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Yugpath

Yugpath

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  • Pages: 106p
  • Year: 1998
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 10: YUGPATH368
  •  
    युगपथ पन्तजी की कविताओं का ऐति- हासिक संग्रह इस अर्थ में हए कि यह उनकी प्रतिमा के युगान्तरकारी मोड़ को रेखांकित करता है । कल्पना-पंखों पर व्योम में विचरना छोड्‌कर वह इसमें धरती पर आ उतरते हैं । इसलिए यहाँ 'पल्लव' जैसी 'कोमलकान्त कला' नहीं बल्कि 'एक नवीन क्षेत्र के अपनाने का प्रयास' है, युग-धर्म के अनुरूप चलने का भाव है । इसी में कवि पहले-पहल पुरातन के प्रति रोष जताते और नूतन का आहवान करते दिखायी पड़ते हैं । युगपथ की कविताएं दो खण्डों में विभक्त हैं : 'युगान्त' और 'युगान्तर' । प्रथम खण्ड की कविताओं में कवि ने जीवन से जुड़ी प्रकृति के गीत गाये हैं और अपनी धरती के प्रति असीम आसक्ति दिखायी है । दूसरा खण्ड महत्वपूर्ण सामयिक सन्दर्भों से सम्बद्ध है । बापू के प्रति कवि की भाव- भीनी श्रद्धांजलि तथा कवीन्द्र रवीन्द्र और अरविन्द के प्रति भावोद्‌गार इसी खण्ड में हैं ।

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    Sumitranandan Pant

    सुमित्रानंदन पंत

    जन्म: 20 मई, 1900 कौसानी (उत्तरांचल में) ।

    शिक्षा: प्रारम्भिक शिक्षा कौसानी के वर्नाक्यूलर स्कूल में। 1918 में कौसानी से काशी चले गए, वहीं से प्रवेशिका परीक्षा पास की।

    प्रकाशित पुस्तके :

    कविताा-संग्रह: वीणा, ग्रन्थि, पल्लव, गुंजन, ज्योत्स्ना, युगपथ, युगवाणी, ग्राम्या, स्वर्णकिरण, स्वर्णधूली, मधुज्वाल, उत्तरा, रजत-शिखर, शिल्पी, सौवर्ण, युगपुरुष, छाया, अतिमा, किरण-वीणा, वाणी, कला और बूढ़ा चाँद, पौ फटने से पहले, चिदंबरा, पतझर (एक भाव क्रान्ति), गीतहंस, लोकायतन, शंखध्वनि,शशि की तरी, समाधिता, आस्था, सत्यकाम, गीत-अगीत,संक्रांति, स्वच्छंद !

    कथा-साहित्य : हार, पांच कहानियां !

    आलोचना एवं अन्य गद्य-साहित्य : छायावाद : पुनर्मूल्यांकन, शिल्प और दर्शन, कला और संस्कृति, साठ वर्ष : एक रेखांकन !

    पुरस्कार : 1960 में कला और बूढा चाँद पर साहित्य अकादेमी पुरस्कार, 1961 में पद्मभूषण की उपाधि, 1965 में लोकायतन पर सोवियत लैंड नेहरु पुरस्कार, 1969 में चिदंबरा पर भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार !

    28 दिसम्बर 1977 को देहावसान !

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