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Nari Kamasutra

Nari Kamasutra

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  • Pages: 343p
  • Year: 2006
  • Binding:  Paperback
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Radhakrishna Prakashan
  • ISBN 13: 9788171195480
  •  
    नारी कामसूत्र पुरातन काल में नारी और काम, दोनों विषयों पर हमारे देश में बहुत कुछ लिखा गया। वात्स्यायन द्वारा रचित कामसूत्र में तथा चरक और सुश्रुत के आयुर्वेद ग्रंथों में नारी के काम से संबंधित कई पहलुओं पर ज्ञान प्राप्त हुआ। आयुर्वेद के आचार्यों ने गर्भ, प्रसव आदि विषयों पर भी बहुत विस्तार से लिखा। किंतु पुरुषों द्वारा रचित इन सभी ग्रंथों में नारी को पुरुष-दृष्टि से देखते हुए उसमें सहचरी एवं जननी का रूप ही देखा गया है। नारी की इच्छाएँ, अनिच्छाएँ, उसकी आर्तव संबंधी समस्याएँ तथा उनका उसके काम-जीवन से संबंध और ऐसे अनेक विषय पुरुष-दृष्टि से छिपे ही रहे। नारी कामसूत्र की रचना में एक भारतीय नारी ने न केवल इन सब विषयों का विस्तार से वर्णन किया है, बल्कि आधुनिक नारियों की समस्याओं तथा हमारे युग के बदलते पहलुओं के संदर्भ में भी नारी और नारीत्व को देखा है। इस पुस्तक में लेखिका ने त्रिगुण पर आधारित एक नए सिद्धांत का प्रतिपादन करते हुए नारी तत्त्व और पुरुष तत्त्व के आधार पर नर-नारी की मूल प्रकृति के अंतर को रेखांकित किया है और उनको एक-दूसरे का पूरक सिद्ध किया है, न कि प्रतिस्पर्द्धी। यह पुस्तक लेखिका के दस वर्षों के अनुसंधान और परिश्रम का परिणाम है। नर और नारी दोनों को नारी के भिन्न-भिन्न रूप समझने की प्रेरणा देना तथा काम को आत्मज्ञान की चरम सीमा तक ले जाना ही इस पुस्तक का ध्येय है। लेखिका की पश्चिमी देशों में आयुर्विज्ञान की शिक्षा तथा आयुर्वेद और योग का लंबे समय तक अध्ययन, अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अनुसंधान और अनुभव इस ग्रंथ को एक संपूर्ण कृति बनाते हैं। यह पुस्तक इससे पहले जर्मन (1994) में, फ्रैंच (1996) में, अंग्रेजी (1997) में तथा डच (1998) भाषाओं में प्रकाशित हो चुकी है।

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    Vinod Verma

    डॉ. विनोद वर्मा

    जन्म: ऐसे परिवार में हुआ जहाँ हर रोज़ के क्रियाकलाप में ‘योग’ और ‘आयुर्वेद’ की बड़ी महत्त्वपूर्ण भूमिका रही।

    शिक्षा: पिता और दादी माँ से आयुर्वेद और योग की प्रारम्भिक शिक्षा ग्रहण की। पंजाब विश्वविद्यालय से प्रजनन जीव-विज्ञान में और पेरिस विश्वविद्यालय से तन्त्रिका जीव-विज्ञान में पी-एच.डी.। नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ हेल्थ, अमेरिका में और फिर मैक्स प्लंक इंस्टिट्यूट, जर्मनी में शोध-कार्य किया।

    शोध के दौरान डॉ. वर्मा ने अनुभव किया कि निरोग अवधान सम्बन्धी नई अवधारणा विखंडित है, इसके बावजूद हम स्वास्थ्य-सम्पोषण को त्यागकर सिर्फष् रोगों के इलाज पर ही अपने समस्त साधन और प्रयास लगाए जा रहे हैं। उन्होंने प्राचीन परम्परा की ओर लौटने का निश्चय किया। अपने उद्देश्य की पूर्ति के लिए उन्होंने सन् 1987 में द न्यू वे हेल्थ ऑर्गेनाइजेश्शन (NOW) की स्थापना की। इसका एक केन्द्र दिल्ली के निकट नोएडा में और दूसरा केन्द्र हिमालय की गोद में है, जहाँ विद्यार्थियों को प्राचीन भारतीय परम्परा पर आधारित आयुर्वेद की शिक्षा दी जाती है।

    डॉ. वर्मा पिछले कई वर्षों से बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के आचार्य प्रियव्रत शर्मा के साथ प्राचीन गुरु-शिष्य परम्परा के अनुसार आयुर्वेदिक ग्रन्थों का अध्ययन कर रही हैं। हर वर्ष कुछ महीने वे विदेश में बिताती हैं, जहाँ आयुर्वेद और योग द्वारा स्वास्थ्य तथा दीर्घायु जैसे विषयों पर उनके भाषण तथा कार्य-शिविर अत्यन्त लोकप्रिय हैं।

    प्रकाशन: पातंजलि’ज़ योगा एण्ड प्रैक्टिस इन आयुर्वेदा, योगा फ़ॉर इंटिग्रल हेल्थ, योगा सूत्राज़ ऑफ़ पातंजलि: ए साइंटिफ़िक एक्सपोज़िशन, सिक्सटीन मिनट्स टु ए बेटर नाईन टु फ़ाइव (अंग्रेज़ी में) तथा दैनिक जीवन में आयुर्वेद, नारी कामसूत्र और आयुर्वेद और योग।

    अधिकांश पुस्तकों का जर्मनी, इतावली, स्पॉनी तथा डच में अनुवाद।

    समय-समय पर आयुर्वेद-केन्द्रित व्याख्यानों का संसार-भर में रेडियो और टेलीविजन पर प्रसारण।

    सम्प्रति: द न्यू वे हेल्थ ऑर्गेनाइज़ेशन (NOW) का संचालन तथा अध्ययन-लेखन।

    सम्पर्क: ए-130, सेक्टर-26, नोएडा-201 301 (उ.प्र.)

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