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Ramvilas Sharma Ka Mahattva

Ramvilas Sharma Ka Mahattva

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  • Pages: 288
  • Year: 2018, 1st Ed.
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9789387462427
  •  
    रामविलास शर्मा उन भारतीय लेखकों, विचारकों, बुद्धिजीवियों और माक्र्सवादी चिंतकों में अग्रणी हैं जिन्होंने अपने समय में लेखन के ज़रिये निरंतर और सार्थक हस्तक्षेप किया है। अपने समय और समाज की समस्याओं पर विचार किया है और उनके निदान भी सुझाए हैं। अपने पहले लेख ‘निराला जी की कविता’ में उन्होंने लिखा था, ‘निराला जी की कविता नये युग की आँखों से यौवन को देखती हैं।’ उन्होंने सदैव नये युग की आँखों को महत्त्व दिया। आज जब बहुत सारे युवाओं ने हथियार डाल दिए हैं, और लेखक-आलोचक उत्तर-आधुनिकता और उत्तर-संरचनावाद जैसी बहसों में लिप्त हैं, हमें रामविलास जी की अडिगता, अविचलता और माक्र्सवादी दर्शन में अटूट आस्था तथा जन-संघर्षों में विश्वास को याद करने की ज़रूरत है। रामविलास शर्मा भारतेंदु हरिश्चन्द्र, महावीरप्रसाद द्विवेदी, प्रेमचन्द, आचार्य रामचंद्र शुक्ल और निराला की अगली कड़ी हैं। एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा था कि तुलसीदास को जो राम के नाम पर होता था वही अच्छा लगता था। देश और जनता के हित में जो होता है वह मुझे अच्छा लगता है। उनके लेखन की मुख्य चिंता हिन्दी और भारत रहे। संभवत: बीसवीं सदी में विश्व की किसी और भाषा में कोई ऐसा दूसरा आलोचक नहीं है जिसने अपने जातीय समाज, जातीय भाषा और साहित्य के सम्बन्ध में एक साथ क्रांतिकारी स्थापनाएँ दी हों। वे साहित्य समीक्षक, सभ्यता समीक्षक और संस्कृति समीक्षक एक साथ रहे हैं। यह पुस्तक आज के भारत के सन्दर्भ में उनका पुनर्पाठ करने का प्रयास है. अपने लम्बे लेखन काल में उन्होंने जिन-जिन विषयों को व्यापक ढंग से छुआ उनके सम्बन्ध में उनके विचारों को दुबारा पढऩे का भी और वर्तमान घटाटोप में कोई रास्ता निकालने का भी।

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    Ravibhushan

    रविभूषण

    बिहार प्रान्त के मुजफ्फ़रपुर जि़ले के गाँव चैनपुर-धरहरवा के एक सामान्य परिवार में दिसम्बर 1946 में जन्म। जन्मतिथि सम्भवत: 17 दिसम्बर। प्रारम्भिक शिक्षा गाँव के समीप के एक विद्यालय में। कॉलेज की आरम्भिक शिक्षा समस्तीपुर कॉलेज में। बिहार विश्वविद्यालय से हिन्दी ऑनर्स (1965) और हिन्दी भाषा साहित्य में एम.ए. (1967-68)। ऑनर्स एवं एम.ए. में स्वर्ण पदक प्राप्त। भागलपुर विश्वविद्यालय से डॉ.बच्चन सिंह के निर्देशन में ‘छायावाद में रंग-तत्त्व’ पर पी-एच.डी. (1985)।

    नवम्बर 1968 से अध्यापन-कार्य। जुलाई 1971 से बिहार लोक सेवा आयोग की संस्तुति पर भागलपुर विश्वविद्यालय में नियुक्त। टी.एन.बी. कॉलेज भागलपुर में पद स्थापित। भागलपुर विश्वविद्यालय में ही रीडर, प्रोफेसर बने। अक्टूबर 1991 से अक्टूबर 2008 तक राँची विश्वविद्यालय के दो कॉलेजों और हिन्दी विभाग में पदस्थापित। अक्टूबर 2008 में राँची विश्वविद्यालय के हिन्दी विभागाध्यक्ष पद से सेवा-निवृत्त।

    आलोचनात्मक लेखन की शुरुआत 1971-72 के दो निबन्धों—‘कामायनी’ में ‘नील वर्ण’ का प्रयोग’ और ‘नवगीत : कितनी हार, कितनी जीत’ से। 1979 से सांस्कृतिक मोर्चे पर अधिक सक्रिय। पहले ‘नवजनवादी सांस्कृतिक मोर्चा’ और बाद में ‘जन संस्कृति मंच’ से संबद्ध। फिलहाल ‘जसम’ के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष।

    दैनिक समाचार-पत्र ‘प्रभात खबर’ में पिछले 26 वर्ष से विविध विषयों पर निरन्तर लेखन। लगभग 20 वर्ष से इस पत्र के स्तम्भ लेखक और वार्षिक दीपावली अंक के अतिथि सम्पादक।

    सम्प्रति : एक साथ कई पुस्तकों पर कार्यरत।

    सम्पर्क : 204, रामेश्वरम अपार्टमेंट, साउथ ऑफिस पाड़ा, डोरंडा, राँची-834002

    ई-मेल : ravibhushan1408@gmail.com

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