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Striyan : Parde Se Prajatantra Tak

Striyan : Parde Se Prajatantra Tak

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  • Pages: 248
  • Year: 2012, 1st Ed
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126722907
  •  
    समाज और वैचारिक दुनिया में औरत की जगह को लेकर चिंता और अध्ययन कोई नया विषय नहीं है, लगभग तीन सदी पहले यह दास्तान शुरू हुई थी | जॉन स्टुअर्ट मिल, मेरी वॉलस्टनक्राफ्ट से होते हुए सीमोन द बोउवा तक होती हुई यह परंपरा भारत में प्रभा खेतान जैसी चिंतकों तक आती है | स्त्री-विमर्श विचार के विविध अनुशासनों में अलग-अलग रूप में होता रहा है और हो रहा है, पर अंतर्धारा एक ही है | यह पुस्तक स्त्री के विरोधाभासी जीवन की सामाजिक समस्याओं का समग्रता से मूल्यांकन करती है, पारंपरिक स्रोतों के साथ-साथ समाचार पत्रों एवं साहित्य का प्रचुर मात्र में उपयोग करते हुए इस पुस्तक की अध्ययन-परिधि को राजस्थान के तीन रजवाडो-जोधपुर,जैसलमेर एवं बीकानेर के विशेष सन्दर्भ में बीसवीं शताब्दी के पूर्वार्द्ध तक विस्तार दिया गया है | इस पुस्तक की खासियत यह है कि इसमें सायास रजवाड़ों, ठिकानो से इतर सामान्य महिलाओं की स्थिति पर भी ध्यान केन्द्रित किया गया है और बीसवीं सदी के पूर्वार्द्ध के साक्षी रचनात्मक साहित्य और समाचार पत्रों को बड़े पैमाने पर इतिहास लेखन के स्रोत के रूप में इस्तेमाल किया गया है | जिस भौगोलिक क्षेत्र को यह कृति संबोधित है, उसके लिए ऐसी पुस्तक की बेहद जरुरत थी जिसे इस पुस्तक ने निस्संदेह सफलतापूर्वक पूरा किया है | अनेक विधाओं में और विभिन्न माध्यमों के लिए समान अधिकार से लिखने वाले दुष्यंत की विषयानुरूप सहज, सम्मोहक और प्रांजल भाषा ने इस पुस्तक को बहुत रोचक और पठनीय बना दिया है | रेखांकित किया जाना जरूरी है कि 'स्त्रियाँ : पर्दे से प्रजातंत्र तक' हिंदी में मौलिक और रचनात्मक शोध की बानगी भी पेश करती है | विश्वास किया जा सकता है कि संजीदा और सघन वैचारिक बुनियाद पर गहन शोध के आधार पर लिखित इस पुस्तक को भारत में स्त्री इतिहास-लेखन के लिहाज से महत्त्पूर्ण माना जाएगा |

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    Dushyant

    जन्म: 13 मई, 1977, भारत-पाक सीमा पर बसे केसरीसिंहपुर कस्बे में।

    शिक्षा: इतिहास में बी.ए. (ऑनर्स), यूजीसी-नेट, जेआरएफ, पी-एच.डी. हैं।

    पी-एच.डी. शोध के दौरान उन्होंने दर्जन-भर शोध लेख सेमिनार्स में प्रस्तुत किए, जर्नल्स में प्रकाशित हुए। अपनी बुनियादी बुनावट में वे लेखक हैं तो इतिहास लिखना भी उन्हें प्रिय है और कहानियाँ, कविताएँ भी। कुछ साल पढ़ाया...भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद् (दिल्ली) के फैलो रहे, पिछले कुछ सालों से पेशे से लेखक और पत्रकार हैं।

    दो कविता-संग्रह और रूसी कविताओं के अनुवाद की एक पुस्तक उनके नाम दर्ज है, इसके अलावा दर्जन-भर यूरोपीय और लैटिन अमेरिकी कवियों की कविताओं का भी हिन्दी अनुवाद किया है। हिन्दी की श्रेष्ठ पत्रिकाओं कथादेश, नया ज्ञानोदय, वागर्थ, परिकथा, पाखी, बया, वसुधा आदि में कहानियाँ, कविताएँ और अनुवाद लगातार प्रकाशित और चर्चित हुए हैं। उनकी अनेक रचनाओं के अनुवाद कई भारतीय और विदेशी भाषाओं में हुए हैं।

    सम्पर्क: मो.: 91-98290-83476

    ई-मेल: dr.dushyant@gmail.com

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