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Raskapur

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  • Pages: 380p
  • Year: 2010, 2nd Ed.
  • Binding:  Paperback
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126702923
  •  
    "इतिहास कथा-लेखन के दौरान इतिहास में साहसी-सामर्थ्यवान नारियों का अभाव मुझे रह-रहकर सालता था ! एक प्रश्न हर बार उठता था कि मीराबाई, पन्नाधाय, हाडीरानी, कर्मवती आदि अँगुलियों पर गिनी जानेवाली नारियों के बाद, राजस्थान की उर्वरा भूमि बाँझ क्यों हो गई ?" इस दिशा में खोज आरम्भ करने के चमत्कारी परिणाम निकले ! एक-दो नहीं, दो दर्जन से भी अधिक नारी पात्र, इतिहास की गर्द झाड़ते मेरे सम्मुख जीवित हो उठे ! "एक तवायफ के प्रेम में अनुरक्त हो, उसे जयपुर का आधा राज्य दे डालने वाले महाराजा जगतसिंह की इतिहासकारों ने भरपूर भर्त्सना की थी लेकिन वस्त्रों की तरह स्त्रियाँ बदलनेवाले अति कामुक महाराज का, एक हीन कुल की स्त्री में अनुरक्ति का ऐसा उफान, जो उसे पटरानी-महारानियों से पृथक, महल 'रसविलास' के साथ जयपुर का आधा राज्य प्रदान कर, अपने समान स्तर पर ला बैठाए, मात्र वासना का परिणाम नहीं हो सकता !" उपन्यास होते हुए भी रसकपूर अस्सी प्रतिशत इतिहास है, उपन्यास के सौ के लगभग पात्रों में केवल पांच-सात नाम ही काल्पनिक हैं !

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    Anand Sharma

    जन्म: 7 दिसंबर, 1946, श्रीमहावीरजी (जि. करौली), राजस्थान।

    शिक्षा: स्नातक (राजस्थान विश्वविद्यालय)

    सन् 1968 से पत्रकारिता से जुड़ाव, 1987 से स्वतंत्र पत्रकार के रूप में राष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं के लिए लेखन। धर्मयुग साप्ताहिक हिन्दुस्तान, नवभारत टाइम्स, राष्ट्रीय सहारा और लोकमत सहित दर्जनों पत्र-पत्रिकाओं में राजनैतिक, न्यायपालिक, इतिहास, पुरातत्व, संगीत, शिक्षा, ज्योतिष, धर्म, फिल्म, पुस्तक समीक्षा आदिविषयों पर निरंतर लेखन करने वाले और स्वतंत्र लेखन को ही आजीविका बनाने वाले राजस्थान के एकमात्र पत्रकार साहित्यकार। आकाशवाणी जयपुर से लगभग 4 दर्जन वार्ताएँ, जयपुर दूरदर्शन के साथ थी नियमित जुड़ाव।

    आनंद शर्मा ने पत्रकारिता को इतिहास से जोड़ते हुए पत्रकारिता में नई विधा की शुरुआत की और राजस्थान के इतिहास के अछूते प्रसंग, घटनाएँ, इतिवृत पत्र-पत्रिकाओं के माध्यम से देशभर में प्रकाशित हो सके इसी क्रम में नारी सामर्थ्य की सर्वाधिक सबल प्रस्तुति ऐतिहासिक उपन्यास रसकपूर से हुई जो रसकपूर के इतिहास पर आठ वर्षों की अथक मेहनत और शोध से लिखा गया।

    कृतियाँ: इतिहास के नूपुर (1992); राजस्थान की इतिहास कथाएँ, रसकपूर (1995); ऐतिहासिक उपन्यास, एक और भीष्म (1998); मेवाड़ के यशस्वी रावत चूण्डा पर ऐतिहासिक उपन्यास, नरवद-सुप्यारदे (2001); ऐतिहासिक उपन्यास, माधवी, रसीतेराज (महाराज मानसिंक पर ऐतिहासिक उपन्यास, महाराणा प्रताप, नानृतम प्रकाशनाधीन उपन्यास हैं।

    सम्मान: राजस्थान साहित्य अकादमी उदयपुर से कथा विधा के सर्वोच्च रांगेपरायण पुरस्कार (1997) से सम्मानित। रसकपूर पर ‘सिनेविस्टा कम्यूनिकेशन’ 52 कड़ियों का धारावाहिक भी बना रहा है।

    संप्रति: स्वतंत्र पत्रकार-साहित्यकार।

    संपर्क: 645, किशोरकुंज, किशनपोल बाजार,

    जयपुर-302 001

     

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