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Varsha Ki Subaha

Varsha Ki Subaha

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  • Pages: 127p
  • Year: 2008
  • Binding:  Paperback
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126716661
  •  
    गहरे उद्वेगों, सूक्ष्म संवेदनों, और शब्दों के माधुर्य तथा संगीत से फटती हैं सीताकांत महापात्र की कविताएँ । दिन-प्रोत-दिन के कार्य-व्यापार. प्रकृति की अपार लीलाएँ, दिक्‌काल का अनंत विस्तार-हम इनमें एक गहरे मानवीय राग के साथ देख-सुन सकते हैं । इनमें वर्तमान में खड़े रहकर बहुत पीछे लौटना भी है तथा बहुत् आगे देखना भी । समुद्र, आकाश, धरती, सूरज-चद्रमा, दूब, पेड़-पौधे, फल- फूल. पशु-पक्षी, ऋतुचक्र-हमें जिस जीवन-बोध से इन कविताओं में जोड़ते हैं, वह अपूर्व है । इस जीवन-बोध पर अपनी छाया डालती जरूर है, पर वह इस जीवन-बोध को न तो परास्त कर पाती है, न ही भयभीत । और इस संग्रह की कविताओं में तो ''मृत्यु मानो लंबी छुट्टी पर'' भी है । सीताकांत महापात्र की कविताओं में '- आख्यानों के प्रसंग भी इस जीवन-बोध और गहरा करने के लिए ही हैं । इन कविताओं में मानवीय संबंधों का भी एक विशिष्ट आकलन है. जो जीवन-संग्राम के ऐन बीच, हमें गहरे मानवीय भरोसे, विश्वास और संबल की ही प्रतीति कराता है । कवि-संवेदना की व्याप्ति निकट से निकट और दूर से दूर की चीजों पर कुछ इस तरह से है कि हम एक 'यात्रा' पर होने का अनुभव करते हैं-ऐसी यात्रा, जो आदि-अंतहीन लगती है, पर जिसके कविता-पड़ाव ' 'शून्यता को (भी) शब्दों की सस्‍नेह श्रद्धांजलि' ' बन जाते हैं । और बन जाते हैं एक ऐसा उपक्रम जहाँ, ''हमारा काम है केवल जोड़ते चले जाना सांत्वना भरे सरल शब्द ' । हम सब जानते हैं कि सांत्वना भरे सरल शब्दों को जोड़ना आसान नहीं होता । उसके लिए चाहिए धीरज, साहस, गहरा प्रेम, आश्वस्ति और भाषा के प्रति एक अकुंठित तीखी तृष्णा । यह सब सीताकांत महापात्र की कविता में हैं, और इनकी मात्रा में लगातार बढ़ोतरी होती गई है । प्रमाण हैं इस संग्रह की कविताएँ जो उनके ओड़िया में कछ अरसा पहले प्रकाशित वर्षा सकाल संग्रह का हिंदी अनुवाद हैं । यही उनका नवीनतम संग्रह भी है? । ओड़िया से हिंदी में आयी यह उनकी दसवीं कविता पुस्तक है । इसका अनुवाद, सीताकांत महापात्र की कविता और ओड़िया साहित्य के जाने-पहचाने अनुवादक राजेंद्रप्रसाद मिश्र ने कवि के साथ मिल-बैठकर किया है । जाहिर है कि इससे इनकी प्रामाणिकता और बढ़ गयी है ।

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    Seetakant Mahapatra

    डॉ. सीताकान्त महापात्र

    जन्म : सन् 1937, ओडि़शा में। उत्कल, इलाहाबाद तथा कैम्ब्रिज विश्वविद्यालयों में शिक्षा।
    1975-77 में होमी भाभा $फैलोशिप पाकर सामाजिक नेतृत्व विज्ञान में डॉक्टरेट की उपाधि। 1961 से भारतीय प्रशासनिक सेवा से सम्बद्ध रहे। ओडि़शा सरकार तथा केन्द्र सरकार में विभिन्न पदों पर कार्यरत रहे तो यूनेस्को में भी काम किया।
    प्रकाशन : अब तक ओडिय़ा भाषा में सत्रह काव्य-संग्रह तथा आलोचनात्मक निबन्धों के छह संग्रह प्रकाशित। अधिकांश रचनाएँ अन्य भारतीय भाषाओं के अलावा अंग्रेजी, स्पेनिश, फ्रेंच, जर्मन, रूसी, स्वीडिश आदि विदेशी भाषाओं में अनूदित व प्रकाशित।
    राष्ट्रपति द्वारा पद्मभूषण एवं पद्मविभूषण से अलंकृत। 1993 के ज्ञानपीठ पुरस्कार के अलावा कबीर सम्मान, केन्द्री साहित्य अकादमी पुरस्कार, सारला पुरस्कार, कुमारन आशन पोयट्री पुरस्कार, ओडि़शा साहित्य अकादमी पुरस्कार, सोवियत लैंड नेहरू पुरस्कार, विषुव सम्मान सहित अनेक पुरस्कारों से सम्मानित।
    सम्पर्क : 21 सत्यनगर, भुवनेश्वर, ओडि़शा-751007

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