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Hindi Pathanusandhan

Hindi Pathanusandhan

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  • Pages: 208p
  • Year: 2011
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Lokbharti Prakashan
  • ISBN 13: 9788180315879
  •  
    'हिंदी पाथानुसंधान' का यह दूसरा संस्करण है ! ऐसे शुष्क विषय की पुस्तक का दूसरा संस्करण होना इस बात का प्रमाण है कि यह पुस्तक पाठानुसंधान के क्षेत्र के विद्यार्थियों द्वारा पसंद की गयी ! कई विश्वविद्यालयों में एम्. ए. के विशेष प्रश्न-पत्र में पाठालोचन पढाया जाता है तथा हिंदी एम्.फिल में इसका एक अनिवार्य प्रश्न-पत्र है ! इस शोध-ग्रन्थ में हिंदी संपादन का इतिहास मुद्रण के पूर्व से आधुनिक काल तक दिया गया है ! पांडुलिपियों के लेखक भी अपने ढंग से कई प्रतियों का मिलान और पाठांतर देते थे ! मुद्रण प्रारंभ होने पर पहले तो पाण्डुलिपि को जैसा का तैसा छाप देना प्रारंभ हुआ और बाद में विद्वानों ने उपलब्ध सभी प्रतियों में से सबसे उपयुक्त लगने वाला पाठ देते थे ! ग्रियर्सन के समय से यह कार्य परिश्रमपूर्वक संपादन में देखा गया और बहुत सी कृतियाँ सुन्दर पाठ की सामने आई ! 1942 से डॉ. माता प्रसाद गुप्त ने पश्चिमी देशों की वैज्ञानिक पद्दति से पाठ-संपादन का कार्य शुरू किया और अनेक विद्वानों ने इसे अपनाया भी ! इन सभी महत्वपूर्ण संपादनों का आलोचनात्मक अध्ययन इस पुस्तक में किया गया है ! आचार्य विश्नाथ प्रसाद मिश्र ने इसके सम्बन्ध में लेखक को पत्र लिखा था कि इस दिशा में हिंदी में बहुत कम काम हुआ है, आपने एक अभाव की पूर्ति की है !

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    Kanhaiya Singh

    कन्हैया सिंह

    जन्म: 1 अगस्त 1935 ई.

    जन्म स्थान : ग्राम-धरवारा, आजमगढ़ (उ.प्र.)

    संपर्क : राहुल नगर, आजमगढ़ (उ.प्र) 276001

    उपाधियाँ : एम्.ए. (हिंदी), एल-एल.बी., पी-एच.डी., डी. लिट् साहित्य महोपाध्याय, भोजपुरी शिरोमणि, साहित्य भूषण, सुभ्रमंयम भारती, प. दीनदयाल साहित्य सम्मान आदि से सम्मानित !

    कार्यक्षेत्र : दयानंद स्नातकोत्तर-महाविधायल, आजमगढ़ में विभागाध्यक्ष, तिलकधारी महाविद्यालय जौनपुर में विधि-प्रवक्ता, कन्हैयालाल मानिकलाल मुंशी हिंदी तथा भाषा विज्ञान विद्यापीठ, आगरा विश्विद्यालय, आगरा में प्रवक्ता तथा महाविद्यालय भटवली बाज़ार, गोरखपुर में प्राचार्य ! अब अवकाश प्राप्त !

    प्रकाशन : सूफी काव्य : सांस्कृतिक अनुशीलन, मालिक मुहम्मद जायसी, सूफीमत, मध्यकालीन अवधी का विकास, साहित्य और संस्किति, पाठ-संपादन के सिद्दांत, हिंदी पथानुसंधान, राहुल सांस्कृत्यायन, अँधेरे के अध्याय, दक्षिणाचल-दर्शन, रामचरित उपाध्याय-ग्रंथावली (सम्पादित) तथा अन्य चालीस पुस्तके और शताधिक् शोध निबंध ! जयसिकृत ‘पदुमावाति : मूलपाठ और टीका’ !

     

    • Sarthak An Imprint of Rajkamal Prakshan
    • Chahak An Imprint of Rajkamal Prakshan
    • Funda An Imprint of Radhakrishna
    • Korak An Imprint of Radhakrishna

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