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  • Pages: 252p
  • Year: 2018, 3rd Ed.
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126730254
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    यह शायद पहली बार हो रहा है कि हिंदी के कई पीढ़ियों के मूर्धन्य और महत्त्पूर्ण लेखकों में बच्चों के लिए कुछ लिखने का उत्साह जागा है ! उनमे हिंदी के कथाकार, कवी, नाटककार-कृष्णा सोबती, श्रीलाल शुक्ल, कमलेश्वर, रमेशचंद्र शाह, मृदुला गर्ग, गिरिराज किशोर, राजेश जोशी, उदय प्रकाश, सुधा अरोड़ा, दिविक रमेश, राजेश जैन तथा रंगकर्मी कमल वसिष्ठ शामिल हैं ! दिल्ली में पिछले पच्चीस वर्षों से सक्रीय बालरंग संस्था 'उमंग' के राजत्पर्व पर विशेष रूप से प्रकाशित इस संकलन में नाटक, कहानियां और एक पटकथा हैं : जैसे बच्चों की दुनिया रंगारंग और विविध होती है वैसे ही यह संकलन किसी एक विधा तक महदूद नहीं है ! इसमें उल्लास, उमंग, खेल के साथ-साथ समझ और आनंद का मेल है ! हमें उम्मीद है कि हिंदी में अपने ढंग का यह प्रकाशन बच्चों के लिए हमारे बड़े और महत्त्पूर्ण लेखकों द्वारा आगे भी लिखने की उत्साहजनक शुरुआत है ! बच्चे इन नाटकों को खेलकर, इन कहानियों का पाठ कर उन्हें अपने लिए जिवंत बनाएँगे ! वे खेल-खेल में इन इबारतों में मनचाहे परिवर्द्धन और संशोधन भी करते चलेंगे ! उनकी सृजनात्मकता को यह सामग्री उकसाए और सक्रीय करे इसी में इस प्रयत्न की सच्ची सार्थकता होगी !

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    Ashok Vajpeyi

    1970 में अपने निबंध-संग्रह 'फ़िलहाल' से हिंदी में आलोचना-प्रवेश करनेवाले कवि-आलोचक अशोक वाजपेयी लगभग एक अधसदी से कविता, साहित्य, संस्कृति, संगीत, रूपंकर कलाओं आदि पर हिंदी और अंग्रेजी में आलोचना लिखते रहे हैं ! उन्होंने आलोचना की भाषा को नई ताजगी और सूक्ष्मता देने के साथ-साथ उसे सामाजिक संवाद का हिस्सा बनाने में सार्थक भूमिका निभाई है !

    उनकी प्रकाशित आलोचना पुस्तकों में 'फ़िलहाल', 'कुछ पूर्वग्रह', 'कविता का गल्प', 'सीढियां शुरू हो गई हैं', 'कभी-कभार', 'यहाँ से वहां' , 'कुछ खोजते हुए', 'पुनर्भव', 'समय से बाहर' आदि शामिल हैं !

    अशोक वाजपेयी को साहित्य अकादेमी पुरस्कार (जो उन्हें 1994 में मिला उसे बढती असहिष्णुता के विरोध में 2015 में लौटा दिया), दयावती मोदी कविशेखर सम्मान, कबीर सम्मान, समन्वय भाषा सम्मान आदि से अलंकृत किया गया है ! फ्रेंच और पोलिश सरकारों ने उन्हें उच्च नागरिक सम्मान दिए हैं ! 2011 में उन्होंने उत्तर प्रदेश सर्कार का भारत भारती पुरस्कार विरोधस्वरुप स्वीकार नहीं किया था !

    वे 35 वर्ष भारतीय प्रशासनिक सेवा में रहे ! महात्मा गाँधी अन्तराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के सस्थापक-कुलपति, केन्द्रीय ललित कला अकादेमी के अध्यक्ष रहे हैं और इन दिनों रजा फाउंडेशन के प्रबंध-न्यासी हैं ! वे भारत भवन न्यास के संस्थापक न्यासी सचिव और अध्यक्ष भी रहे हैं ! हिंदी आलोचना की पत्रिका 'पूर्वग्रह' का उन्होंने लगभग 16 वर्षों तक संपादन किया !

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