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Pratinidhi Kahaniyan : Rajkamal Choudhary

Pratinidhi Kahaniyan : Rajkamal Choudhary

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  • Pages: 163p
  • Year: 2009
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788171784523
  •  
    प्रस्तुत संकलन की कहानियाँ रोटी, सेक्स एवं सुरक्षा के जटिल व्याकरण से जूझते आम जनजीवन की त्रासदी की कथा कहती हैं । राजकमल की मैथिली कहानियों के पात्र जहाँ सामाजिक मान्यताओं के व्‍यूह में फँसकर भी अपनी परंपराओं के मानदण्ड में परहेज से रहते हैं वहाँ इनकी हिन्दी कहानियों के पात्र महानगरीय जीवन के कशमकश में टूट-बिखर जाते हैं । यौन विकृतियाँ इनकी मैथिली एवं हिन्दी-दोनों भाषाओं की कहानियों का प्रमुख विषय है और दोनों जगह यह अर्थतंत्र द्वारा ही संचालित होती हैं । ये कहानियाँ कहानीकार की गहन जीवनानुभूति और तीक्ष्‍णतम अभिव्यक्ति का सबूत पेश करती हैं । राजकमल की कहानियाँ न केवल विषय के स्तर पर, बल्कि भाषा एवं शिल्प की अन्यान्य प्रविधियों के स्तर पर भी एक चुनौती है जो कई मायने में सराहनीय भी है और ग्रहणीय भी । इनकी कहानियों का सबसे बड़ा सच है कि जहाँ से इनकी कहानी खत्म होती है, उसकी असली शुरुआत वहीं से होती है ।

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    Rajkamal Chaudhari

    जन्म: 13 दिसम्बर, 1929 को अपने ननिहाल रामपुर हवेली में। पितृग्राम महिषी (सहरसा-बिहार)। इण्टरमीडिएट आर्ट्स में नामांकन, किन्तु उसे छोड़कर भागलपुर आकर इण्टरमीडिएट कॉमर्स में प्रवेश। मारवाड़ी कॉलेज, भागलपुर से 1955 में आई.कॉम.। 1953 में गया कॉलेज से बी.कॉम। लेखन की शुरुआत भागलपुर से ही हो गई थी। शिक्षा पूरी करने के बाद अधिकतर कलकत्ता में रहे। कई हिन्दी और मैथिली की पत्रिकाओं का सम्पादन भी किया। अन्तिम वर्षों में पूरी तरह स्वतंत्र लेखन। 19 जून, 1967 को पटना के अस्पताल में लम्बी बीमारी के बाद निधन।

    प्रकाशित कृतियाँ: हिन्दी में: अग्निस्नान, शहर था शहर नहीं था, नदी बहती थी, ताश के पत्तों का शहर, मछली मरी हुई (उपन्यास); बीस रानियों के बाइस्कोप, एक अनार: एक बीमार (लघु उपन्यास); मुक्ति प्रसंग, कंकावती, इस अकाल वेला में (कविता-संग्रह); मछली जाल, सामुद्रिक एवं अन्य कहानियाँ (कहानी-संग्रह)।

    मैथिली में: आदि कथा, पाथरफूल, आंदोलन (उपन्यास); स्वरगंधा, कविता राजकमलक (कविता-संग्रह); एकटा चंपाकली विषधर, कृति राजकमलक (कहानी-संग्रह)। अनूदित कृतियाँ: मूल बांग्ला से शंकर के उपन्यास चौरंगी और वाणी राय के उपन्यास चोखे आमार तृष्णा का हिन्दी अनुवाद।

    ‘राजकमल चौधरी रचनावली’ शीघ्र प्रकाश्य।

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      • Sarthak An Imprint of Rajkamal Prakshan
      • Chahak An Imprint of Rajkamal Prakshan
      • Funda An Imprint of Radhakrishna
      • Korak An Imprint of Radhakrishna
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    Address:1-B, Netaji Subhash Marg,
    Daryaganj, New Delhi-02

    Mail to: info@rajkamalprakashan.com

    Phone: +91 11 2327 4463/2328 8769

    Fax: +91 11 2327 8144