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Gandhiwad Ki Shav Pariksha

Gandhiwad Ki Shav Pariksha

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  • Pages: 129
  • Year: 2014, 1st Ed.
  • Binding:  Paperback
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Lokbharti Prakashan
  • ISBN 13: 9788180319501
  •  
    गाँधी जी ने इस देश के सार्वजानिक जीवन में राजनैतिक नेता के रूप में प्रवेश किया था ! गाँधी जी ने देश की राजनैतिक मुक्ति के लिए जनता के सामने जो राजनैतिक कार्यक्रम रखा था, उसे गांधीदर्शन और गधिवाद का नाम दिया गया था ! गाँधीवादी नीति पर चलने का दावा करनेवाली शासन व्यवस्था देश के सर्व-साधारण के जीवन से कठिनाई को दूर करने के लिए क्या कर सकी है, यह देश की जनता अपने अनुभव से जानती है ! सर्वोदय को ध्येय माननेवाले दरिद्रनारायण के पुजारी गांधीवाद की इस विफलता का कारन समझने के लिए उसके सिद्दांतो की परख आवश्यक है ! जनता के लिए यह समझना आवश्यक है कि उनकी भोतिक समस्याओं और कठिनायों का उपाय, गांधीवाद अध्यात्म द्वारा संभव है या आर्थिक और राजनैतिक प्रयत्नों द्वारा ? इस विचार के प्रयोजनों से 'गांधीवाद की शव परीक्षा' का यह संस्करण प्रस्तुत है !

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    Yashpal

    जन्म : 3 दिसम्बर, 1903, फिरोजपुर छावनी, पंजाब।

    शिक्षा : प्रारम्भिक शिक्षा गुरुकुल काँगड़ी, डी.ए.वी. स्कूल, लाहौर और फिर मनोहर लाल हाई स्कूल में हुई। सन् 1921 में वहीं से प्रथम श्रेणी में मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण की।

    प्रारम्भिक जीवन रोमांचक कथाओं के नायकों-सा रहा। भगत सिंह, सुखदेव, बोहरा और आज़ाद के साथ क्रान्तिकारी कार्यों में खुलकर भाग लिया। सन् 1931 में 'हिन्दुस्तान समाजवादी प्रजातंत्र सेना’ के सेनापति चन्द्रशेखर आज़ाद के मारे जाने पर सेनापति नियुक्त। 1932 में पुलिस के साथ एक मुठभेड़ में गिरफ्तार। 1938 में जेल से छूटे। तब से जीवनपर्यन्त लेखन-कार्य में संलग्न रहे।

    प्रमुख प्रकाशित कृतियाँ : झूठा सच : वतन और देश, झूठा सच : देश का भविष्य, तेरी मेरी उसकी बात, देशद्रोही, दादा कामरेड, मनुष्य के रूप,  दिव्या, अमिता, बारह घंटे, अप्सरा का शाप (उपन्यास); लैम्प शेड, धर्मयुद्ध, ओ भैरवी, उत्तराधिकारी, चित्र का शीर्षक, अभिशप्त, वो दुनिया, ज्ञानदान, पिंजरे की उड़ान, तर्क का तूफान, भस्मावृत चिंगारी, फूलो का कुर्ता, तुमने क्यों कहा था मैं सुन्दर हूँ, उत्तमी की माँ, खच्चर और आदमी, भूख के तीन दिन (कहानी संग्रह); यशपाल का यात्रा साहित्य और कथा नाटक, लोहे की दीवार के दोनों ओर, राहबीती, स्वर्गोद्यान : बिना साँप (यात्रा-वृत्तान्त); मेरी जेल डायरी (डायरी); यशपाल के निबन्ध (दो खंड), राम-राज्य की कथा, गांधीवाद की शव-परीक्षा, मार्क्सवाद; देखा, सोचा, समझा; चक्कर क्लब, बात-बात में बात, न्याय का संघर्ष, बीबी जी कहती हैं मेरा चेहरा रौबीला है, जग का मुजरा, मैं और मेरा परिवेश, यशपाल का विप्लव  (राजनीति/निबन्ध/व्यंग्य); सिंहावलोकन (सम्पूर्ण 1-4), नाटक, नशे-नशे की बात (संस्मरण); यशपाल रचनावली।

    पुरस्कार : देव पुरस्कार, सोवियत लैंड नेहरू पुरस्कार, मंगला प्रसाद पारितोषिक, पद्म भूषण, साहित्य अकादमी पुरस्कार।

    • Sarthak An Imprint of Rajkamal Prakshan
    • Chahak An Imprint of Rajkamal Prakshan
    • Funda An Imprint of Radhakrishna
    • Korak An Imprint of Radhakrishna

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