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Pratinidhi Kahaniyan : Rajendra Singh Bedi

Pratinidhi Kahaniyan : Rajendra Singh Bedi

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  • Pages: 142p
  • Year: 2017, 5th Ed.
  • Binding:  Paperback
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 10: 8171789552
  • ISBN 13: 9788171789559
  •  
    प्रतिनिधि कहानियां – राजेंद्रसिंह बेदी तरक्की पसंद उर्दू कथाकारों में राजेन्द्रसिंह बेदी का नाम अत्यंत आदर के साथ लिया जाता है ! उनकी रचनाओ की संख्या कम जरूर है लेकिन जमीन बहुत बड़ी है ! इस संग्रह में उनकी प्राय सभी महत्त्वपूर्ण कहानियां शामिल हैं ! इनसे जो सच्चिया उजागार हुई हैं, वे जिंदगी को मात्र जी लेने से नहीं, उसमें कुछ तलाशने से ही संभव हैं ! कहानी कहने के लिए बेदी के पास न तो बना-बनाया कोई सांचा है, न ही बुद्धिजीवी किस्म का कोई पूर्वग्रह ! यही कारण है कि इन कहानियों से गुजरते हुए हमारी अपनी संजीदगी बेदी की संजीदगी से एकमेक हो उठती है ! उनकी अनुभवों की सच्चाई एक कलात्मक व्यवस्था के तहत हमारे भीतर उतर जाती है और शैली का संयम तथा भाषा की नजाकत हमें मुग्ध कर लेते हैं ! अपनी कहानियों की नारी को बेदी ने रूह तक जानने और रचने की कोशिश की है ! इसलिए कल्याणी, लाजवंती, कीर्ति और इंदु जैसे जिवंत नारी-चरित्र पाठकों के दिलो-दिमाग पर सदा-सदा के लिए नक्श हो जाने की क्षमता से परिपूर्ण हैं !

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    Rajendra Singh Bedi

    राजेंद्रसिंह बेदी

    जन्म: लाहौर, 1 सितम्बर, 1915।

    शिक्षा: डी.ए.वी. कॉलेज से इंटरमीडिए।

    1932 में छात्रावस्था में मोहसिन लाहौरी के नाम से अंग्रेजी, उर्दू और पंजाबी में नज़्में और कहानियाँ लिखीं।

    विवाह: 1934 में, 19 वर्ष की अवस्था में, सोमवती से।

    नौकरी: 1932 से लाहौर डाकखाने में क्लर्की और 1943 में त्यागपत्र। फिर छह माह तक दिल्ली में सरकार के प्रचार विभाग में नौकरी। इसके बाद ऑल इंडिया रेडियो, लाहौर में आर्टिस्ट के रूप में नियुक्ति। 1948 में दिल्ली आ गए। इसके पहले 1946 में खुद का प्रकाशनगृह चलाने की नाकाम कोशिश। 1949 में बंबई चले गए जहाँ जीवन के अनत तक फिल्मों से जुड़े रहे।

    पुरस्कार: साहित्य अकादमी पुरस्कार, मोदी ग़ालिब पुरस्कार, और अनेक राज्यों के विशिष्ट पुरस्कारों से सम्मानित। भारत सरकार द्वारा ‘पद्मश्री’ की उपाधि से विभूषित।

    मृत्यु: फ़ालिज़ के दूसरे हमले के बाद 12 सितम्बर, 1984 को।

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