of Radhakrishna
    • Korak An Imprint of Radhakrishna
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