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Tulanatmak Sahitya : Saiddhantik Pariprekshya

Tulanatmak Sahitya : Saiddhantik Pariprekshya

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  • Pages: 260p
  • Year: 2015, 1st Ed.
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126727995
  •  
    तुलनात्मक साहित्य के विकास की पिछली डेढ़-दो शताब्दियों में बहुत सारे सवालों, संकटों, चुनोतियों और सचाइयों से हमारा साक्षात्कार हुआ है ! यह बात अब सिद्ध हो चुकी है कि तुलनात्मक साहित्य एक अध्ययन-पद्धति मात्र होने के बजे एक स्वतंत्र ज्ञानानुशासन का रूप ले चुका है ! एकल साहित्य से उसका कोई विरोध नहीं है ! बल्कि दोनों के अध्ययन का आधार और पद्धति एक ही तरह की होती है ! तुलनात्मक साहित्य का एकल साहित्य अध्ययन से अंतर अंतर्वस्तु, दृष्टिबिन्दु और परिप्रेक्ष्य की दृष्टि से होता है ! तुलनात्मक साहित्य अध्ययन को लेकर सबसे बड़ी भ्रान्ति तुलनीय साहित्यों की भाषाओँ की विशेषज्ञता को लेकर है ! केवल भाषा ज्ञान से साहित्यिक अध्ययन की योग्यता या समझ हासिल हो जाना जरूरी नहीं है, इसलिए तुलनीय साहित्यों के मूल भाषा ज्ञान पर तुलनात्मक साहित्य अध्ययन के प्रस्थान बिंदु के रूप में अतिरिक्त बल देना इस अनुशासन से अपरिचय का द्योतक है ! तुलनीय साहित्यों का भाषाज्ञान और उसमें दक्षता निश्चय ही वरेण्य है और तुलनात्मक साहित्य अध्ययन में साधक भी है, पर अधिकांश अध्ययनों के लिए अनुवाद (निश्चय ही अच्छा अनुवाद) आधारभूत और विकल्प हो सकता है ! दरअसल अनुवाद को तुलनात्मक साहित्य के सहचर के रूप में देखना चाहिए ! भारत में तुलनात्मक साहित्य अध्ययन के क्षेत्र में अधिकांश कार्य अंग्रेजी में और उसके माध्यम से हुआ है; अतः उसमें तुलनात्मक चिंतन के भरिय सन्दर्भ बहुत कम हैं ! आज तुलनात्मक अध्ययन अनुशासन की उस सैद्धांतिकी की तलाश अनिवार्य है, जो भारतेतर विचारकों और पश्चिमी चिंतन को भी ध्यान में रखते हुए भारतीय मनीषा के अंतर्मंथन से निकली हुई मौलिक अवधारणाओं के सहारे विकसित हो ! प्रस्तुत पुस्तक उपर्युक्त दिशा में आधार विकसित करने का हिंदी में पहला व्यवस्थित उद्यम है !

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    Hanumanprasad Shukl

    हनुमानप्रसाद शुक्ल

    काव्यशास्त्र एवं आलोचना, अनुप्रयुक्त भाषाविज्ञान तथा तुलनात्मक साहित्य-अध्ययन अभिरुचि के मुख्य क्षेत्र ! इन अनुशासनों पर केन्द्रित अनेक ग्रन्थ, शोध-लेख एवं आलेख प्रकाशित ! अंग्रेजी-हिंदी अनुवाद में भी रूचि !

    महात्मा गाँधी अन्तराष्ट्रीय हिंदी विश्व विद्यालय के साहित्य विद्यापीठ के अंतर्गत ‘साहित्य विभाग’ के प्रथम अध्यक्ष और हिंदी में तुलनात्मक साहित्य के पहले व्यवस्थित विभाग और पाठ्यक्रमो के पुरस्कर्ता ! फिर, राजस्थान विश्व विद्यालय जयपुर में प्रोफेसर के रूप में कार्य !

    सम्प्रति : म.गाँ.अं.हिं.वि, में भाषा प्रोद्योगिकी विभाग में प्रोफ़ेसर-अध्यक्ष तथा भाषा विद्यापीठ के अधिष्ठाता !

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