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Swayambhu Mahapandita

Swayambhu Mahapandita

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  • Pages: 290p
  • Year: 1993
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 10: SM327
  •  
    वर्ष 1993 राहुल सांकृत्यायन का शताब्दी-वर्ष है और पूरा हिंदी-जगत विभिन्न आयोजनों के माध्यम से उन्हें याद कर रहा है, उनके प्रति अपनी श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा है । प्रस्तुत पुस्तक भी, उसके लेखक और प्रकाशक दोनों की ओर से, उस विराट व्यक्तित्व के प्रति एक विनम्र श्रद्धांजलि है । प्रस्तुत पुस्तक का प्रमुख और सबसे बड़ा लेख 'स्वयंभू महापंडित' है, जिसके आधार पर पुस्तक का नामकरण हुआ है । इस लेख में राहुलजी के कृतित्व और व्यक्तित्व का सारगर्भ लेखा-जोखा है । पुस्तक के अन्य लेखों में 'राहुलका हिमालय-प्रेम ' तथा 'राहुल के गुरु, गुरुबंधु और सहयोगी' भी विशेष महत्व के हैं । राहुल हिमालय के महायात्री ही नहीं, अनन्य आराधक और अन्वेषक भी थे । हिमालय के विभिन्न खंडों' से संबंधित उनकी कृतियां भारतीय साहित्य की अनमोल धरोहर हैं । प्रस्तुत पुस्तक में संकलित लेख 'राहुल का हिमालय प्रेम' को पढ़कर पाठक जानेंगे कि हिमालय संबंधी पुस्तकें तैयार करने में राहुलजी ने कितना परिश्रम किया, किंतु अंतत: उन पुस्तकों की कैसी दुर्दशा हुई । इसी प्रकार 'राहुल के गुरु, गुरुबंधु और सहयोगी ' शीर्षक लेख बताता है कि राहुलजी के चरित्र की वे कौन-सी विशेषताएं थीं जिन्होंने उन्हें महापंडित बना दिया । शेष लेखों में महापंडित के कुछ अन्य प्रमुख पहलुओं पर अधिक व्यापक प्रकाश डाला गया है । स्वयंभू महापंडित का विशेष आकर्षण है भदंत आनंद कौसल्यायन के नाम लिखे गए राहुलजी के 72 पत्रों का संकलन । राहुलजी की आत्मकथा में उनका 9 अप्रैल 1956 तक का ही जीवन सामने आता है .। उसके बाद के जीवन की महत्वपूर्ण सूचनाएं इन पत्रों में सुरक्षित हैं । स्वयंभू महापंडित में गुणाकर मुले ने राहुल साहित्य के उन विपुल संदर्भो को भी स्पष्ट किया है जिनसे अभी तक पाठकों का सी धा परिचय नहीं था । इस दृष्टि से यह पुस्तक एक शोधग्रंथ की महत्ता प्राप्त कर लेती है । स्वयंभू महापंडित के माध्यम से राहुल सांकृत्यायन के व्यक्तित्व और कृतित्व का इतना सूक्ष्म और गहन अध्ययन) हिंदी में संभवत: पहली बार हुआ है । आशा है, के हिंदी-जगत में इसका समुचित स्वागत होगा ।

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    Gunakar Muley

    जन्म : विदर्भ के अमरावती जिले के सिंदी बुजरूक गांव में, 3 जनवरी, 1935 को। आरंभिक पढ़ाई गांव के मराठी माध्यम के स्कूल में। स्नातक और स्नातकोत्तर (गणित) अध्ययन इलाहाबाद विश्वविद्यालय में। आरंभ से ही स्वतंत्र लेखन। विज्ञान, विज्ञान का इतिहास, पुरातत्व, पुरालिपिशास्त्र, मुद्राशास्त्र और भारतीय इतिहास व संस्कृति से संबंधित विषयों पर करीब 35 मौलिक पुस्तकें और 3000 से ऊपर लेख हिंदी में और लगभग 250 लेख अंग्रेजी में प्रकाशित। विज्ञान, इतिहास और दर्शन से संबंधित दर्जन-भर ग्रंथों का हिंदी में अनुवाद।

    सांस्कृतिक स्रोत एवं प्रशिक्षण केंद्र (नई दिल्ली) द्वारा अध्यापकों के लिए आयोजित प्रशिक्षण-शिविरों में लगभग एक दशक तक वैज्ञानिक विषयों पर व्याख्यान देते रहे।

    भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद् (नई दिल्ली) द्वारा प्रदत्त  सीनियर फैलोशिप के अंतर्गत 'भारतीय विज्ञान और टेक्नोलॉजी का इतिहास’ से संबंधित साहित्य का अध्ययन-अनुशीलन। विज्ञान प्रसार (विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार) के दो साल फेलो रहे।

    प्रमुख कृतियां : अक्षर-कथा, भारत : इतिहास और संस्कृति, आकाश-दर्शन, संसार के महान गणितज्ञ, तारों भरा आकाश, भारतीय इतिहास में विज्ञान, नक्षत्र-लोक, अंतरिक्ष-यात्र, सौरमंडल, महापंडित राहुल सांकृत्यायन, महाराष्ट्र के दुर्ग, गणितज्ञ-ज्योतिषी आर्यभट, भारतीय अंक-पद्धति की कहानी, भारतीय लिपियों की कहानी, भारतीय विज्ञान की कहानी, भारतीय सिक्कों का इतिहास, भास्कराचार्य, कंप्यूटर क्या है, कैसी होगी इक्कीसवीं सदी, खंडहर बोलते हैं, बीसवीं सदी में भौतिक विज्ञान, कृषि-कथा, महान वैज्ञानिक महिलाएं, प्राचीन भारत में विज्ञान, भारत के प्रसिद्ध किले, हमारी प्रमुख राष्ट्रीय प्रयोगशालाएं, गणित की पहेलियां, भारत : इतिहास, संस्कृति और विज्ञान आदि।

    पुरस्कार-सम्मान : हिंदी अकादमी (दिल्ली) का साहित्य सम्मान पुरस्कार। केंद्रीय हिंदी संस्थान (आगरा) का आत्माराम पुरस्कार। बिहार सरकार के राजभाषा विभाग का जननायक कर्पूरी ठाकुर पुरस्कार। मराठी विज्ञान परिषद् (मुंबई) द्वारा श्रेष्ठ विज्ञान-लेखन के लिए सम्मानित। 'आकाश-दर्शन’ व 'संसार के महान गणितज्ञ’ ग्रंथों के लिए प्रथम मेघनाद साहा पुरस्कार। राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संचार परिषद् (NCSTC) का राष्ट्रीय पुरस्कार।

    निधन : 16 अक्टूबर, 2009

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