• (011) 23274463
  • Help
INR
 
Shopping Cart (0 item)
My Cart

You have no items in your shopping cart.

Lahor Se Lucknow Tak

Lahor Se Lucknow Tak

Availability: In stock

-
+

Regular Price: Rs. 225

Special Price Rs. 203

10%

  • Pages: 205p
  • Year: 2009
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Lokbharti Prakashan
  • ISBN 13: LSLT180
  •  
    "लखनऊ से लाहौर तक" में श्रीमती प्रकाशवती पाल ने ऐसी अनेक ऐतिहासिक घटनाओं और व्यक्तियों के संस्मरण प्रस्तुत किये है जिनसे उनका प्रत्यक्ष और सीधा संपर्क रहा है ! संस्करण क्रम-बद्ध रूप में 1929 से शुरू होते हैं ! उस वर्ष सरदार भगत सिंह ने देहली एसेम्बली में बम फैंका था ! लाहौर कांग्रेस में आजादी का प्रस्ताव भी उसी वर्ष पास हुआ था ! क्रांतिकारी आन्दोलन में प्रकाशवती ही किशोरावस्था ही में शामिल हो गयीं थीं ! अनेक संघर्षों और खतरनाक स्थितियों के बीच में चंद्रशेखर आजाद, भगवतीचरण, यशपाल आदि क्रांतिकारियों के निकट संपर्क में आयीं ! एक अभूतपूर्व घटना के रूप में 1936 में उनका विवाह बंदी यशपाल से जेल के भीतर समपन्न हुआ ! इन और ऐसी अनेक स्मृतियों को समेटते हुए ये संस्मरण आजादी की लड़ाई और बाद के अनेक अनुभवों को ताजा करते हैं, साथ ही अनेक राजनीतिज्ञों, क्रांतिकारियों और प्रसिद्ध साहित्यकारों के जीवन पर सर्वथा नया प्रकाश डालते हैं ! यह पुस्तक पिछले पैसठ वर्ष के दौरान राजनीति और साहित्य के कई अल्पविदित पक्षों का आधिकारिक, अत्यंत महत्त्पूर्ण और पठनीय दस्तावेज हैं !

    Customer Reviews

    There are no customer reviews yet.

    Write Your Own Review

    Prakashwati Paal

    प्रकाशवती पाल

    श्रीमती प्रकाशवती पाल-प्रसिद्ध क्रन्तिकारी और लेखक यशपाल की क्रांतिकारी पत्नी - जन्म 31 जनवरी, 1914 लाहौर के खत्री परिवार से !

    श्रीमती प्रकाशवती पाल की गणना उन क्रांतिकारियों में है जिन्होंने देश को स्वाधीन कराने में अपने जीवन के हर क्षण को अर्पण किया ! जिनका क्रांतिकारी गतिविधियों से परिचय विद्यार्थी जीवन से ही हो गया था !

    लाहौर में विदेशी कपड़ों की होली में अपने गोटे किनारी लगे कपडे जला दिये और लाहौर कांग्रेस में वालंटियर बनकर आजादी की लड़ाई में भाग लिया !

    फिर व्यग्र हो उठी तो परिवार को छोड़ ब्रिटिश सरकार को चोट देने के लिए क्रांतिकारी दल में सम्मिलित हो गयीं ! लगातार आर्थिक सहायता भी दी ! यशपाल और चंद्रशेखर आजाद से सफल निशाना लगाने की शिक्षा पायी !

    देहली कांसपरेसी केस में वह मुख्य अभियुक्त थीं ! ब्रिटिश सरकार का इनाम उनके सिर पर था ! सन 1934 में प्रकाशवती दरियागंज, दिल्ली में गिरफ्तार हो गयीं !

    सन 1936 में बरेली जेल में यशपाल से एक रुपया चार आना में विवाह कर, पढाई में व्यस्त हो दांतों की सर्जन बन गयीं !

    मार्च 1936 में यशपाल के रिहा होने पर 'विप्लव' पत्रिका के प्रकाशन में सहयोग दे सफल बनाया ! यशपाल को आर्थिक चिंताओं से मुक्त कर प्रकाशन का काम संभाल लिया ! जीवन भर यशपाल के साथ सुखी दांपत्य जीवन जी कर साहित्य सृजन में सहयोग दिया !

    • Sarthak An Imprint of Rajkamal Prakshan
    • Chahak An Imprint of Rajkamal Prakshan
    • Funda An Imprint of Radhakrishna
    • Korak An Imprint of Radhakrishna

    Location

    Address:1-B, Netaji Subhash Marg,
    Daryaganj, New Delhi-02

    Mail to: info@rajkamalprakashan.com

    Phone: +91 11 2327 4463/2328 8769

    Fax: +91 11 2327 8144