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1084ven Ki Maan

1084ven Ki Maan

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  • Pages: 142p
  • Year: 2014
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Radhakrishna Prakashan
  • ISBN 13: 9788171193516
  •  
    १०८४वे की माँ – महाश्वेता देवी आजादी से समानता, न्याय और समृद्धि के सपने जुड़े थे ! लेकिन सातवें दशक में मोहभंग हुआ और सकी तीव्रतम अभिव्यक्ति नक्सलवादी आन्दोलन में हुई ! इस आन्दोलन ने मध्य वर्ग को झकझोर डाला ! अभिजात कुल में उत्पन्न व्रती जैसे मेधावी नौजवानों ने इसमें आहुति दी और मुर्दाघर में पड़ी लाश नंबर १०८४ बन गया ! उसकी माँ व्रती के जीवित रहते नहीं समझ पाई लेकिन जब समझ आया तब व्रती दुनिया में नहीं था ! १०८४वे की माँ महज एक विशिष्ठ कालखंड का दस्तावेज नहीं, विद्रोह की सनातन कथा भी है ! यह करुणा ही नहीं, क्रोध का भी जनक है और व्रती जैसे लाखों नौजवानों की प्रेरणा का स्रोत भी ! लीक से हटकर लेखन, वंचितों-शोषितों के लिए समाज में सम्मानजनक स्थान के लिए प्रतिबद्ध महाश्वेता देवी की यह सर्वाधिक प्रसिद्धि कृति है ! इस उपन्यास को कई भाषाओ में सराहना मिली और अब इस विहाल्कारी उपन्यास पर गोविंद निहलानी की फिल्म भी बन चुकी है !

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    Mahashweta Devi

    जन्म : 1926, ढाका। पिता श्री मनीष घटक सुप्रसिद्ध लेखक थे।

    शिक्षा : प्रारम्भिक पढ़ाई शान्तिनिकेतन में, फिर कलकत्ता विश्वविद्यालय से अंग्रेजी साहित्य में एम.ए.।

    अर्से तक अंग्रेजी का अध्यापन।

    कृतियाँ अनेक भाषाओं में अनूदित।

    हिन्दी में अनूदित कृतियाँ : जंगल के दावेदार, घहराती घटाएँ, नीलछवि, टेरोडैक्टिल, 1084वें की माँ, ईंट के ऊपर ईंट, भटकाव, दौलति, शालगिरह की पुकार पर, श्री श्रीगणेश महिमा, अक्लान्त कौरव, अग्निगर्भ, चोट्टि मुण्डा और उसका तीर, मूर्ति, ग्राम बांग्ला, भारत में बँधुआ मजदूर, झाँसी की रानी, बनिया-बहू, कृष्णद्वादशी, भूख, अमृत संचय, जली थी अग्निशिखा, उन्तीसवीं धारा का आरोपी, आंधारमाणिक, कवि वन्द्यघटी गाईं का जीवन और मृत्यु, नटी, सच झूठ, पचास कहानियाँ (दो खंड में) आदि।

    सम्मान : 'जंगल के दावेदार’ पुस्तक पर साहित्य अकादेमी पुरस्कार। मैगासैसे एवार्ड तथा भारतीय ज्ञानपीठ द्वारा सम्मानित।

    • Sarthak An Imprint of Rajkamal Prakshan
    • Chahak An Imprint of Rajkamal Prakshan
    • Funda An Imprint of Radhakrishna
    • Korak An Imprint of Radhakrishna
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