• (011) 23274463
  • Help
INR
 
Shopping Cart (0 item)
My Cart

You have no items in your shopping cart.

You're currently on:

Keral Ke Hindi Sahitya Ka Itihas

Keral Ke Hindi Sahitya Ka Itihas

Availability: In stock

-
+

Regular Price: Rs. 850

Special Price Rs. 765

10%

  • Pages: 332
  • Year: 2016, 1st Ed.
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Lokbharti Prakashan
  • ISBN 13: 9789352211005
  •  
    केरल का प्रथम हिंदी रचनाकार महाराजा स्वातितिरुनाल रामवर्मा को माना जाता है जिनका जन्म तिरुवितांकूर के राजा मार्तंड वर्मा के राजवंश में 1813 ईसवी में हुआ था ! उनकी रचनाएँ मध्यकालीन हिंदी कवियों की तरह भक्ति-प्रधान गीत थे जिनका संकलन बाद में आकर किया गया ! इसके बाद लगातार इस अहिन्दीभाषी राज्य में हिंदी में मौलिक लेखन करनेवाले रचनाकार सक्रीय रहे हैं, न सिर्फ कविता में, बल्कि कहानी, उपन्यास, निबंध व् अन्यान्य विधाओं में भी ! केरल की रचनाकार और विद्वान पी. लता ने अपनी इस पुस्तक में केरल की समूची हिंदी रचनात्मकता का सर्वांगीण इतिहास प्रस्तुत किया है, साथ ही वे उस विचार-यात्रा को भी रेखांकित करती चली हैं जो केरलीय हिंदी लेखकों, कवियों की रचनाओं के सरोकारों की प्रेरणा-शक्ति और पृष्ठभूमि रही ! मौलिक साहित्य के साथ लेखक ने इसमें अनूदित साहित्य का भी क्रमबद्ध विवरण दिया है और साथ ही व्याकरण तथा कोष आदि विषयों पर हुए लेखन को भी समाहित किया है ! प्रकाशित पुस्तकों के अलावा उन्होंने पत्र-पत्रिकाओं में छपी रचनाओं और साहित्य की भूमिका लेखन तथा सम्पादकीय लेखन जैसी शाखाओं को भी अपने विश्लेषण का आधार बनाया है और केरलीय हिंदी साहित्य के इतिहास में उनकी अवस्थिति को दर्ज किया है ! डॉ. पी. लता के प्रशंसनीय उद्यम से संभव हुई यह पुस्तक न सिर्फ छात्रों के लिए वरन उन हिंदी प्रेमियों के लिए भी अनिवार्यतः पठनीय है जो हिंदी चेतना के अखिल भारतीय विस्तार की संरचना तथा व्याप्ति को जानना चाहते हैं !

    Customer Reviews

    There are no customer reviews yet.

    Write Your Own Review

    Dr. P. Lata

    डॉ. प. लता

    शिक्षा : एम्.ए. (हिंदी), एम्.ए. (मलयालम), एम्.फिल (हिंदी), पी-एच.डी. (हिंदी) !

    पूर्व प्रोफेसर और अध्यक्षा, हिंदी विभाग, सरकारी महिला महाविद्यालय, तिरुवनंतपुरम !

    रचना-संसार : विविध हिंदी पत्रिकाओं में शोध लेख, कहानियां (मौलिक और अनुदित), कविताएँ (मौलिक और अनुदित) प्रकाशित !

    केरल के प्रथम हिंदी पत्रकार जी. नील्कथान नायर की अप्रकाशित आत्मकथा 'यान जी. एन.' (मलयालम) का हिंदी अनुवाद 'मैं जी.एन.' नाम से 'सग्रथान' पत्रिका में धारावाहिक प्रकाशित !

    प्रकाशित पुस्तकें : प्रयोजनमूलक हिंदी, हिंदी भाषा के विविध रूप, केरल की हिंदी पत्रकारिता का इतिहास, व्यावहारिक अनुवाद (सहलेखन), नव संकलन (सहलेखन), अभिनव संकलन (सहलेखन), हिंदी-मलयालम तुलनात्मक अध्ययन (सहलेखन) !

    पुरस्कार व् सम्मान : 'केरल हिंदी साहित्य अकादमी पुरस्कार', 'डॉ. महाराज कृष्ण जैन स्मृति सम्मान', 'समग्र हिंदी सेवा पुरस्कार', 'राष्ट्रीय हिंदी साहित्य सम्मलेन', तिरुवनंतपुरम का पुरस्कार, 'आन्ध्र प्रदेश पत्रकार संघ', हैदराबाद का पुरस्कार, 'केरल हिंदी प्रचार सभा', तिरुवनंतपुरम की ओर से सम्मान आदि !

    • Sarthak An Imprint of Rajkamal Prakshan
    • Chahak An Imprint of Rajkamal Prakshan
    • Funda An Imprint of Radhakrishna
    • Korak An Imprint of Radhakrishna

    Location

    Address:1-B, Netaji Subhash Marg,
    Daryaganj, New Delhi-02

    Mail to: info@rajkamalprakashan.com

    Phone: +91 11 2327 4463/2328 8769

    Fax: +91 11 2327 8144