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Upniveshvad Ka Samana

Upniveshvad Ka Samana

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  • Pages: 243p
  • Year: 2001
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 10: 8126701757
  •  
    उपनिवेशवाद का सामना लेखों का एक संकलन है जिसे प्रोफेसर इरफान हबीब ने संपादित किया है, जिसके लिए उन्होंने विशेष रूप से एक भूमिका भी लिखी है । यह संकलन 1७९८ में अंग्रेजी फौजों से लड़ते हुए टीपू सुलतान की शहादत की दूसरी शताब्दी पर सुलतान को दी गई एक श्रद्धांजलि है । हैदर अली और टीपू सुलतान के शासनकाल में मैसूर के इतिहास पर लिखे गए इन लेखों में वे लेख शामिल हें जो 1935 में सामान्यत: भारतीय इतिहास कांग्रेस के वार्षिक सत्रों में प्रस्तुत किए गए थे : कुछ लेख ऐसे भी हैं जो विभिन्न पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए हैं । ये लेख उन दो शासकों की स्मृति को सुरक्षित रखने की आवश्यकता पर जोर देते हैं जो उपनिवेशी शासन के घोर विरोधी थे । ये लेख हमें याद दिलाते हैं कि हमारे राष्ट्रवादी इतिहासकारों ने हमारे अतीत को जिस तरह से समझा था उसमें हैदर अली और टीपू सुलतान को सम्मान का स्थान प्राप्त है । इन सुलतानों के योगदान को महत्त्वहीन बताने वाली एक समकालीन प्रवृत्ति के विरोध में ये लेख विशेष रूप से प्रासंगिक दिखाई पड़ते

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    Irfan Habib

    इरफान हबीब

    यशस्वी इतिहासकार। उन्नत इतिहास अध्ययन केन्द्र, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय, अलीगढ़  में  प्रोफेसर  एमेरिटस  हैं।

    प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में प्रकाशित सैकड़ों लेखों के अलावा आप एग्रेरियन सिस्टम ऑफ मुगल इंडिया (1963), संशोधित संस्करण : 1999; एन एटलस ऑफ द मुगल इंपायर (1982); एस्सेज़ इन इंडियन हिस्ट्री; टुवड्र्स ए मार्किसस्ट परसेप्शन (1995) तथा मेडिवल इंडिया : द स्टडी ऑफ ए सिविलाइजेशन (2001) के लेखक हैं। आप कैम्ब्रिज इकॉनोमिक हिस्ट्री ऑफ इंडिया-खंड-ढ्ढ (1982), यूनेस्को की हिस्ट्री ऑॅफ ह्यूमेनिटी-खंड-ढ्ढङ्क व ङ्क तथा हिस्ट्री ऑफ सेंट्रल एशिया-खंड-ङ्क के सह-सम्पादक भी हैं।

    भारत का लोक इतिहास  ((People’s History of India)) शृंखला के प्रधान सम्पादक, जिसके तहत आपने पाँच पुस्तकों का लेखन व दो पुस्तकों में सहलेखन किया है।

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