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Shunya Se Shikhar

Shunya Se Shikhar

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  • Pages: 319p
  • Year: 2016, 10th Ed.
  • Binding:  Paperback
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126709106
  •  
    पुस्तक की प्रेरणा डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम, महामहिम राष्ट्रपति का 'विजन : 2020' ''सन् 2020 में भारत को हमें संपन्न व विकसित राष्ट्र बनाना है...'' मुझे यह जानकर प्रसन्नता हुई है कि देश के अग्रणी उद्योगपतियों की विकास गाथा के सम्म्बन्ध में एक पुस्तक का प्रकाशन किया जा रहा है। इनमें से प्रत्येक उद्योगपति ने विभिन्न क्षेत्रों में देश के औद्योगिक विकास में जो योगदान दिया है, वह सराहनीय है। इस प्रकार के अग्रगामी उद्योगपतियों की उद्यमिता और कल्पनाशीलता के आधार पर हम अपने देश को वर्ष 2020 तक विश्व के शीर्ष देशों में अग्रणी स्थान दिलाने में सफल होंगे, इसका मुझे पूरा विश्वास है। मुझे आशा है कि यह पुस्तक 'शून्य से ख्शिखर' सभी उद्यमियों को उत्कृष्टता के मार्ग पर अग्रसर होने की प्रेरणा देगी। भैरोसिंह शेखावत उप-राष्ट्रपति, भारत यह न तो साहित्यिक कृति है और न ही उस किस्म की पुस्तक, जिनके शीर्षक होते हैं—'कैसे हो सफल' या 'कैसे बने अमीर'। यह पुस्तक उन भारतीय कार्पोरेट्स की कहानी दोहराती है, जो वास्तविक जीवन में शून्य से शिखर पर पहुँचे हैं। यही समय पर सही जोखिम उठाने वाले इस पुस्तक के नायक उद्यमशीलता का सबक सिखाते हैं और कहते हैं कि धन कमाना बुराई नहीं है। इनका अनुकरण करके ही हम देश के नए राष्ट्रनायक श्री ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का विकसित राष्ट्र का 'विजन : 2020' पूरा कर सकते हैं।

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    Prakash Biyani

    किशोरावस्था से सतत् लेखन कर रहे प्रकाश बियाणी मूलत: बैंकर हैं। भारतीय स्टेट बैंक में 25 साल (1968-1995) नौकरी करने के बाद वे आठ साल देश के अग्रणी समाचार पत्र समूह 'दैनिक भास्कर’ में कार्पोरेट संपादक रहे हैं। देश के औद्योगिक परिदृश्य व उद्योगपतियों पर उनके दो हजार से ज्यादा लेख/साक्षात्कार/समीक्षाएं विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए हैं। इस दौरान उन्हें देश के कई अग्रणी उद्योगपतियों से प्रत्यक्ष मुलाकात का सुअवसर भी मिला है एवं राष्टï्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बिजनेस मीट/ इवेंट्स में शिरकत करने का मौका भी। इन दिनों वे कार्पोरेट जगत व कंपनी मामलों पर स्वतंत्र लेखन कर रहे हैं। आपकी पुस्तक 'शून्य से शिखर’ (35 भारतीय उद्योगपतियों की यशोगाथा) को पाठकों खासकर बिजनेस स्कूल के छात्रों ने खूब सराहा है। अपने किस्म की इस अनूठी पुस्तक का द्वितीय संशोधित संस्करण एवं पेपरबैक संस्करण भी एक साल में मार्केट में लांच हो चुके हैं।

    'जो समाज धनोपार्जन करने वाले लोगों को कोसता है वह दरिद्रता में जीता है’ - स्व. धीरूभाई अंबानी के इस कथन से सहमत होते हुए

    श्री बियाणी का मत है कि राष्टï्रीय संपदा का समाज के हर वर्ग में न्यायोचित वितरण होना चाहिए। वे मानते हैं कि प्रतिस्पर्धा के ताजा दौर में केवल सर्वश्रेष्ठï ही बचेंगे पर शिक्षित व अशिक्षित अथवा कुशल व अकुशल हर शख्स को रोजगार के अवसर मिलना चाहिए। तद्नुसार यदि अब कोई चूक न हुई तो उदारीकरण व आर्थिक सुधार कार्यक्रम का दूसरा दौर देश के हर वर्ग को उनके वाजिब हक दिलवाएगा। इतिहास से सबक लेने की मंशा से लिखी गई है यह पुस्तक : 'जी, वित्तमंत्रीजी!’

    सम्पर्क : (०७३१) २५६०७७७, ०९३०३२२३९२८

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