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Tat Par Hun Par Tatastha Nahin

Tat Par Hun Par Tatastha Nahin

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  • Pages: 172p
  • Year: 2010
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126719518
  •  
    कुँवर नारायण हमारे समय के उन अप्रतिम लेखकों में से हैं, जिन्होंने हिन्दी कविता में ही नहीं बल्कि पूरे भारतीय साहित्य में अपनी एक सशक्त और अमिट पहचान बनाई है। ‘तट पर हूँ पर तटस्थ नहीं’ पिछले एक दशक में कुँवर नारायण द्वारा विभिन्न लेखकों, कवियों, पत्रकारों को दी गई भेंटवार्त्ताओं का एक प्रतिनिधि चयन है। कुछ भेंटवार्त्ताओं में संवाद हैं, कुछ में अपने साहित्य और समय के प्रश्नों से गहराई में जाकर जूझने की कोशिश है और कुछ में प्रश्नों के सीधे और स्पष्ट उत्तर हैं। कुँवर नारायण हिन्दी के उन चुने हुए लेखकों में से हैं जो इंटरव्यू विधा को धैर्य और पर्याप्त गम्भीरता से लेते हैं। यही कारण है कि उनकी भेंटवार्त्ताओं के किसी भी चयन का महत्त्व उनकी समीक्षा पुस्तकों से कम नहीं है। उनकी कुछ लम्बी भेंटवार्ताएँ उतनी ही महत्त्वपूर्ण हैं जितनी उनकी समीक्षाएँ या विचारपरक निबन्ध। ‘तट पर हूँ पर तटस्थ नहीं’ का सम्पादन विनोद भारद्वाज ने किया है जो कुँवर नारायण की प्रारम्भिक भेंटवार्त्ताओें के संग्रह ‘मेरे साक्षात्कार’ का भी सम्पादन कर चुके हैं। पिछले चार दशकों से भी अधिक समय से विनोद भारद्वाज कुँवर नारायण के निकट सम्पर्क में रहे हैं। वह उनसे समय-समय पर कई लम्बी भेंटवार्त्ताओं का संयोजन भी कर चुके हैं। यह पुस्तक हिन्दी ही नहीं, भारतीय साहित्य के सभी अध्येताओं के लिए अत्यन्त महत्त्वपूर्ण साबित होगी। कुँवर नारायण के जीवन और साहित्य दोनों का ही एक अच्छा परिचय इस पुस्तक में मौजूद है। इंटरव्यू विधा प्रश्न-उत्तर, संवाद, डायरी, आत्मस्वीकृति, निबन्ध और समीक्षा की दुनिया में एक अद्भुत आवाजाही का माध्यम बन जाती है।

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    Kunwar Narain

    कुँवर नारायण

    आज के साहित्यिक परिदृश्य को दूर तक प्रभावित करनेवाले हिन्दी के शिखर कवि।

    जन्म: 1927। आधी सदी से अधिक समय से लेखन में सक्रिय हैं। कविता के साथ ही लगातार विभिन्न साहित्यिक, वैचारिक और सांस्कृतिक विषयों पर भी महत्त्वपूर्ण लेखन कर रहे हैं। कई पत्रिकाओं के सम्पादन और विभिन्न सांस्कृतिक संस्थाओं से जुड़े रहे हैं। उनकी अनेक कृतियों के भारतीय और विदेशी भाषाओं में अनुवाद प्रकाशित हो रहे हैं।

    प्रकाशित पुस्तकें - काव्य संग्रह: चक्रव्यूह, परिवेश: हम-तुम, तीसरा सप्तक, अपने सामने, कोई दूसरा नहीं, इन दिनों, हाशिए का गवाह; खंडकाव्य: आत्मजयी और वाजश्रवा के बहाने; कहानी संग्रह: आकारों के आसपास; समीक्षा: आज और आज से पहले, मेरे साक्षात्कार, साहित्य के अन्तर्विषयक सन्दर्भ; साक्षात्कार: तट पर हूँ पर तटस्थ नहीं; संचयन: कुँवर नारायण: संसार, कुँवर नारायण: उपस्थिति, चुनी हुई कविताएँ, प्रतिनिधि कविताएँ, नो अदर वर्ल्ड: अंग्रेज़ी अनुवाद और संचयन: अपूर्व नारायण।

    अनेक पुरस्कारों से सम्मानित जिनमें साहित्य अकादमी पुरस्कार, प्रेमचन्द पुरस्कार, शलाका सम्मान, राष्ट्रीय कबीर सम्मान, रोम का अन्तर्राष्ट्रीय ‘प्रीमिओ प़$ेरोनिआ’ पुरस्कार और भारत का सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान ‘ज्ञानपीठ’ पुरस्कार हैं। राष्ट्रीय सम्मान ‘पद्मभूषण’ से अलंकृत। साहित्य अकादमी की महत्तर सदस्यता (2010)।

    आरम्भिक जीवन फ़ैज़ाबाद और अयोध्या में बीता, उसके बाद अधिक समय लखनऊ में रहे। आजकल दिल्ली में पत्नी भारती और पुत्र अपूर्व के साथ रहते हैं।

    सम्पर्क: एच-1544, चितरंजन पार्क, नई दिल्ली-19

    फोन: (011) 26272508

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