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Savant Aunty Ki Ladkiyan

Savant Aunty Ki Ladkiyan

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  • Pages: 175p
  • Year: 2010
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126719228
  •  
    मिथकों और दंतकथाओं का आविष्कार गीत चतुर्वेदी की कहानियों की विशेषता है। हमारी इतिहास चेतना को तथ्यों के घटाटेप में मूंदकर तबाह करने के षड्यंत्र की मुख्खालफत करते हुए गीत की कहानियां व्यष्टि के बहाने समष्टि का भावात्मक इतिहास बनकर पाठकों के कलात्मक आस्वाद का विस्तार करती हैं। चाहे 'सौ किलो का साँप' हो, 'सावंत आंटी की लड़कियाँ' या फिर 'साहिब है रंगरेज' जैसी कहानी, गीत हमारे समाज के अवचेतन में दबी पड़ी उत्कंठाओं, आशाओं व दुराशाओं को एक गहन अंतर्दृष्टि के साथ रचनात्मक लहजे में ढालते हैं।...(उनकी कहानियों के) संसारों की बहुलता के मूल में है भाषा की बहुध्वन्यात्मकता। गीत भाषा के साथ बहुत सजग और रचनात्मकता खिलवाड़ करते हैं। —प्रियम अंकित, प्रगतिशील वसुधा इक्कीसवीं सदी के पहले दशक के मेरे प्रिय कवि व कथाकार हैं गीत चतुर्वेदी। —नामवर सिंह ‘सावंत आंटी की लड़कियाँ’ जीवन को गहरी उथलपुथल में डालती हैं। कठोर इलाकों में प्रवेश करती हुई वे लगभग बेकाबू हैं, उनका जोखिम ज़बर्दस्त है, शास्त्रीयता का मुखौटा तोडऩे वाला। यह कहानी फतह नहीं, त्रासदी है। —ज्ञानरंजन गीत चतुर्वेदी ने अपने गल्प व कविताओं में अवां-गार्द भाव दिखाया है। उनका अध्ययन बेहद विस्तृत है जो कि उनकी पीढ़ी के लिए एक दुर्लभ बात है। यह पढ़ाई उनकी रचनाओं में अनायास व सहज रूप से गुँथी दिखती है। उनकी भाषा व शैली अभिनव है। उनके पास सुलझी हुई दृष्टि है जिसमें क्लीशे नहीं और जो कि वर्तमान विचारधारात्मक खेमों के शिकंजे में भी फँसी हुई नहीं है। —अशोक वाजपेयी गीत चतुर्वेदी समकालीन रचनाशीलता के विरल उदाहरण हैं। कविता, कहानी व अनुवाद में उन्होंने कई यादगार काम किए हैं। ‘साहिब है रंगरेज़’ उनके कथाकार की उपलब्धि है। —अखिलेश व्यष्टि के बहाने समष्टि का भावात्मक इतिहास। भाषाई बहुध्वन्यात्मकता इन कहानियों की बहुलता के मूल में है। गीत भाषा के साथ बहुत सजग और रचनात्मक खिलवाड़ करते हैं। —प्रियम अंकित गीत चतुर्वेदी विरल रचनाकारों में से एक हैं। ‘साहिब है रंगरेज़’ निश्चित ही एक बेहतरीन रचना है। हमारे समय की जीवित मन:स्थितियों का एक पाठ। —जीतेन्द्र गुप्ता

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    Geet Chaturvedi

    गीत चतुर्वेदी

    27 नवंबर 1977 को मुंबई में जन्मे गीत चतुर्वेदी को हिंदी के सबसे ज़्यादा पढ़े जाने वाले समकालीन लेखकों में से एक माना जाता है। उनकी दस किताबें प्रकाशित हैं, जिनमें दो कहानी-संग्रह (‘सावंत आंटी की लड़कियाँ’ व ‘पिंक स्लिप डैडी’, दोनों 2010) तथा दो कविता-संग्रह (‘आलाप में गिरह’, 2010 व ‘न्यूनतम मैं’, 2017) शामिल हैं। ‘न्यूनतम मैं’ करीब दो साल तक हिंदी की बेस्टसेलर सूची में शामिल रहा। साहित्य, सिनेमा व संगीत पर लिखे उनके निबंधों का संग्रह ‘टेबल लैम्प’ 2018 में आया।

    कविता के लिए गीत को भारत भूषण अग्रवाल पुरस्कार तथा गल्प के लिए कृष्णप्रताप कथा सम्मान,

    शैलेश मटियानी कथा सम्मान व कृष्ण बलदेव वैद फेलोशिप मिल चुके हैं।

    ‘इंडियन एक्सप्रेस’ सहित कई प्रकाशन संस्थानों ने उन्हें भारतीय भाषाओं के सर्वश्रेष्ठ लेखकों में शुमार किया है। गीत चतुर्वेदी की रचनाएँ देश-दुनिया की 19 भाषाओं में अनूदित हो चुकी हैं। उनकी कविताओं के अंगे्रज़ी अनुवाद का संग्रह ‘द मेमरी ऑ$फ नॉउ’ 2019 के बसंत में अमेरिका से प्रकाशित हुआ। उनके नॉवेल ‘सिमसिम’ के अंग्रेज़ी अनुवाद को (अनुवादक अनिता गोपालन) ‘पेन अमेरिका’ ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित

    ‘पेन-हैम ट्रांसलेशन ग्रांट’ अवार्ड किया है। गीत इन दिनों भोपाल रहते हैं।

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