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Tajmahal Ka Tender

Tajmahal Ka Tender

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  • Pages: 80
  • Year: 2016, 1st Ed.
  • Binding:  Paperback
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126729159
  •  
    ताजमहल का टेंडर' हिंदी का ऐसा मौलिक नाटक है जिसने सफल मंचनों के नए कीर्तिमान गढ़े। संस्कृत, अंग्रेजी और अन्य भाषाओं से अनूदित-रूपांतरित नाटकों पर निर्भर रहनेवाले हिंदी रंगमंच के पास हिंदी के अपने मौलिक नाटक इतने कम हैं कि उँगलियों पर गिने जा सकते हैं। उनमें भी मंचीयता के गुणों से संपन्न नाटक तो और भी कम हैं। ऐसे में ताजमहल का टेंडर एक राहत की तरह मंच पर उतरा था और आज वह अनेक नाटक-मंडलियों की प्रिय नाट्य-कृतियों में है, दर्शकों को तो खैर वह भुलाए ही नहीं भूलता। देश-विदेश की अनेक भाषाओं में इसका अनुवाद और मंचन हो चुका है, और हो रहा है। नाटक का आधार यह परिकल्पना है कि मुगल बादशाह शाहजहाँ इतिहास से निकलकर अचानक बीसवीं सदी की दिल्ली में गद्दीनशीन हो जाते हैं, और अपनी बेगम की याद में ताजमहल बनवाने की इच्छा ज़ाहिर करते हैं। नाटक में बादशाह के अलावा बाकी सब आज का है। सारी सरकारी मशीनरी, नौकरशाही, छुटभैये नेता, किस्म-किस्म के घूसखोर और एक-एक फाइल को बरसों तक दाबे रखनेवाले अलग-अलग आकारों के क्लर्क, छोटे-बड़े अफसर, और एक गुप्ता जी जिनकी देख-रेख में यह प्रोजेक्ट पूरा होना है। सारे ताम-झाम के साथ सारा अमला लगता है और देखते-देखते पच्चीस साल गुज़र जाते हैं। अधेड़ बादशाह बूढ़े होकर बिस्तर से लग जाते हैं और जिस दिन ताजमहल का टेंडर फ्लोट होने जा रहा है, दुनिया को विदा कह जाते हैं। नाटक का व्यंग्य हमारे आज के तंत्र पर है। बीच-बीच में जब हम इसे बादशाह की निगाहों से, उनके अपने दौर की ऊँचाई से देखते हैं, वह और भी भयावह लगता है, और ताबड़तोड़ कहकहों के बीच भी हम उस अवसाद से अछूते नहीं रह पाते जिसे यह नाटक रेखांकित करना चाहता है—यानी स्वार्थ की व्यक्तिगत दीवालियों के बीच पसरा वह सार्वजनिक अंधकार जिसे आज़ादी के बाद के भारत की नौकरशाही ने रचा है।

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    Ajay Shukla

    अजय शुक्ला

    जन्म : 7 जुलाई, 1955 ! आपने लखनऊ विश्वविद्यालय से एम. ए. किया है तथा 1980 में आप भारतीय रेल यातायात सेवा में अधिकारी हुए ! वर्ष 2015 में सदस्य यातायात के पद से आप सेवानिवृत हुए तथा अब लखनऊ में रह रहे हैं !

    आपकी रचनाएँ हैं :

    हिंदी में

    1. ''दूसरा अध्याय' : साहित्य कला परिषद द्वारा पुरस्कृत (नाटक)

    2 ''ताजमहल का टेंडर': 'मोहन राकेश सम्मान' से पुरस्कृत (नाटक)

    3. 'प्रश्नचिन्ह' (काव्य संग्रह)

    4. 'प्रतिबोध' (काव्य)।

    अंग्रेजी में :

    i. Silent Raindrops

    ii. Philosophy of Bhagavada Gita

    iii. 4 Lane Expressway to Stress Management and Happiness

    iv. E books - Yoga : Karma to Nirvana, Awakening, Muddle Management, My 'Life' as a Ghost, Smile

    आकाशवाणी के लिए लिखे एकमात्र नाटक 'हम होंगे कामयाब' के लिए आप राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित !

    संपर्क : आईवी-3, रेल विहार, सेक्टर एल.एल.डी.ए., आशियाना, लखनऊ-226012

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