• (011) 23274463
  • Help
INR
 
Shopping Cart (0 item)
My Cart

You have no items in your shopping cart.

You're currently on:

Tumhari Roshani Mein

Tumhari Roshani Mein

Availability: In stock

-
+

Regular Price: Rs. 200

Special Price Rs. 180

10%

  • Pages: 163p
  • Year: 1985
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788171784578
  •  
    ‘‘छटपटाहट में वह इधर से उधर भागती है कि शायद यहाँ...या कि वहाँ...उसे वह मिल जायेगा, यह...या कि वह...सुवर्णा को वह दे देगा जिसकी रोशनी में वह अपने भीतर का बहुमूल्य पा लेगी...उसकी आँखें भीगने को हो आई थीं। उसकी उदासी देखकर मन भारी हो आया। मैंने उसके हाथ पर अपना हाथ रखा, हल्के से दबाया। चहकती-फिरती लड़की, थोड़ा फ्लर्ट जैसा करती हुई, किसी से भी सम्बन्ध बनाती हुई शायद उस पर वही सब फबता था।...’’ ‘‘तार्किक-मनोवैज्ञानिक विश्लेषण उसके व्यवहार का, थोड़ा-बहुत उसका भी...काफी सही कर लेता हूँ मैं, फिर भी यह वह नहीं होती जो मेरे अन्तस् में उतरती है, भावनाओं की सीढ़ी-दर-सीढ़ी। उसके ये दो रूप अलग-अलग जा पड़ते हैं और तब मुझे लगता है मेरे इस तमाम तार्किक विश्लेषण में वह कहीं खो गई है, या इस सारे आलवाल के बीच कहीं है वह जो वह सचमुच है...’’ आधुनिकता और परम्परा के बीच झूलती भारतीय नारी का एक ऐसा चित्र शायद पहली बार हिन्दी उपन्यास में आया है। इतना संश्लिष्ट कि कहना मुश्किल कि सुवर्णा यह है - अपनी तरफ से साफ या सपाट करने की जरा भी कोशिश न करते हुए चरित्र को उसके उलझावों के साथ वैसे का वैसा रख देना कि वह साहित्य का कम जीवन का ज्यादा लगे। तुम्हारी रोशनी में सुवर्णा की तार्किकता से भावना की रेंग तक पहुँचने की यात्रा है, मुक्ति और बन्धन के बीच अपनी पहचान खोजती आधुनिक भारतीय नारी का संघर्ष है, मूल्यहीनता की संस्कृति के खोखलेपन को उजागर करते हुए उसे प्रेम तक वापस ले जाने का आग्रह है...या कि यह सब, और बहुत कुछ और भी, अपने-आपमें समेटे हुए एक प्रेम-कहानी है...जीवन में कुछ सुन्दर जोड़ती हुई? अपने इस पाँचवें उपन्यास में गोविन्द मिश्र यथार्थ पर बराबर खड़े रहते हुए उन चिरन्तन, मानवीय और आत्मिक सन्दर्भों तक उठते दिखते हैं जिनसे जोड़कर जीवन को देखना ही उसे सम्पूर्णता में लेना है और जो इधर लगातार कम होता गया है।

    Customer Reviews

    There are no customer reviews yet.

    Write Your Own Review

    Govind Mishra

    1965 से लगातार और उत्तरोत्तर स्तरीय लेखन के लिए सुविख्यात। गोविन्द मिश्र इसका श्रेय अपने खुलेपन को देते हैं। समकालीन कथा-साहित्य में उनकी अपनी अलग पहचान है - एक ऐसी उपस्थिति जो एक सम्पूर्ण साहित्यकार का बोध कराती है, जिसकी वरीयताओं में लेखन सर्वोपरि है, जिसकी चिन्ताएँ समकालीन समाज से उठकर ‘पृथ्वी पर मनुष्य’ के रहने के सन्दर्भ तक जाती हैं और जिसका लेखन-फलक ‘लाल पीली ज़मीन’ के खुरदरे यथार्थ, ‘तुम्हारी रोशनी में’ की कोमलता और काव्यात्मकता, ‘धीरसमीरे’ की भारतीय परम्परा की खोज, ‘हुजूर दरबार’ और ‘पाँच आँगनोंवाला घर’ की इतिहास और अतीत के सन्दर्भ में आज के प्रश्नों की पड़ताल - इन्हें एक साथ समेटे हुए है। कम साहित्यकार होंगे जिनका इतना बड़ा ‘रेंज’ होगा और जिनके सृजित पात्रों की संख्या की हज़ार से ऊपर पहुंच रही होगी, जिनकी कहानियों में एक तरफ़ ‘कचकौंध’ के गँवई गाँव के मास्टर साहब हैं तो ‘मायकल लोबो’ जैसा आधुनिक पात्र या ‘ख़ाक इतिहास’ की विदेशी मारिया भी। गोविन्द मिश्र बुन्देलखंड के हैं तो बुन्देली उनकी भाषायी आधार है, लेकिन वे उतनी ही आसानी से ‘धीरसमीरे’ में ब्रजभाषा और ‘पाँच आँगनोंवाला घर’ और ‘पगला बाबा’ में बनारसी-भोजपुरी में भी सरक जाते हैं। प्राप्त कई पुरस्कारों/सम्मानों में ‘पाँच आँगनोंवाला घर’ के लिए 1998 का ‘व्यास सम्मान’, 2008 में ‘साहित्य अकादेमी’ (केन्द्रीय पुरस्कार), 2011 में ‘भारत भारती सम्मान’, 2013 का ‘सरस्वती सम्मान’ विशेष उल्लेखनीय हैं।

    प्रकाशित रचनाएँ:

    उपन्यास: वह/अपना चेहरा, उतरती हुई धूप, लाल पीली ज़मीन, हुजूर दरबार, तुम्हारी रोशनी में, धीरसमीरे, पाँच आँगनोंवाला घर, फूल...इमारतें और बन्दर, कोहरे में क़ैद रंग, धूल पौधों पर, अरण्यतंत्र; कहानी-संग्रह: दस से ऊपर; अन्तिम पाँच - पगला बाबा, आसमान...कितना नीला, हवाबाज़, मुझे बाहर निकालो, नये सिरे से; सम्पूर्ण कहानियाँ: निर्झरिणी (दो खंड); यात्रा-वृत्त: धुंध-भरी सुर्ख़ी, दरख़्तों के पार...शाम, झूलती जड़ें, परतों के बीच; निबन्ध: साहित्य का सन्दर्भ, कथा भूमि, संवाद अनायास, समय और सर्जना, साहित्य, साहित्यकार और प्रेम, सान्निध्य साहित्यकार; कविता: ओ प्रकृति माँ!; बाल-साहित्य: मास्टर मनसुखराम, कवि के घर में चोर, आदमी का जानवर। समग्र यात्रा-वृत्त: रंगों की गंध (दो खंड), चुनी हुई कविताएँ (तीन खंड)।

    सम्प्रति: एच.एक्स. 94, ई-7, अरेरा कॉलोनी, भोपाल-462016

    फोन: 0755-2467060, मो. 09827560110

    loading...
      • Sarthak An Imprint of Rajkamal Prakshan
      • Chahak An Imprint of Rajkamal Prakshan
      • Funda An Imprint of Radhakrishna
      • Korak An Imprint of Radhakrishna
    Location

    Address:1-B, Netaji Subhash Marg,
    Daryaganj, New Delhi-02

    Mail to: info@rajkamalprakashan.com

    Phone: +91 11 2327 4463/2328 8769

    Fax: +91 11 2327 8144