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Sardar Patel Aur Bhartiya Musalman

Sardar Patel Aur Bhartiya Musalman

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  • Pages: 115p
  • Year: 2008
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788171786046
  •  
    भारत के प्रथम गृहमंत्री लौहपुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल पर उनके जीवन के अंतिम वर्षो में और उनकी मृत्यु के बाद तो और भी ज्यादा यह आरोप चस्पां होता गया है कि उनकी सोच में मुस्लिम-विरोध का पुट मौजूद था । इस पुस्तक में देश के जाने-माने बौद्धिक डॉ: रफीक जकरिया ने बिना किसी आग्रह- पूर्वाग्रह के इस आरोप की असलियत की जाँच-पड़ताल की है और इसकी तह तक गए हैं । सरदार पटेल के तमाम बयानात, उनके राजनीतिक जीवन की विविध घटनाओं और विभिन्न दस्तावेजों का सहारा लेते हुए विद्वान लेखक ने यहाँ उनकी सोच और व्यवहार का खुलासा किया है । इस खोजबीन में उन्होंने यह पाया है कि देश-विभाजन के दौरान हिंदू शरणार्थियों की करुण अवस्था देखकर पटेल में कुछ हिंदू-समर्थक रुझानात भले ही आ गए हों पर ऐसा एक भी प्रमाण-नहीं. मिलता, जिससे यह पता चले कि उनके भीतर भारतीय मुसलमानों के विरोध में खड़े होने की कोई प्रवृत्ति थी । महात्मा गांधी के प्रारंभिक सहकर्मी के रूप में 'सरदार पटेल ने हिन्दू-मुस्लिम एकता के जैसे शानदार उदाहरण गुजरात में प्रस्तुत किए थे उन्हें अंत तक बनाए रखने की प्रबल भावना उनमें बार-बार जाहिर होती रही । मोहम्मद अली जिन्ना और मुस्लिम लीग का कड़ा विरोध करने का उनका रवैया उनके किसी मुस्लिम विरोधी रुझान को व्यक्त करने के बजाय उनकी इस खीझ को व्यक्त करता है कि लाख कोशिशों के बावजूद भारत की सामुदायिक एकता को वे बचा नहीं पा रहे हैं । कूटनीतिक व्यवहार की लगभग अनुपस्थिति और खरा बोलने की आदतवाले इस भारतीय राष्ट्र-निर्माता की यह कमजोरी भी डॉक्टर जकरिया चिन्हित करते हैं कि मुस्लिम-लीग के प्रति अपने विरोध की धार उतनी साफ न रख पाने के चलते कई बार उन्हें गलत समझ लिए जाने की पूरी गुंजाइश रह जाती थी । स्वतंत्रता के इस स्वर्ण जयंती वर्ष में सरदार वल्लभ भाई पटेल के विषय में व्याप्त कई सारी गलतफहमियाँ इस पुस्तक से काफी कुछ दूर हो जाएँगी ।

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    Rafiq Zakaria


    डॉ. रफीक जकरिया
    डी. रफीक जकरिया विधि, शिक्षा, पत्रकारिता, राजनीति और इस्लाम से जुड़े विषयों के आधिकारिक विद्वान हैं । उन्होंने स्त्रातकोत्तर परीक्षा मुंबई विश्वविद्यालय से स्वर्णपदक के साथ उत्तीर्ण की और बाप मे लंदन विश्वविद्यालय से विशेष प्रतिष्ठा के साथ पीएचडी. की उपाधि ग्रहण की । स्वतंत्रता संघर्ष के साथ छात्र-जीवन से ही जुड़े रहे । अच्छे वकील के रूप में ख्याति प्राप्त करने के बाद महाराष्ट्र विधान परिषद में चुने गए और 1962 के बाद से पंद्रह वर्षों तक राज्य सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे । 1978 में सांसद बने और संसद में कांग्रेस के उपनेता का पद संभाला । बाद में प्रधानमंत्री के विशेष दूत के रूप में उन्होंने  1984 में इस्लामी देशों का काफी महत्त्वपूर्ण दौरा किया । 1965,199० और 1996 में तीन बार उन्होंने संयुक्त राष्ट्र में भारत का प्रतिनिधित्व किया ।
    अंतर्राष्ट्रीय प्रतिष्ठाप्राप्त विद्वान डी. जकरिया ने 'ए स्टडी ऑफ नेहरू' समेत बीस पुस्तकें लिखी हैं । सलमान रही की किताब सैनिक वर्सेज के प्रत्योत्तर में लिखी उनकी पुस्तक 'मोहम्मद एंड कुरान' को विश्वव्यापी ख्याति मिली है । वे विभिन्न सामाजिक और शैक्षिक संगठनों से जुडे रहे हैं । मुंबई और औरंगाबाद में उन्होंने एक दर्जन से ज्यादा उच्चशिक्षा संस्थानों की स्थापना की है ।
    महत्त्वपूर्ण प्रकाशित रचनाएँ
    'ए स्टडी ऑफ नेहरू', 'रजिया : द क्वीन' ऑफ इंडिया', 'राइज ऑफ मुस्लिम इन इंडियन पॉलिटिक्‍स', 'हंड्रेड ग्लोरियस इयर्स, 'प्राइस ऑफ पावर', 'स्ट्रगल विदिन इस्लाम', 'ट्रायल ऑफ बेनजीर', 'मोहम्मद एंड कुरान', 'इकबाल. ए पोएट एंड द पॉलिटीशियन, द वाइडनिंग डिवाइड, सरदार पटेल एंड इंडियन मुस्लिम्‍स', 'द प्राइस ऑफ पार्टीशन' और गांधी एंड द ब्रेकअप ऑफ इंडिया' ।

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