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Mahatirth Ke Antim Yatri

Mahatirth Ke Antim Yatri

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  • Pages: 363p
  • Year: 2010, 3rd Ed.
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Lokbharti Prakashan
  • ISBN 13: 9788180315114
  •  
    सन 1956 में तिब्बत का दरवाजा विदेशियों के लिए लगभग बंद हो चूका था और राजनैतिक कारणों से भारत के साथ तिब्बत का संपर्क भी लगभग टूट चूका था ! उन्ही दिनों, बिना किसी तैयारी के, बिमल दे घर से भगा और नेपाली तीर्थयात्रियों के एक दल में सम्मिलित हो ल्हासा तक जा पहुंचा ! उस समय उनकी उम्र मात्र पंद्रह वर्ष थी ! यात्रियों में वह नवीन मौनी बाबा ! ल्हासा में उसने तीर्थयात्रियों का दल छोड़ा, और वहां से अकेले ही कैलास खंड की ओर कुंच कर गया ! 'महातीर्थ के अन्तिम यात्री' में उसी रोमांचक यात्रानुभाव का वर्णन है ! बिमल दे ने स्वयं इसे एक भिखमंगे की डायरी कहा है ! कितु इस पुस्तक में मिलगा तिब्बत का दैनन्दिन जीवन तथा महातीर्थ का पूर्ण विवरण !

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    Bimal De

    बिमल दे

    जन्म सन 1940, कोल्कता में ! बचपन से बंधनमुक्त होकर घर से भागकर बहुत बार हिमालय का चक्कर लगाया ! 1956 में जब तिब्बत का दरवाजा विदेशियों के लिये लगभग बंद हो चूका था, एक नेपाली तीर्थयात्री दल में शरीक होकर तमाम अडचनों से जूझता हुआ बिमल ल्हासा से कैलास तक की यात्रा कर आया !

    बिमल 1967 में साइकिल पर विश्व-भ्रमण के लिए निकला ! एक पुराणी साइकिल, जेब में कुल अठारह रूपये, मन में अदम्य उत्साह और साहस, यही उसकी पूँजी थी ! रस्ते में छिटपुट काम कर रोटी का जुगाड़ करगा, फिर आगे बढ़ता ! इस तरह पांच साल तक दुनिया की सैर करने के बाद वह 1972 में भारत लौटा ! इन यात्राओं का विवरण ‘दूर का प्यासा’ नामक ग्रन्थ में उसने 7 खंडो में लिखा ! बिमल सन 1972 से 1980 तक मुख्यतः पर्वतारोही पर्यटक के रूप में विश्व के पर्वतीय स्थलों की यात्रा करता रहा ! 1981 से 1998 के बीच उसने तीन बार उत्तरी ध्रुव और दो बार दक्षिणी ध्रुव की यात्रा की ! उसके अन्य ग्रन्थ हैं महातीर्थ के अंतिम यात्री व् सूर्य प्रणाम !

    फ्रांस की संस्थाओं ने तथा वाशिंगटन के नेशनल गेओग्रफिक सोसाइटी ने बिमल को कई बार सम्मानित किया है ! बिमल अमेरिकी पोलर सोसाइटी का आजीवन सदस्य है तथा ब्रितानवी पोलर सोसाइटी का परामर्शदाता भी ! अपने ढंग का अनूठा पर्यटक और दार्शनिक होने के साथ ही बिमल एक मानव प्रेमी है और वह निरंतर जनहितकार कार्यों में जुटा रहता है !

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