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Ramcharitmanas

Ramcharitmanas

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  • Pages: 164p
  • Year: 2011
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126720415
  •  
    भक्ति-काव्य का संगीत और चित्रकला सरीखे सर्जनात्मक उपक्रमों से गहरा सम्बन्ध है। लोक-जीवन और लोक-साहित्य के विविध रूपाकारों से तो भक्ति-काव्य अनवरत संवाद करता ही है, शास्त्रीय रूपंकर कलाओं के साथ भी भक्ति-रचनाओं का मुखामुखम बना रहा है, अभी भी है। ‘रामलीला’ जैसे नाट्य-रूप का तो आरम्भ ही ‘रामचरितमानस’ के व्यापक प्रचार की दृष्टि से हुआ है। यह पुस्तक ‘रामचरितमानस’ का साहित्यिक या वैचारिक अध्ययन करने की बजाय ‘पाठ, लीला, चित्र और संगीत’ के साथ ‘रामचरितमानस’ के सम्बन्ध का अध्ययन करती है। लेखक ने बरसों तक शोध और फील्ड-वर्क करने के बाद यह विचारोत्तेजक और सूचना-समृद्ध अध्ययन प्रस्तुत किया है। तुलसीदास और ‘रामचरितमानस’ पर अनेक अध्ययन किए गए हैं। लेखक का प्रयत्न इन अध्ययनों का अध्ययन या इनसे संवाद-विवाद करने का नहीं, बल्कि ‘रामचरितमानस’ के कारण सम्भव हुए कुछ कलात्मक उपक्रमों का अध्ययन करने का है। यह पुस्तक ‘रामचरितमानस’ का विचारधारात्मक और साहित्यिक विश्लेषण नहीं, लोक-जीवन और कलात्मक उपक्रमों में उसकी उपस्थिति का रेखांकन करती है। ‘रामचरितमानस’ का यह अध्ययन अपने विशिष्ट फोकस और प्रमाण-पुष्ट सूचनाओं के कारण पाठकों को रोचक लगेगा, और भक्ति-संवेदना के अध्ययनों में एक खास मुकाम हासिल करेगा। मंजिल से सफर यह पुस्तक सवालों के जरिए विश्वनाथ प्रताप सिंह की राजनीतिक जीवनी है, आत्मकथा और जीवन वृतांत से अलग तरह का। पूरी पुस्तक प्रश्नोत्तर शैली में है। राजा बहादुर माण्डा राम गोपाल सिंह ने उन्हें बचपन में गोद लिया। इस तरह वे डैया से माण्डा परिवार के हो गए। ये दोनों रियासतें पड़ोसी हैं। बचपन से वे सृजनशील हैं। राजनीति में कदम रखने और शिखर तक पहुँचने की यात्रा का इस पुस्तक में रोचक वृतांत है। कवि और कलाकार बने रहने के लिए विश्वनाथ प्रताप सिंह ने सक्रिय राजनीति से अवकाश लिया। उनका स्वास्थ्य जैसा भी है वह उनकी संकल्प-शक्ति में मामूली अड़चन भी नहीं डालता। इसीलिए वे मुम्बई, दिल्ली और उत्तर प्रदेश के झुग्गी-झोपड़ी वासियों के लिए उस तरह संघर्षरत हैं जैसे कि भरी जवानी में बने हुए हों। इस पुस्तक के ग्यारह अध्यायों में आखिरी जो है उसमें कुछ मुद्दों पर उनके विचार हैं।

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    Raman Sinha

    जन्म: 1960।

    प्रकाशन: अनुवाद और रचना का उत्तर-जीवन, विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में संगीत-साहित्य और अनुवाद पर लेख एवं कविताएँ प्रकाशित। शमशेर पर एक पुस्तक का लेखन कार्य।

    सम्प्रति: भारतीय भाषा केन्द्र, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग में अध्यापन।

    सम्पर्क: 86, न्यू ट्रांजिट हाउस, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली-110067

    ई-मेल: ramanpsinha@gmail.com

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