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Us Chiriya Ka Naam

Us Chiriya Ka Naam

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  • Pages: 249p
  • Year: 2019, 3rd Ed.
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126714131
  •  
    सुपरिचित कथाकार पंकज बिष्ट का यह उपन्यास एक रिटायर्ड पिता की बीमारी और फिर उनके अंतिम संस्कारों के लिए शहर से गाँव पहुँचे भाई-बहन की कथा है। लेकिन एक ओर यदि वे दोनों अपनी-अपनी धुरी पर घूमते हुए माता-पिता के ‘प्रेतों’ से उबरने के लिए छटपटाते दिखाई देते हैं तो दूसरी ओर अपने विगत से ही नहीं, वर्तमान और भविष्य से भी जा टकराते हैं। दूसरे शब्दों में कहें तो कुमाऊँ के एक छोटे-से गाँव और परिवार से शुरू होकर यह कथा एक समूचे समाज और उसकी मानसिकता को समझने के रचनात्मक प्रयत्न में बदल जाती है और साथ ही एक व्यक्ति की अस्वाभाविक जीवनेच्छा की विकृतियों को भी उजागर करती है। उपन्यास का केंद्र्रीय कथाक्षेत्र अपने इतिहास में अनेक विशिष्टताएँ छुपाए होने और उत्तर भारत के इतना निकट होने के बावजूद उसकी मुख्य सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धारा से पूरी तरह अलग रहा है। फलस्वरूप यहाँ के लोगों का रहन-सहन और सोच-विचार किस तरह और किस हद तक प्रभावित हुआ, इसे भी यहाँ पर्यटनवादी रोमांटिकता से मुक्त होकर संकेतित किया गया है। वस्तुत: पंकज बिष्ट की यह महत्त्वपूर्ण कथाकृति पारिवारिक संबंधों के ताने-बाने के बावजूद विभिन्न ऐतिहासिक तथ्यों, लोककथाओं और किंवदंतियों के माध्यम से आधुनिकता और परंपरा के जटिल टकराव को तो दर्शाती ही है, उससे उपजे जीवन-मृत्यु और स्वर्ग-नरक संबंधी बुनियादी सवालों पर भी विचार करती है।

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    Pankaj Bisht

    जन्म: 20 फरवरी, 1946

    भारत सरकार की सूचना सेवा के दौरान योजना अंग्रेजी में सहायक सम्पादक, आकाशवाणी के अंग्रेजी समाचार प्रभाग में समाचार सम्पादक व संवाददाता, फिल्म प्रभाग में पटकथा लेखक तथा आजकल का सम्पादन।

    1998 में स्वैच्छिक अवकाश।

    पहली कहानी 1967 में साप्ताहिक हिन्दुस्तान में छपी।

    कहानी संग्रह: पन्द्रह जमा पच्चीस, बच्चे गवाह नहीं हो सकते?, टुंड्रा प्रदेश तथा अन्य कहानियाँ, चर्चित कहानियाँ, शताब्दी से शेष आदि।

    उपन्यास: लेकिन दरवाज़ा, उस चिड़िया का नाम और पंखवाली नाव।

    बाल उपन्यास: गोलू और भोलू।

    लेख संग्रह: हिन्दी का पक्ष, कुछ सवाल कुछ जवाब।

    भारत की लगभग सभी मुख्य भाषाओं के अलावा अंग्रेजी तथा कुछ यूरोपीय भाषाओं में अनुवाद। साहित्य, संस्कृति व मीडिया के अलावा राजनीतिक विषयों पर लगातार लेखन।

    1999 से समयांतर का मासिक रूप में पुनर्प्रकाशन और सम्पादन।

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