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  • Pages: 128p
  • Year: 2014
  • Binding:  Paperback
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126726387
  •  
    Digital Edition Available Instantly on Pajkamal Books Library on
    वरिष्ठ कवि कुँवर नारायण घनीभूत जीवन-विवेक सम्पन्न रचनाकार हैं। इस विवेक की आँख से वे कृतियों, व्यक्तियों, प्रवृत्तियों व निष्पत्तियों में कुछ ऐसा देख लेते हैं जो अन्यत्र दुर्लभ है। समय-समय पर उनके द्वारा लिखे गए लेख आदि इसका प्रमाण हैं। 'रुख' कुँवर नारायण के गद्य की छठी पुस्तक है। पुस्तक के सम्पादक अनुराग वत्स के शब्दों में 'पहला हिस्सा स्वभाव में समीक्षात्मक, दूसरा संस्मरणात्मक और व$क्त व$क्त पर लिखी गई टिप्पणियों का है।' कुँवर जी विभिन्न कृतियों को पढ़ते हुए समीक्षात्मक अभिव्यक्तियों के बहाने अपने तर्कों की जाँच करते हैं। उन पद्धतियों पर भी प्रकाश डालते हैं जिन पर चलकर किसी कविता, उपन्यास या आलोचना के अन्त:पाठ तक पहुँचा जा सकता है। अपने समकालीनों या सहयात्रियों पर कुँवर जी संकोच मिश्रित आत्मीयता के साथ लिखते हैं। संक्षिप्त किन्तु महत्त्वपूर्ण। यह भी कि संस्मरणशीलता के बीच में कई बार अनेक ज़रूरी सूत्र रेखांकित हो गए हैं। नामवर सिंह पर लिखते हुए वे कहते हैं, 'साहित्य मुख्यत: राजनीतिक समाज नहीं है—कला और संस्कृति की दुनिया है। यह दुनिया बहुत बड़ी भी हो सकती है और बहुत संकुचित भी। एक ऐसे समय में जब राजनीति की नैतिकता का खुद का चेहरा विकृत हो चुका है, उसके संस्कारों की छाया साहित्य पर पडऩा शुभ लक्षण नहीं दीखता।' छोटी टिप्पणियाँ आगे कहीं विस्तार से लिखने या बोलने के सूत्र सरीखे हैं। या, किसी को लिखे गए पत्र के हिस्से। ये टिप्पणियाँ कई बार चकित कर देती हैं। मर्म को छूटी हुई। कृष्णा सोबती के लेखन पर कुँवर जी की टिप्पणी है, 'कृष्णा सोबती के अन्दर अन्याय के खिलाफ खड़े होने की जो एक दृढ़ता और मज़बूती है, वह उनकी भाषा के लगभग चुनौती भरे मुहावरे में प्रतिबिम्बित होती है।' समग्रत: एक विशिष्ट भाषिक संस्कार में व्यक्त यह पुस्तक सन्दर्भित विषयों के साथ स्वयं कुँवर नारायण के अन्तर्मन को बूझने का अनूठा अवसर है।

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    Kunwar Narain

    कुँवर नारायण

    आज के साहित्यिक परिदृश्य को दूर तक प्रभावित करनेवाले हिन्दी के शिखर कवि।

    जन्म: 1927। आधी सदी से अधिक समय से लेखन में सक्रिय हैं। कविता के साथ ही लगातार विभिन्न साहित्यिक, वैचारिक और सांस्कृतिक विषयों पर भी महत्त्वपूर्ण लेखन कर रहे हैं। कई पत्रिकाओं के सम्पादन और विभिन्न सांस्कृतिक संस्थाओं से जुड़े रहे हैं। उनकी अनेक कृतियों के भारतीय और विदेशी भाषाओं में अनुवाद प्रकाशित हो रहे हैं।

    प्रकाशित पुस्तकें - काव्य संग्रह: चक्रव्यूह, परिवेश: हम-तुम, तीसरा सप्तक, अपने सामने, कोई दूसरा नहीं, इन दिनों, हाशिए का गवाह; खंडकाव्य: आत्मजयी और वाजश्रवा के बहाने; कहानी संग्रह: आकारों के आसपास; समीक्षा: आज और आज से पहले, मेरे साक्षात्कार, साहित्य के अन्तर्विषयक सन्दर्भ; साक्षात्कार: तट पर हूँ पर तटस्थ नहीं; संचयन: कुँवर नारायण: संसार, कुँवर नारायण: उपस्थिति, चुनी हुई कविताएँ, प्रतिनिधि कविताएँ, नो अदर वर्ल्ड: अंग्रेज़ी अनुवाद और संचयन: अपूर्व नारायण।

    अनेक पुरस्कारों से सम्मानित जिनमें साहित्य अकादमी पुरस्कार, प्रेमचन्द पुरस्कार, शलाका सम्मान, राष्ट्रीय कबीर सम्मान, रोम का अन्तर्राष्ट्रीय ‘प्रीमिओ प़$ेरोनिआ’ पुरस्कार और भारत का सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान ‘ज्ञानपीठ’ पुरस्कार हैं। राष्ट्रीय सम्मान ‘पद्मभूषण’ से अलंकृत। साहित्य अकादमी की महत्तर सदस्यता (2010)।

    आरम्भिक जीवन फ़ैज़ाबाद और अयोध्या में बीता, उसके बाद अधिक समय लखनऊ में रहे। आजकल दिल्ली में पत्नी भारती और पुत्र अपूर्व के साथ रहते हैं।

    सम्पर्क: एच-1544, चितरंजन पार्क, नई दिल्ली-19

    फोन: (011) 26272508

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