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Stree Lekhan : Swapn Aur Sankalp

Stree Lekhan : Swapn Aur Sankalp

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  • Pages: 328p
  • Year: 2019, 3rd Ed.
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126720217
  •  
    स्त्री-लेखन स्त्री की आकांक्षाओं का दर्पण है। यह स्त्री की मानवीय इयत्ता को पाने और जीने का स्वप्न है; मुक्ति की राहों के अन्वेषण का संघर्ष है; और उन राहों पर अविराम चलने की संकल्पदृढ़ता भी। स्त्री-लेखन स्त्री मानस के तलघर को बिना किसी छेड़छाड़ के सामने रखता है जहाँ व्यवस्था के विरोध में उफनती हुंकारों के साथ व्यवस्था में परित्राण पाने की बेचारगियाँ भी हैं और भेड़ की तरह जिबह होने की यंत्रणा के साथ भेड़िया बनकर दूसरों को लील जाने की कुटिलताएँ भी। इसे मानवीय दुर्बलताओं की नैसर्गिक अभिव्यक्ति कहिए या अंतर्विरोधों का स्वीकार - स्त्री-लेखन पारम्परिक ‘माइंड सैट’ से लड़ने की कोशिश में परम्परा और ‘माइंड सैट’ दोनों की ताकत को एक ठोस सामाजिक-मानसिक सच्चाई और चुनौती के रूप में सतह पर लाता है। लेकिन क्या वास्तव में स्त्री-लेखन इतनी निःसंग विश्लेषणपरकता के साथ अपने स्व को और समाज के शास्त्र को जाँच सका है? यह पुस्तक स्त्री के नजरिए से स्त्री-लेखन का पाठ है; उसकी क्षमताओं, सीमाओं और अंतर्विरोधों का आकलन करते हुए युग की नब्ज को टटोलने का जतन भी। यह पुस्तक उन दरारों-दरकनों में झाँकने का प्रयास भी है जहाँ स्त्री को ‘स्त्री’ बनाए रखने की ‘प्रगतिशील साजिशों’ में स्त्री-मुक्ति के एजेंडे को गुमराह करने और स्त्री-विमर्श को देह-विमर्श में रिड्यूस करने की कोशिशें निहित हैं। दुर्भाग्यवश हिंदी आलोचना ‘आरोप’ लगा कर स्त्री-लेखन के महत्व को खारिज करती आई है या उसे घर-सम्बन्धों के संकुचित दायरे से बाहर निकल कर बृहत्तर मुद्दों से जुड़ने की ‘सीख’ देती रही है। प्रकारान्तर से दोनों ही स्थितियाँ स्त्री-लेखन के बुनियादी सरोकारों से मुँह चुराने की कोशिशें हैं। यह पुस्तक पहली बार इस तथ्य को रेखांकित करती है कि स्त्री-विमर्श का लक्ष्य पाठक में अब तक के ‘अनदेखे’ को देखने और गुनने की संवेदनशीलता विकसित करना है ताकि लैंगिक विभाजन से मुक्त मनुष्य और समाज की रचना के स्वप्न को साकार किया जा सके।

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    Rohini Agrawal

    रोहिणी अग्रवाल

    जन्म : 9 दिसम्बर 1959 मानसा, पंजाब ।

    शैक्षणिक योग्यता : एम.ए. (हिंदी एवं अंग्रेजी), पी-एच.डी. (हिंदी), पत्रकारिता में स्नातकोत्तर डिप्लोमा।

    प्रकाशित पुस्तकें :  हिंदी उपन्यास में कामकाजी महिला; एक नजर कृष्णा सोबती पर; इतिवृत्त की संरचना और स्वरूप (पन्द्रह वर्ष के प्रतिमानक उपन्यास); समकालीन कथा साहित्य : सरहदें और सरोकार (आलोचना) । घने बरगद तले (कहानी संग्रह); कहानी यात्रा सात (संपादित कहानी-संग्रह); लगभग डेढ़ दर्जन कहानियाँ विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित ।

    सम्मान : कहानी कोहरा छँटता हुआ तथा आर्कीटैक्ट वर्ष 1987 तथा 2003 में हरियाणा साहित्य अकादमी द्वारा पुरस्कृत; आलोचनात्मक पुस्तक समकालीन कथा साहित्य : सरहदें और सरोकार वर्ष 2008 में हरियाणा साहित्य अकादमी द्वारा पुरस्कृत; स्पंदन आलोचना पुरस्कार (वर्ष 2010) ।

    सम्प्रति: प्रोफेसर एवं अध्यक्ष, हिंदी विभाग, महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक (हरियाणा) ।

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