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Teesari Hatheli

Teesari Hatheli

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  • Pages: 150p
  • Year: 2001
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 10: 812670294X
  •  
    राजी के कथा-संसार में आदमी के अस्तित्व के सांस्कृतिक आयामों और मूल्यात्मक विरोधाभासों की पड़ताल के ज्यादा बड़े सवालों से जूझने के लिए परिवार भारतीय समाज की केन्द्रीय इकाई की हैसियत से प्रतिष्ठित है 1 राजी की कहानियों के सन्दर्भ में यह सामाजिक सांस्कृतिक मूल्य संवेदना का पारिवारिक देहान्तर है । कभी इस बदलाव के पीछे इतिहास या रणनीति या अर्थ की तत्काल- अनुपस्थित और अदृश्य व्यवस्थाएँ हैं तो कभी सम्बन्धों में शक्ति के सन्तुलन का बदला हुआ समीकरण । लेकिन इस सुबकते संसार में मौजूद आदमी की सोच और संवेदना के बहाव और मोड़ में इतिहास, राजनीति या अर्थ के हस्तक्षेप को पहचान लेना भर इन कहानियों के लिए काफी नहीं है । इस हस्तक्षेप के साथ जूझते हुए आदमी का लहूलुहान मर्म और फिर भी किसी मूल्य को खोजने, खोदने या दुह लेने की जिद और जूझ इन कहानियों को वहाँ तक ले जाना चाहती है जहाँ परिवर्तन की प्रक्रिया वैचारिक मीमांसाओं और बौद्धिक विश्लेषणों की पकड़ और पहुँच से बाहर रह जाया करती है । देखने में ये बहुत शान्त और स्थिर कहानियाँ हैं । फेन और फिचकुर उगलती, मुट्‌ठियाँ लहराती, उगते हुए सूरज के साथ समापन की ओर जाने वाली प्रसिद्ध रूप में जुझारू कहानियों के विपरीत यहां संरचना की सुस्पष्ट चौहद्‌दियों के बीच एक सुपरिभाषित भाव-संसार है जिसे किसी परिचित मिथक मूल्य से विचलन के क्षण में पकड़ा गया है । सधे हाथों की तराश के अधीन संरचना एक संयत, सन्तुलित सुसम्बद्ध आकार बनकर उभरती है । अहसास के फैलाव को एक बिन्दु पर केन्द्रित और सघन करते जाने की घोर तन्मयता कथा को उद्‌घाटित करती है । ऊपर से राजी का अनूठा शब्दशिल्प! शब्द को जा एक विशिष्ट विलक्षण अस्तित्व राजी दे पाती हैं उसके प्रति एक सजग विस्मय का भाव पैदा होता है । कथा यही प्राय: कथ्य का एक रूपकीय समतोल होती है । कथा की मूल्य-चेतना इस परिष्कार को अनिवार्य क', देती है क्योंकि वह राजी के लिए शायद सृजनकर्म की सार्थकता से जुड़ी हुई बात है । -अर्चना वर्मा

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    Rajee Seth

    जन्म: नौशेहरा छावनी (अविभाजित भारत), सन् 1935

    शिक्षा: एम.ए. अंग्रेजी साहित्य। विशेष अध्ययन: तुलनात्मक धर्म और भारतीय दर्शन।

    लेखन: जीवन के उत्तरार्द्ध में शुरू किया: 1975 से। उपन्यास, कहानी, कविता, समीक्षा, निबन्ध आदि सभी विधाओं में लेखन।

    प्रकाशन: तत-सम (उपन्यास); निष्कवच (दो उपन्यासिकाएँ); अन्धे मोड़ से आगे, तीसरी हथेली, यात्रा-मुक्त, दूसरे देशकाल में, सदियों से, यह कहानी नहीं, किसका इतिहास, गमे हयात ने मारा, खाली लिफाफा (कहानी-संग्रह)।

    मदर्स डायरी (अंग्रेजी में अनूदित); मेरे लई नई (पंजाबी में); मीलों लम्बा पुल (उर्दू में); निष्कवच (गुजराती में); इक्यूनॉक्स (तत-सम का अनुवाद अंग्रेजी में)।

    अनुवाद कार्य: जर्मन कवि रिल्के के 100 पत्रों का अनुवाद आक्ताविया पाज़, दायसाकू इकेदा, लक्ष्मी कण्णन, दिनेश शुक्ल की रचनाओं के बहुत से अनुवाद।

    राष्ट्रीय-अन्तर्राष्ट्रीय ‘हू इज हू’ में प्रविष्टि।

    सम्मान: हिन्दी अकादमी सम्मान, भारतीय भाषा परिषद पुरस्कार, अनन्त गोपाल शेवडे पुरस्कार, वाग्मणि सम्मान, संसद साहित्य परिषद सम्मान, जनपद अलंकरण आदि-आदि।

    सम्पर्क: एम-16, साकेत, नई दिल्ली-110 017

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