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Sudeshanaa

Sudeshanaa

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  • Pages: 134p
  • Year: 1997
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 10: 817178304X
  •  
    उदयन बाजपेयी की इन कहानियो में हम अतिगल्‍प धर्मिता के एक ऐसे तत्त्व के सक्रिय देखने है जो हमारी भाषा मे एक अनोखी गल्‍प -सृष्टि का ि शलान्याम करता प्रतीत होता है । इन कहानियो का दूसरा तत्त्व इनमे विचार और अनुभूति के वे बारीक और उलझे हुए धागे है, जो इन कहानियो की अतिगल्प धर्मिता के बावजूद इन्हे परीक था की अनुकृति होने से बचाते हुए एक लगभग अप्रचलित -सा कथा -रूप प्रदान करते हैं । हम कह सकते हैं कि ये कहानियां परीकथा की अनुकृति! नहीं । उसकी पैरोडी हैं । रन कहानियो का सबसे मुखर और केन्द्रीय, यद्यपि नितान्त अदृश्य चरित्र ' समय ' है । वस्तुओ. चरित्रो और घटनाओं का अधिष्ठान या निरा एक आयाम होने से अधिक यहां यह समय स्वयं वस्तु ओ चरित्रा और घटनाओं के हाथों बनती-मिटती एक हस्ती ३ ' ये कहानियां समय की रचना 'करती हैं और (इस तरह) मानो प्रस्तावित करती हैं कि समय का प्रत्‍येक रूप एक संकल्प-सापेक्ष रचना है । इन कहानियों की प्रस्तावित-गल्प -सृष्टि हमारे यथार्थ कहे जानेवाले संसार से अनुकूलित होने या उसे अनुकूलित करने की बजाय उसे ' देखने ' का एरक ऐसा ' लोकस ' उपलब्ध कराती है, जहां से स्वयं इस संसार का गल्प उजागर हो सके । दूसरे शब्दों मे वे कथा और सृष्‍टि के बीच मान्य द्वैत का प्रतिकार करती हैं ओर ऐसा करते हए वे अपनी विश्वसनीयता की कीमत चुकाती हैं । अविश्वसनीयता को ये कहानियाँ अलंकार के नही, रस के रूप मे प्रस्तावित करनी हैं । और इस सबसे ऊपर इनमे गहरी रागात्मकता और मसक्ति है जो इनके अन्तनिर्हित बौद्धिक तनाव औग् मुवहमे वातावरण -को स्पन्दनशील और स्पृहर्णाय बनाती है ।

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    Udayan Vajpayee

    उदयन वाजपेयी

    जन्म : ४ जनवरी, १९६०, सागर, मध्यप्रदेश।

    प्रकाशित पुस्तकें :

    कुछ वाक्य, पागल गणितज्ञ की कविताएँ (कविता-संग्रह); सुदेशना, दूर देश की गन्ध, सातवाँ बटन (कहानी-संग्रह); चरखे पर बढ़त, जनगढ़ कलम, पतझर के पाँव की मेंहदी (निबन्ध और यात्रा वृत्तान्त) ; अभेद आकाश ( फिल्मकार मणि कौल से बातचीत); मति, स्मृति और प्रज्ञा ( इतिहासकार धर्मपाल से बातचीत); का.ना. पणिक्कर पर थियेटर ऑफ रस और रतन थियाम पर थियेटर ऑफ ग्रेंजर ; वी आँविजि़ब्ल (फ्राँसीसी में कविताओं के अनुवाद की पुस्तक); मटमैली स्मृति में प्रशान्त समुद्र (जापानी कवि शुन्तारो तानीकावा के हिन्दी में अनुवाद); कविताओं, कहानियों और निबन्धों के अनुवाद तमिल, बाङ्ला, ओड़िया, मलयालम, मराठी, अँग्रेज़ी, फ्राँसीसी, स्वीडिश, पोलिश, इतालवी, बुल्गारियन आदि भाषाओं में।

    कुमार शहानी की फिल्म 'चार अध्याय' और 'विरह भर्यो घर-आँगन कोने में' का लेखन।

    कावालम नारायण पणिक्कर की रंगमण्डली 'सोपानम्' के लिए उत्तररामचरितम्, अभिज्ञानशाकुन्तलम् की हिन्दी में पुनर्रचना, पणिक्कर के साथ कालिदास के तीनों नाटकों के आधार पर संगमणियम् नाटक का लेखन।

    २००० में लेविनी (स्वीट्ज़रलैण्ड) में और २००२ से पेरिस (फ्राँस) में 'राइटर इन रेसिडेंस', २०११ में नान्त (फ्राँस) में अध्येता की तरह आमन्त्रित। 

    मई २००३ में फ्राँस के राष्ट्रीय पुस्तकालय में भारतीय कवि की हैसियत से व्याख्यान। वाराणसी, भुबनेश्वर, पटना, मुम्बई, दिल्ली, पेरिस, मॉस्को, जिनिवा, काठमाण्डू आदि स्थानों पर कला, साहित्य, सिनेमा, लोकतन्त्र आदि विषयों पर व्याख्यान। 

    रज़ा फाउण्डेशन और कृष्ण बलदेव वैद पुरस्कार से सम्मानित।

    गाँधी चिकित्सा महाविद्यालय, भोपाल में अध्यापन।

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