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Saat Aasmaan

Saat Aasmaan

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  • Pages: 252p
  • Year: 2015, 4th Ed.
  • Binding:  Paperback
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126709168
  •  
    लगातार बदल रहे जीवन और इसकी तीव्र परिवर्तनशीलता का अक्स है ‘सात आसमान’, अपने आप में चार सौ सालों की कहानी समेटे। यह कहानी है एक ही परिवार की। यह कहानी है जीवन के करवट बदलने की क्षमता की। विभिन्न काल-खंडों में जीवन विभिन्न साँचों में किस तरह ढलता जाता है उसे दर्शाते हुए ‘सात आसमान’ भारत के कई युगों को उद्घाटित करता है। प्रत्येक युग के सरोकारों को समझते-समझाते हुए यह उपन्यास अपने सम्पूर्ण विस्तार में न तो किसी को गौरवान्ति करता है और न ही किसी के पतन पर अट्टहास करता है। चार सौ सालों की दास्तान कहनेवाले इस उपन्यास में अतीत के सम्मोहन से मुक्त लेखक द्रष्टा भाव से जिसे जहाँ जैसा देखता है उसे वहाँ वैसा ही चित्रित करता है। उपन्यास के तमाम ज्ञात और मान्य रचना-प्रक्रिया से अलग शिल्प और शैली का अनूठापन लेकर उपस्थित हुआ है - ‘सात आसमान’। इसमें पात्रों को गति देने के लिए लेखक ने जहाँ निजी अनुभवों का सहारा लिया है वहीं इतिहास से जुड़ने में भी कोई गुरेज नहीं किया है जिसके कारण यह उपन्यास दृष्टि-सम्पन्न होकर पाठकों के सामने आया है। यह यथार्थ को उसकी समग्रता और गतिशीलता के साथ पकड़ता है और सांस्कृतिक विकास के बिन्दुओं से ठमकता हुआ बढ़ता है - ऐसे कि बरक्स इसकी सराहना के स्वर मुखर हो जाते हैं।

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    Asghar Wajahat

    जन्म : 1946, फतेहपुर, उत्तर प्रदेश।

    शिक्षा : अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से हिन्दी में एम.ए., पी-एच.डी. और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, दिल्ली से पोस्ट डाक्टोरल रिसर्च। 1971 से जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय, दिल्ली के हिन्दी विभाग में अध्यापन। पाँच वर्षों तक ओत्वोश लोरांड विश्वविद्यालय, बुडापेस्ट, हंगरी में अध्यापन। यूरोप और अमेरिका के कई विश्वविद्यालयों में व्याख्यान।

    पाँच उपन्यास, दो लघु उपन्यास, छह पूर्णकालिक नाटक, यात्रा संस्मरण की तीन पुस्तकें, नुक्कड़ नाटकों का एक संग्रह और साहित्यिक आलोचना की एक पुस्तक प्रकाशित।

    प्रमुख प्रकाशन : सात आसमान, कैसी आगी लगाई, बरखा रचाई, मनमाटी (उपन्यास), मैं हिन्दू हूँ, डेमोक्रेसिया (कहानी संग्रह)।

    रचनाओं का कई भारतीय और विदेशी भाषाओं में अनुवाद। नाटकों के मंचन देश-विदेश की कई भाषाओं में हैं।

    रचनात्मक लेखन के अलावा नियमित रूप से विभिन्न अखबारों और पत्रिकाओं के लिए लेखन। 2007 में बीबीसी हिन्दी के अतिथि सम्पादक। 'हंस’ पत्रिका के लिए विशेष अतिथि सम्पादक के रूप में 'भारतीय मुसलमान : वर्तमान और भविष्य’ विषय पर और 'वर्तमान साहित्य’ के लिए 'प्रवासी साहित्य’ पर विशेषांकों का सम्पादन।

    फिल्मों के लिए पटकथाएँ लिखने के अलावा धारावाहिक और डॉक्यूमेंटरी फिल्में भी बनाई हैं।

    कथा यूके सम्मान और हिन्दी अकादेमी, दिल्ली से सम्मानित; कई अन्य पुरस्कारों से भी सम्मानित।

    चित्रकला और पर्यटन में गहरी रुचि।

    सम्प्रति : प्रोफेसर, जामिया मिल्लिया इस्लामिया, दिल्ली।

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