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Zillat Ki Roti

Zillat Ki Roti

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  • Pages: 135p
  • Year: 2006
  • Binding:  Paperback
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 8126712007
  •  
    मनमोहन 1969 से कविता लिख रहे हैं और उनके मित्रों की एक ख़ासी तादाद कम से कम पिछले तीस साल से उनके किसी कविता संग्रह का इंतिज़ार कर रही है। ‘ज़िल्लत की रोटी’ नाम का यह संग्रह मनमोहन की 1985 के बाद की कविताओं का संक्षिप्त चयन है। इससे पहले की कविताएँ एक अलग संकलन की माँग करती हैं और बाद की कविताओं से भी एक किताब और बनती है। मनमोहन बेशक उन कवियों में हैं जो ‘साहिबे-दीवान’ बनने से पहले ही अपनी पीढ़ी की प्रतिनिधि आवाज़ बन जाते हैं। मनमोहन की कविता में वैचारिक और नैतिक आख्यान का एक अटूट सिलसिला है। उनके यहाँ वर्तमान जीवन या दैनिक अनुभव के किसी पहलू, किसी मामूली पीड़ा या नज़ारे के पीछे हमेशा हमारे समय की बड़ी कहानियों और बड़ी चिंताओं की झलक मिलती रही है। वह मुक्तिबोधियन लैंडस्केप के कवि हैं। उनकी भाषा और शिल्प को उनके कथ्य से अलग करना नामुमकिन है। यहाँ किसी तरह की कविताई का अतिरिक्त दबाव या एक वैयक्तिक मुहावरे के रियाज़ की ज़रूरत नहीं है, एक मुसलसल नैतिक उधेड़बुन है जो अपने वक़्त की राजनीतिक दास्तानों और आत्मीय अनुभवों के पेचदार रास्तों से गुज़रकर उनकी भाषा और शिल्प को एक विशिष्ट ‘टेक्स्चर’ और धीमा लेकिन आश्वस्त स्वर और एक वांछनीय ख़ामोशी प्रदान करती है। मनमोहन अपनी पीढ़ी के सबसे ज़्यादा चिंतामग्न, विचारशील और नैतिक रूप से अत्यंत शिक्षित और सावधान कवि हैं। एक मुक्तिबोधीय पीड़ा और महान अपराधबोध उनके काव्य संस्कार में हैं, इन्हें एक रचनात्मक दौलत में बदलने की प्रतिभा और तौफ़ीक़ उनके पास है और इनका इस्तेमाल उन्होंने बड़ी विनम्रता, वस्तुनिष्ठता और सतर्कता से किया है। मनमोहन की कविता में एक ‘गोपनीय आँसू’ और एक ‘कठिन निष्कर्ष’ है। इन दो चीज़ों को समझना आज अपने समय में कविता और समाज के, राजनीति और विचार के और, अन्ततः रचना और आलोचना के रिश्ते को समझना है। - असद जै़दी

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    Manmohan

    जन्म: अक्तूबर, 1953, मथुरा (उत्तर प्रदेश)।

    शिक्षा: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, दिल्ली से हिन्दी में एम.ए. और हिन्दी आलोचना के परम्परा-विमर्श के बारे में शोध कार्य।

    पिछले सत्ताईस वर्ष से महर्षि दयानन्द विश्वविद्यालय, रोहतक के हिन्दी विभाग में अध्यापन।

    लेखन और अध्यापन के अलावा सामाजिक-सांस्कृतिक पुनर्रचना के कामों में दिलचस्पी और सक्रिय हिस्सेदारी।

    अनेक पत्र-पत्रिकाओं में कविताएँ, लेख और टिप्पणियाँ प्रकाशित।

    कविता के लिए वर्ष 2005 का शमशेर सम्मान।

    सम्पर्क: 4/9-जे, विश्वविद्यालय परिसर, महर्षि दयानन्द विश्वविद्यालय, रोहतक (हरियाणा)।

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