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Pratinidhi Kahaniyan : Bhishm Sahni

Pratinidhi Kahaniyan : Bhishm Sahni

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  • Pages: 173p
  • Year: 2019, 6th Ed.
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126703326
  •  
    भीष्म साहनी के कथा-साहित्य से गुजरना अपने समय को बढ़ते हुए गुजरना है ! हिंदी के प्रगतिशील कहानीकारों में उनका स्थान बहुत ऊँचा है ! यहाँ उनके साथ कहानी-संग्रहों से प्राय सभी प्रतिनिधि कहानियों को संकलित कर लिया गया है ! युग-सापेक्ष सामाजिक यथार्थ, मूल्यपरक अर्थवत्ता और रचनात्मक सादगी-इन कहानियों के कुछ ऐसे पहलू हैं, जो हमारे लिए किसी भी काल्पनिक और मनोरंजक दुनिया को निषिद्ध ठहराते हैं ! विभिन्न जीवन-स्थितियों में पड़े इनके असंख्य पत्र आधुनिक भारतीय समाज की अनेक जटिल परतों को पाठकों पर खोलते हैं ! उनकी बुराइयाँ, उनका अज्ञान और उनके हालत व्यक्तिगत नहीं, सार्वजनीन और व्यवस्थाजन्य हैं ! इसके साथ ही इन कहानियों में ऐसे चरित्रों की भी कमी नहीं, जो गहन मानवीय संवेदना से भरे हुए हैं और अपने-अपने यथास्थितिवाद से उबरते हुए एक सार्थक सामाजिक बदलाव के लिए संघर्षरत शक्तियों से जुड़कर नया अर्थ ग्रहण करते हैं, ! वे न तो अपनी भयावह और दारुण दशा से आक्रांत होते हैं, न निराश, बल्कि अपने साथ-साथ पाठकों को भी संघर्ष की एक नई उर्जा से भर जाते हैं !

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    Bhishm Sahni

    भीष्म साहनी

    जन्म : 8 अगस्त, 1915 को रावलपिंडी (पाकिस्तान) में।

    शिक्षा : हिन्दी-संस्कृत की प्रारम्भिक शिक्षा घर में। स्कूल में उर्दू और अँग्रेज़ी। गवर्नमेंट कॉलेज, लाहौर से अंग्रेज़ी साहित्य में एम.ए., फिर पंजाब विश्वविद्यालय से पीएच.डी.।

    बँटवारे से पूर्व थोड़ा व्यापार, साथ-साथ मानद (ऑनरेरी) अध्यापन। बँटवारे के बाद पत्रकारिता,

    ‘इप्टा’ नाटक मंडली में काम, बम्बई में बेकारी। फिर अम्बाला के  एक कॉलेज में तथा खालसा कॉलेज, अमृतसर में अध्यापन। तत्पश्चात् स्थायी रूप से दिल्ली विश्वविद्यालय के जाकिर हुसैन कॉलेज में साहित्य का प्राध्यापन। इस बीच लगभग सात वर्ष ‘विदेशी भाषा प्रकाशन गृह’, मॉस्को में अनुवादक के रूप में कार्य। अपने इस प्रवासकाल में उन्होंने रूसी भाषा का यथेष्ट अध्ययन और लगभग दो दर्जन रूसी पुस्तकों का अनुवाद किया। $करीब ढाई साल ‘नई कहानियाँ’ का सौजन्य-सम्पादन। ‘प्रगतिशील लेखक संघ’ तथा ‘अफ्रो-एशियाई लेखक संघ’ से भी सम्बद्ध रहे।

    प्रकाशित पुस्तकें : भाग्य-रेखा, पहला पाठ, भटकती राख, पटरियाँ, ऌऌऌवाङचू, चीलें, शोभायात्रा, निशाचर, पाली, डायन (कहानी-संग्रह); तमस, झरोखे, कडिय़ाँ, बसंती, मय्यादास की माड़ी, कुंतो (उपन्यास); माधवी, हानूश, कबिरा खड़ा बजार में, मुआवजे, सम्पूर्ण नाटक (दो खंडों में)(नाटक); आज के अतीत (आत्मकथा); गुलेल का खेल (बालोपयोगी कहानियाँ)।

    सम्मान : अन्य पुरस्कारों के अलावा तमस  के लिए ‘साहित्य अकादेमी पुरस्कार’ तथा हिन्दी अकादमी, दिल्ली का ‘शलाका सम्मान’।

    साहित्य अकादेमी के महत्तर सदस्य भी रहे।

    निधन : 11 जुलाई, 2003

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