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Shigaf

Shigaf

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  • Pages: 256p
  • Year: 2012
  • Binding:  Paperback
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126722440
  •  
    विस्थापन का दर्द महज एक सांस्कृतिक, सामाजिक विरासत से कट जाने का दर्द नहीं है बल्कि अपनी खुली जडें लिए भटकने और कहीं जम न पाने की भीषण विवशता है, जिसे अपने निर्वासन के दौरान सैनसबेस्टियन (स्पेन) में रह रही अमिता, लगातार अपने ब्लॉग में लिखती रही है। डॉन किहोते की ‘रोड टू ला मांचा’ से कश्मीर वादी में लौटने की, अमिता की भटकावों तथा असमंजस भरी इस यात्रा को अद्भुत तरीके से समेटता हुआ यह उपन्यास विस्थापन और आतंकवाद की कोई व्याख्या या समाधान नहीं प्रस्तुत करता वरन् आस्था-अनास्था की बर्बर लड़ाइयों के बीच, कुचले जाने से रह गए कुछ जीवट पलों को जिलाता है और ज़मीन पर गिर पड़े उस दिशा संकेतक बोर्ड को उठाकर फिर-फिर गाड़ता है जिस पर लिखा हैदृभाई मेरे, अमन का एक रास्ता इधर से भी होकर गुज़रता है। शिगाफ़ यानि एक दरार जो कश्मीरियत की रूह में स्थायी तौर पर पड़ गई है, जिसमें से धर्मनिरपेक्षता एक हद तक रिस चुकी है, इस शिगाफ़ को भरने के लिए प्रयासरत है उपन्यास का पत्रकार नायक ज़मान। अमिता और ज़मान जिनका लक्ष्य तो एक है मगर फिर भी दो विपरीत व विषम अतीत से उपजे जीवन मूल्यों को सहेजते हुए वे कई बार प्रक्रिया तथा प्रतिक्रिया से उलझते हुए आपस में टकराते रहते हैं। अमिता के ब्लॉग, यास्मीन की डायरी, मानव बम जुलेखा का मिथकीय कोलाज, अलगाववादी नेता वसीम के एकालाप के जरिये कश्मीर और कश्मीरियत की विदीर्ण व्यथा कथा को अलग कोण, नए शैलीगत प्रयोगों तथा ताज़गी भरी भाषा के साथ अपने उपन्यास ‘शिगाफ़’ में अनूठे ढंग से प्रस्तुत कर रही हैंदृमनीषा कुलश्रेष्ठ।

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    Manisha Kulshreshtha

    जन्म: 26 अगस्त, 1967, जोधपुर।

    शिक्षा: बी.एससी., एम.ए. हिन्दी साहित्य), एम.फिल. विशारद (कथक)।

    प्रकाशित कृतियाँ:

    कहानी संग्रह: कठपुतलियाँ, कुछ भी तो रूमानी नहीं, केयर ऑफ स्वात घाटी, गन्धर्व-गाथा, बौनी होती परछाईं।

    उपन्यास: शिगाफ, शालभंजिका।

    अन्य: ‘नया ज्ञानोदय’ में इंटरनेट और हिन्दी पर लिखी लेखमाला की पुस्तक शीघ्र प्रकाश्य।

    अनुवाद: माया एंजलू की आत्मकथा ‘वाय केज्ड बर्ड सिंग’ के अंश, लातिन अमरीकी लेखक मामाडे के उपन्यास ‘हाउस मेड ऑफ डॉन’ के अंश, बोर्हेस की कहानियों का अनुवाद।

    पुरस्कार व सम्मान: चन्द्रदेव शर्मा सम्मान, 1989 (राजस्थान साहित्य अकादमी); कृष्ण बलदेव वैद फैलोशिप, 2007; डॉ. घासीराम वर्मा सम्मान, 2009; रांगेय राघव पुरस्कार वर्ष 2010 (राजस्थान साहित्य अकादमी)।

    बहुचर्चित उपन्यास ‘शिगाफ’ का हायडलबर्ग (जर्मनी) के साउथ एशियन मॉडर्न लैंग्वेजेज़ सेंटर में वाचन।

    सम्प्रति: स्वतंत्र लेखन और इंटरनेट की पहली हिन्दी वेबपत्रिका ‘हिन्दीनेस्ट’ का ग्यारह वर्षांे से सम्पादन। हिन्दीनेस्ट के अलावा, वर्धा विश्वविद्यालय की वेबसाइट ‘हिन्दी समय डॉट कॉम’ का निर्माण, संगमन की बेबसाइट ‘संगमन डॉट कॉम’ का निर्माण व देखरेख।

    वर्तमान पता: 9/96, अर्जन विहार, दिल्ली कैंट, नई दिल्ली।

    स्थायी पता: 65 गिरनार कॉलोनी (साउथ), आदित्य विहार, गांधी पथ, वैशाली नगर, जयपुर।

    ईमेल: manishakuls@gmail.com

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