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Awarn Mahila Constable Ki Diary

Awarn Mahila Constable Ki Diary

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  • Pages: 136p
  • Year: 2010
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Radhakrishna Prakashan
  • ISBN 13: 9788183613835
  •  
    'अवर्ण महिला कान्स्टेबल की डायरी' उपन्यास के क्षेत्र में नीरजा माधव असाधारण सिद्धि-सम्पन्न लेखिका हैं। उनकी विचार-विदग्धता, भाव-प्रवणता, अनछुए विषयों का वैविध्य उन्हें अपने समय के अन्य रचनाकारों से अलग रेखांकित करता है। उनके एक-एक शब्द में एक संस्कृति, जीवन-शैली अथवा सुख-दुख की आकृति सिमटी होती है जिसे दृष्टि-ओझल करते ही कथा-सूत्र के छूट जाने का भय होता है। यहाँ पर वे उन लेखकों से बिलकुल भिन्न हैं जो एक ही दृश्य के लम्बे, उबाऊ और शब्दों के मकड़जाल में पाठकों को उलझाए रखने का व्यापार करते हैं। नीरजा माधव के उपन्यासों में अपने युग की व्यापक बेचैनी, वेदना और सार्थक प्रतिक्रिया की अभिव्यक्ति दिखलाई पड़ती है। दलित-विमर्श और स्त्री-विमर्श के प्रचलित मुहावरों से बिलकुल पृथक् वे अपना मुहावरा स्वयं गढ़ती हैं और इस प्रकार अपनी राह भी। कुछ क्षण के लिए शिराओं में झनझनाहट पैदा करने वाला साहित्य देने के पक्ष में वे कभी नहीं रहीं। इस उपन्यास की भूमिका में भी वे लिखती हैं - ‘साहित्य का लक्ष्य मनुष्य के भीतर प्रेम, संयम, समर्पण और त्याग की उदात्त भावनाओं को जाग्रत करना है। ऐसे में यदि साहित्यकार भी मनुष्य की आदिम प्रवृत्ति को ही उत्तेजित करने का व्यापार करने लगेगा तो यह सृजन तो नहीं ही हुआ।’ एक अनछुए विषय पर लिखा गया अप्रतिम और पठनीय उपन्यास है: अवर्ण महिला कान्स्टेबल की डायरी। आस्था पर हमलों और धार्मिक संघर्षों का इतिहास प्राचीन होते हुए भी नित नये विकृत रूपों में समाज को प्रभावित कर रहा है। ऐसे ही एक प्राचीन धार्मिक स्थल की सुरक्षा में लगी अवर्ण महिला कान्स्टेबल अपनी कर्तव्यनिष्ठा का निर्वहन करते हुए आसपास के परिवेश को अपनी पैनी दृष्टि से देखती है और इतिहास तथा वर्तमान की अपनी व्याख्या करती है। नायिकाप्रधान यह उपन्यास अतीत की विसंगतियों के साथ वर्तमान में भी जड़ें जमाए अनेक कुंठाओं एवं आग्रहों के साथ दलित-विमर्श के कई अनछुए पक्षों को रेखांकित करता चलता है।

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    Neerja Madhav

    जन्म: 15 मार्च, 1962; ग्राम कोतवालपुर (सरेमू), पो. मुफ्तीगंज, जिला जौनपुर (उ.प्र.)।

    शिक्षा: एम.ए. (अंग्रेजी), पी-एच.डी., डिप्लोमा (सितार), बी.एड. (काशी हिन्दू विश्वविद्यालय वाराणसी से)।

    प्रकाशित कृतियाँ: कहानी संग्रह: चिटके आकाश का सूरज, अभी ठहरो अन्धी सदी, आदिम गन्ध तथा अन्य कहानियाँ, पथदंश, चुप चन्तारा रोना नहीं, वाया पाँड़ेपुर चौराहा; उपन्यास: यमदीप, तेभ्यः स्वधा, गेशे जम्पा, ईहा मृग, अवर्ण महिला कान्स्टेबल की डायरी; कविता संग्रह: प्रस्थानत्रयी, जोहरा फुआ; ललित निबन्ध एवं अन्य विधाएँ: रेडियो का कला पक्ष, चैत चित्त मन महुआ; अनुवाद: ‘यमदीप’ उपन्यास का उड़िया अनुवाद, कुछ कहानियों का उर्दू और बुल्गारियाई भाषा में अनुवाद, ‘गेशे जम्पा’ उपन्यास का अंग्रेजी एवं तिब्बती भाषा में अनुवाद प्रस्तावित।

    सम्मान: ‘सर्जना पुरस्कार’ उ.प्र. हिन्दी संस्थान, लखनऊ द्वारा वर्ष 1997 के लिए चिटके आकाश का सूरज पर; ‘यशपाल पुरस्कार’ उ.प्र. संस्थान, लखनऊ द्वारा वर्ष 1998 के लिए अभी ठहरो अन्धी सदी पर; ‘भारतेन्दु प्रभा’ भारतेन्दु अकादमी, वाराणसी द्वारा समग्र लेखन हेतु; ‘पहरुआ सम्मान’ शम्भुनाथ सिंह रिसर्च फाउंडेशन, वाराणसी द्वारा साहित्यिक योगदान हेतु; ‘युवा प्रतिभा सम्मान’ अखिल भारतीय विद्वत् परिषद्, वाराणसी द्वारा; ‘पत्रकारिता भूषण’ प्रतीक संस्थान, वाराणसी; ‘श्री तुलसी सम्मान’ सनातन धर्म परिषद् और तुलसी जन्मभूमि सूकर खेतविकास समिति द्वारा।

    सम्प्रति: कार्यक्रम अधिशासी (प्रसार भारती)।

    सम्पर्क: मधुवन, सा. 14/598, सारंगनाथ कॉलोनी, सारनाथ वाराणसी-221007 (उ.प्र.)   

    फोन: 0542-2595344

    मो.: 9838975270,  9792411451

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