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Vivad, Virodh Aur Vikas Ki Narmada

Vivad, Virodh Aur Vikas Ki Narmada

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  • Pages: 240
  • Year: 2012, 2nd Ed.
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126720972
  •  
    देश की पांचवी सबसे बड़ी नदी नर्मदा, अपने अंचल में बसी आबादी के लिए साक्षात् जीवनदायिनी है ! इसके विशाल कछार क्षेत्र में फैले वन, वनों में विचरते वन्य प्राणियों और पक्षियों के विविध रूप नर्मदा घाटी को प्रकृति का अनुपम सौन्दर्य प्रदान करते हैं ! नर्मदा के जल को विकास के लिए दोहन करने के विचार को पंडित जवाहरलाल नेहरु के उस विकास मॉडल ने आधार प्रदान किया जिसमे नदियों पर बड़े बांधो का निर्माण करना प्राथमिकता में सम्मिलित था ! लेकिन नर्मदा जल के दोहन के विचार के साथ ही नर्मदा जल बंटवारे का विचार प्रारंभ हुआ जो कालांतर में नर्मदा जल विवाद बन गया ! विवादों के निराकरण के प्रयासों में जल विवाद न्यायाधिकरण का गठन हुआ और लम्बे समय तक केंद्र और सम्बंधित राज्यों के बीच नर्मदा जल विवाद निराकरण की गतिविधियाँ चलती रहीं ! न्यायाधिकरण ने चार राज्यों में जल का बंटवारा, नर्मदा पर परियोजनाओं का निर्माण, जल का उपयोग, जल विद्युत् उत्पादन और अन्य सम्बंधित विषयों के साथ ही अनेक अंतर्राज्यीय दायित्वों का भी निर्धारण किया ! इस सबके बावजूद राज्यों के बीच छोटे-मोटे विवाद और समस्याएँ उठती रहीं, सुलझती रहीं ! नर्मदा जल विवाद और परियोजनाओं के विरोध का लम्बा इतिहास है ! नर्मदा विवाद, विरोध और विकास के विविध आयामों को प्रस्तुत करने का अब तक कोई समग्र प्रयास नहीं हुआ है ! इसको देखते हुए यह आवश्यक प्रतीत हुआ कि नर्मदा और उससे सम्बंधित विवाद, विरोध और विकास के इतिहास और वर्तमान की सम्पूर्ण जानकारी सरल और समग्र रूप में एक जगह संकलित की जाए !

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    Adil Khan

    शिक्षा: एम.एस-सी. वनस्पति विज्ञान, एम.बी.ए. मीडिया प्रबन्धन।

    जन्म: पश्चिम मध्यप्रदेश में नर्मदा घाटी के छोटे से कस्बे कसरावद में 1951 में।

    आदिल ख़ान सम-सामयिक विषयों के सिद्धहस्त लेखक हैं। डेढ़ दशक से भी अधिक समय से मध्यप्रदेश शासन के नर्मदा घाटी विकास विभाग में सूचना और जनसम्पर्क के संयुक्त निदेशक के रूप में आदिल ख़ान ने नर्मदा घाटी की विभिन्न गतिविधियों को निकट से देखा-परखा है और अंचल की अनेक यात्राएँ की हैं। उनके अनुभवों, निष्कर्षों का लाभ कई बार नीति निर्धारण में लिया गया है।

    नर्मदा से सम्बन्धित विषयों पर आदिल ख़ान के अनेक विचारोत्तेजक लेख प्रमुख समाचार पत्रों में प्रकाशित होते रहे हैं। इनमें ‘नर्मदा राष्ट्रीय नदी घोषित हो’ शीर्षक लेख का व्यापक स्वागत हुआ है। नर्मदा पर केन्द्रित आदिल ख़ान के एक गीत को हाल ही में अनुराधा पौड़वाल और सुरेश वाडेकर ने स्वरबद्ध किया है।

    म.प्र. शासन ने इस गीत को नर्मदा घाटी विकास के प्रतिनिधि गीत के रूप में अंगीकार किया है।

    नर्मदा घाटी विकास के इतिहास और वर्तमान के सभी पक्षों को समग्र, निरपेक्ष, क्रमिक और सूचनात्मक शैली में प्रस्तुत कर लेखक ने इस विषय में लम्बे समय से अनुभव की जा रही कमी की पूर्ति की है।

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